सगी बहनों की आत्महत्या मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने 7 दिन में मांगी रिपोर्ट, दो आरोपी गिरफ्तार
News In Short
- जोधपुर में दुष्कर्म से तंग आकर दो बहनों ने 26 दिन के अंतराल में की थी आत्महत्या।
- पहली बहन ने 20 मार्च को, दूसरी बहन ने 15 अप्रैल को की थी आत्महत्या।
- आरोप है कि पुलिस ने 11 अप्रैल की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की, तो छोटी बहन चुनी मौत।
- राष्ट्रीय महिला आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी से 7 दिन में रिपोर्ट मांगकर दिखाई सख्ती।
- दो आरोपी महिपाल व गोपाल गिरफ्तार, डीएसपी व थानाधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू।
News In Detail
जोधपुर ग्रामीण के खेड़ापा थाना इलाके में दो सगी बहनों के यौन उत्पीड़न और उसके बाद सिस्टम की लाचारी के कारण हुई आत्महत्या के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। स्थानीय स्तर पर मचे बवाल के बाद देश की सर्वोच्च महिला संस्था, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस पूरे घटनाक्रम में सीधे हस्तक्षेप किया है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने तय की 7 दिन की समय सीमा
राष्ट्रीय महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष विजया रहाटकर ने इस पूरे मामले को वीमेन सेफ्टी और पुलिसिंग के मोर्चे पर बेहद गंभीर माना है। आयोग ने राजस्थान के मुख्य सचिव और डीजीपी से सात दिनों के भीतर एक व्यापक एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
आयोग ने पुलिस से पूछा है कि पीड़ित परिवार को अब तक क्या कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और सुरक्षा मुहैया कराई गई है। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसे गंभीर यौन अपराधों और ब्लैकमेलिंग के मामलों में त्वरित एक्शन सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान पुलिस क्या ठोस कदम उठा रही है, इसका रोडमैप भी मांगा गया है।
33 दिन की लापरवाही और वायरल ऑडियो
परिजनों का सीधा आरोप है कि बड़ी बहन की 20 मार्च को हुई मौत के बाद, छोटी बहन ने 11 अप्रैल को खेड़ापा थाने में महिपाल और अन्य के खिलाफ गैंगरेप और ब्लैकमेलिंग की नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी। अगर पुलिस इन 33 दिनों में हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय आरोपियों को दबोच लेती, तो 15 मई को छोटी बहन को पानी की टंकी पर चढ़कर अपनी जान नहीं देनी पड़ती।
इस बीच, सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल हो रही है (जिसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है)। दावा किया जा रहा है कि यह बातचीत आत्महत्या करने से ठीक पहले पीड़ित छोटी बहन और खेड़ापा थानाधिकारी लाखाराम के बीच की है, जिसमें थानाधिकारी पीड़िता की गुहार सुनने के बजाय उसकी रिपोर्ट को ही फर्जी बताकर टालते सुनाई दे रहे हैं।
डीएसपी और थानाधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच
मामले की चौतरफा घेराबंदी और चौंकानी वाली लापरवाही सामने आने के बाद जोधपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) पी.डी. नित्या ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में प्रथम दृष्टया ढिलाई बरतने के दोषी पाए गए डीएसपी भूराराम खिलेरी और थानाधिकारी लाखाराम के खिलाफ तत्काल प्रभाव से विभागीय जांच बिठा दी गई है।
वहीं, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य नामजद आरोपी महिपाल और उसके साथी गोपाल को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस की फोरेंसिक विंग और डिजिटल एक्सपर्ट्स अब वायरल ऑडियो और पीड़ितों के मोबाइल फोन के डेटा खंगालने में जुटे हैं ताकि कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने क्या कदम उठाया है?
राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान (Suo-Motu) लेते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव और डीजीपी से पुलिस की कथित लापरवाही, आरोपियों की गिरफ्तारी और फोरेंसिक साक्ष्यों पर 7 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
खेड़ापा थाना क्षेत्र के इस मामले में अब तक कौन से आरोपी पकड़े गए हैं?
पुलिस ने पीड़ितों को ब्लैकमेल करने और सामूहिक दुष्कर्म के मुख्य आरोपी महिपाल और गोपाल को गिरफ्तार कर लिया है।
किन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है?
जोधपुर ग्रामीण एसपी पी.डी. नित्या के आदेश पर जांच अधिकारी डीएसपी भूराराम खिलेरी और खेड़ापा थानाधिकारी लाखाराम के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।
ये भी पढ़ें:-
बिना कैंपस और स्टाफ के सिर्फ कागजों में चल रही बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी
पीहर जाने की जिद में मां ने 8 महीने की मासूम को पिलाया तेजाब, वेंटिलेटर पर बच्ची
महिला वन रक्षक ने सीनियर अधिकारी पर लगाए सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप, विभागीय जांच के आदेश
हाई कोर्ट ने आटा-साटा प्रथा को बताया अमानवीय और नैतिक रूप से दिवालिया, दी तलाक को मंजूरी