72 दुर्गम क्षेत्र कठिन स्थान घोषित; न्यायिक अधिकारियों के लिए 5,000 रुपए मासिक भत्ते की घोषणा

Jageshwar prasad | May 10, 2026, 15:53 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाईकोर्ट ने 72 दुर्गम क्षेत्रों को कठिन स्थान घोषित करते हुए न्यायिक अधिकारियों के लिए 5,000 रुपए मासिक भत्ते की घोषणा की है। यह लाभ 2016 से लागू होगा, जिससे अधिकारियों को 10 साल का बकाया एरियर मिलेगा।

News In Short

  • प्रदेश के 72 चुनौतीपूर्ण क्षेत्र हिल एरिया और कठिन स्थान के रूप में चिन्हित।
  • चिन्हित क्षेत्रों के न्यायिक अधिकारियों को मिलेगा 5,000 रुपए का विशेष भत्ता।
  • यह फैसला 1 जनवरी 2016 से लागू होगा, जिसमें 10 साल का एरियर मिलेगा।
  • माउंट आबू, कुंभलगढ़ और गोगुंदा 3 पर्वतीय क्षेत्र बाकि 69 कठिन क्षेत्र।
  • यह निर्णय द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की सिफारिश का अनुपालन है।

News In Detail

Jodhpur: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के न्यायिक ढांचे को मजबूत करने और दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्य के 72 पहाड़ी और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को हिल एरिया और कठिन स्थान के रूप में अधिसूचित किया है। इस श्रेणी में आने वाले क्षेत्रों में तैनात रहने वाले न्यायिक अधिकारियों को अब 5,000 रुपए प्रतिमाह का विशेष भत्ता दिया जाएगा।



1 जनवरी 2016 से प्रभावी

हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह वित्तीय लाभ 1 जनवरी 2016 से पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective effect) से लागू होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि पिछले 10 वर्षों से इन क्षेत्रों में कार्यरत रहे या वर्तमान में तैनात अधिकारियों को लगभग एक दशक का एरियर (बकाया राशि) एक साथ मिलेगा। यह निर्णय द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की सिफारिशों की अनुपालना में लिया गया है।



कौन से क्षेत्र इस श्रेणी में

राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से हाल ही में जारी अधिसूचना के अनुसार माउंट आबू, कुंभलगढ़ और गोगुंदा को राज्य के पर्वतीय क्षेत्र के रूप में मान्यता दी गई है। इस अधिसूचना में 29 न्यायिक जिलों के 69 क्षेत्रों को कठिन स्थान के रूप में वर्गीकृत किया गया है।



इस वर्गीकरण में अलवर, बाड़मेर, बांसवाड़ा, जैसलमेर, करौली, उदयपुर और टोंक जैसे जिलों के क्षेत्र शामिल हैं। विशेष तौर पर, पोकरण, शिव, चौहटन, खाजूवाला जैसे सीमावर्ती रेगिस्तानी इलाके और कुशलगढ़, घाटोल, बागीदौरा, शाहबाद व किशनगंज जैसे आदिवासी क्षेत्र इस सूची में प्रमुख स्थान रखते हैं।



प्रशासनिक सुधार और प्रोत्साहन की दिशा में कदम

लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि जो अधिकारी सुविधाओं के अभाव वाले सुदूर क्षेत्रों में न्याय वितरण का कार्य कर रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाए। हाईकोर्ट की फुल कोर्ट बैठक में लिए गए इस निर्णय से अब इन दुर्गम क्षेत्रों में पदस्थापना को लेकर अधिकारियों में सकारात्मक रुझान बढ़ेगा।



आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार के अन्य राजपत्रित अधिकारियों को इन क्षेत्रों में इससे अधिक भत्ता मिल रहा है, तो न्यायिक अधिकारी भी उसी उच्च दर के हकदार होंगे। भविष्य में हाईकोर्ट प्रशासन आवश्यकतानुसार इस सूची में नए क्षेत्रों को जोड़ने या हटाने का अधिकार भी रखता है।



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