मतदान के दिन सफाई ड्यूटी पर निगम कर्मचारी, कांग्रेस ने उठाए मताधिकार पर सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- मतदान के दिन सफाई ड्यूटी पर निगम कर्मचारी, विवाद खड़ा
- अवकाश के बावजूद 33 कर्मचारी बाथरूम सफाई में लगे
- कांग्रेस का आरोप, ड्यूटी के कारण नहीं डाल पाए वोट
- जोधपुर में मतदान वाले दिन सफाई कार्य पर सवाल
- निगम कर्मचारियों के मताधिकार को लेकर छिड़ी बहस
नरेश रमेश@ जोधपुर। नगर निकाय चुनाव के मतदान के बीच जोधपुर नगर निगम के कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मतदान के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित होने के बावजूद नगर निगम के कई कर्मचारियों को सफाई सहित दूसरे कामों में तैनात किए जाने का मामला सामने आया है। इसे लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि ड्यूटी के कारण कई कर्मचारी अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए।
जिला प्रशासन की ओर से मतदान के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। इसका उद्देश्य मतदाताओं को मतदान के लिए पर्याप्त अवसर देना था। हालांकि आवश्यक सेवाओं और चुनाव संबंधी कार्यों में लगे कर्मचारियों पर सामान्य अवकाश की व्यवस्था अलग हो सकती है।
ऐसे में अब सवाल यह है कि नगर निगम के जिन कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाया गया, उन्हें मतदान के लिए अलग से समय या कोई अन्य व्यवस्था दी गई थी या नहीं।
मतदान केंद्र पर बाथरूम की सफाई में लगाए 33 कर्मचारी
मिली जानकारी के मुताबिक नगर निगम की रोड गैंग से जुड़े 33 कर्मचारियों को मतदान के दिन पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर तैनात किया गया। इन कर्मचारियों से वहां बाथरूम सहित सफाई से जुड़े काम कराए जाने की बात सामने आई है।
वार्ड नंबर 67 में गुलाब सागर के सामने स्थित मतदान केंद्र के बाहर बने कचरा पॉइंट की सफाई कराई गई। इसी वार्ड में महावतों की मस्जिद के सामने स्थित चौक में भी कर्मचारियों को सफाई के काम में लगाया गया। बताया जा रहा है कि यहां एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद संबंधित स्थान पर सफाई की आवश्यकता थी।
कर्मचारियों को वोट डालने का समय मिला या नहीं?
यदि मतदान के दिन सफाई जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी तो क्या उन्हें अपने मतदान केंद्र पर जाकर वोट देने के लिए पर्याप्त समय दिया गया? क्या इसके लिए कर्मचारियों को अलग-अलग समय पर ड्यूटी से मुक्त करने की व्यवस्था थी? और जिन कर्मचारियों का मतदान केंद्र ड्यूटी स्थल से दूर था, उनके लिए क्या व्यवस्था की गई?
कर्मचारियों के वास्तव में मतदान से वंचित रहने की संख्या अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हुई है। इसलिए यह कहना कि सभी ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी वोट नहीं डाल पाए, प्रशासन की पुष्टि के बिना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस सचिव ने लगाया मताधिकार से वंचित करने का आरोप
कांग्रेस सचिव तीर्थराज कल्ला ने पूरे मामले को लेकर नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कल्ला का कहना है कि मतदान के दिन कर्मचारियों को इस तरह काम पर लगाने के कारण वे अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मतदान के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था तो नगर निगम के कर्मचारियों को वोट डालने के लिए पर्याप्त अवसर क्यों नहीं दिया गया?
कल्ला ने इसे कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा मामला बताते हुए आरोप लगाया कि निगम प्रशासन की व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को मतदान से वंचित होना पड़ा।
आवश्यक सेवा की ड्यूटी या मतदान में बाधा?
नगर निगम की सफाई व्यवस्था आवश्यक सेवाओं में शामिल होने के कारण मतदान के दिन भी शहर में पूरी तरह बंद नहीं की जा सकती। मतदान केंद्रों पर साफ-सफाई और बुनियादी व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए भी कर्मचारियों की जरूरत होती है।
इसलिए मामला केवल कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने का नहीं, बल्कि यह पता लगाने का है कि ड्यूटी के साथ उन्हें वोट डालने का अवसर दिया गया या नहीं।
यदि कर्मचारियों को मतदान के लिए समय दिया गया था तो निगम प्रशासन को इसकी व्यवस्था स्पष्ट करनी होगी। वहीं, अगर कर्मचारी लगातार ड्यूटी पर रहे और इस कारण अपने मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सके तो यह उनके मताधिकार से जुड़ा गंभीर सवाल बन सकता है।
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