जस्टिस एसपी शर्मा ने लगाए जस्टिस संदीप मेहता पर जलन के आरोप, कहा - वकीलों को हड़ताल के लिए उकसाया

Ashish Bhardwaj | Oct 01, 2026, 16:23 IST
जस्टिस विवाद पर बोले एसपी शर्मा
जस्टिस एसपी शर्मा ने जस्टिस संदीप मेहता पर गंभीर आरोप लगाते हुए जलन और भ्रांति का जिक्र किया है। जस्टिस मेहता के पत्र में शर्मा पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। शर्मा का कहना है कि उनके विवाद का आधार पेशेवर जलन है। वकीलों की हड़ताल की जड़ भी जस्टिस मेहता की उकसाहट में निहित है, जो कि 2011 से शुरू हुआ।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अगस्त में जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के चीफ जस्टिस को लिखा था पत्र।
  • इनमें एसपी शर्मा पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप था।
  • अब रिटायर हो चुके शर्मा ने पहली बार मीडिया से खुलकर बात की।
  • उनका दावा है कि मेहता ने जलन में वकीलों को हड़ताल के लिए उकसाया।

राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसपी शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस संदीप मेहता पर जलन के आरोप लगाए है। उन्होंने जलन के चलते वकीलों को हड़ताल के लिए उकसाने और झूठे आरोप लगाने का दावा किया है।



Justice SP Sharma ने एक न्यूज चैनल को इंटरव्यू दिया है। जस्टिस विवाद पर उन्होंने पहली बार मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें जस्टिस मेहता से जिरह की अनुमति मिलनी चाहिए। जिरह यानी सवाल-जवाब के जरिए किसी के दावों की परख।



शर्मा का आरोप है कि वकीलों की हड़ताल के पीछे जस्टिस मेहता

जस्टिस संदीप मेहता ने हाईकोर्ट के वकीलों को हड़ताल करने के लिए उकसाया था। वे मुझसे प्रोफेशनल जेलसी रखते हैं। शायद इसी का नतीजा है कि उन्होंने मेरे खिलाफ अनर्गल आरोप लगाए। जस्टिस मेहता की एकमात्र समस्या यह थी कि मैं यहां राजस्थान में था और वे मुझे यहां नहीं देखना चाहते थे।



जस्टिस संदीप मेहता के क्या थे आरोप

सीजेआई (CJI – Chief Justice of India) को अगस्त में मेहता ने पत्र भेजे थे। Justice Sandeep Mehta ने इनमें जस्टिस शर्मा पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। मेहता ने दावा किया था कि उन्हें कई शिकायतें मिली हैं। ये शिकायतें शर्मा की ईमानदारी और सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाती हैं।



ट्रांसफर और नए चीफ जस्टिस की मांग

इन शिकायतों के आधार पर मेहता ने बड़ी मांग रखी थी। उन्होंने कार्यवाहक चीफ जस्टिस को दूसरे हाईकोर्ट भेजने की मांग की। साथ ही नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति की बात कही।



उसी महीने के अंत में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक सिफारिश की। कॉलेजियम यानी जजों की नियुक्ति और तबादले की सिफारिश करने वाला वरिष्ठ जजों का समूह। इसने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय के अग्रवाल का नाम आगे बढ़ाया। उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई।



सुप्रीम कोर्ट जज के दखल पर सवाल

शर्मा के मुताबिक, मेहता को हाईकोर्ट के मामलों में दखल का अधिकार नहीं था। उन्होंने भी सीजेआई को पत्र लिखकर यह मुद्दा उठाया है। उनका सवाल साफ है। क्या कोई सुप्रीम कोर्ट जज हाईकोर्ट के मामलों में दखल दे सकता है?



1997 के फैसले का दिया हवाला

शर्मा ने कहा कि जजों के बीच ऐसे प्रशासनिक मुद्दे पहले भी उठे हैं। लेकिन ये कभी अखबारों की सुर्खियां नहीं बने। उन्होंने 1997 के 'प्रकाश चंद बनाम राजस्थान राज्य' मामले का जिक्र किया। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने सख्त दिशा-निर्देश तय किए थे।



2011 से चल रहा है विवाद

शर्मा ने कहा कि यह विवाद 2011 से चल रही है उस समय दोनों वकालत करते थे। 2011 में दोनों को सीनियर एडवोकेट के रूप में पदोन्नत किया गया। मुझे बिना कोई आवेदन दिए पदोन्नत किया गया था। फुल कोर्ट ने सर्वसम्मति से मुझे वरिष्ठ अधिवक्ता चुना था। और जस्टिस मेहता को इसके लिए आवेदन करना पड़ा था।




पहली पीढ़ी के वकील होने का जिक्र

शर्मा ने बताया कि वे अपने परिवार की पहली पीढ़ी के वकील हैं। उनके परिवार में कोई वकील या जज नहीं रहा। उनके मुताबिक, जस्टिस मेहता प्रतिष्ठित न्यायिक परिवार से आते हैं। शर्मा का दावा है कि मेहता ने उन्हें मुख्य न्यायाधीश नहीं बनने दिया।



शर्मा आगे बताते है कि अगर मुझे मदद करनी ही होती तो मैं अपने परिवार की मदद करता। मेरी मां की पेंशन का मामला लंबित है। मेरे पिता सेना में थे। मेरे भाई (जो पहले सेना में थे) की याचिका भी लंबित है।




800 तबादलों के आरोप पर जवाब

शर्मा पर न्यायिक अफसरों के तबादलों को लेकर भी आरोप लगे थे। आरोप था कि मनमाफिक फैसले न देने वालों के तबादले हुए। शर्मा ने इसे बिल्कुल हास्यास्पद बताया। उनके मुताबिक, कुल 800 तबादले किए गए थे।



ये तबादले आमतौर पर रजिस्ट्रार जनरल के इनपुट पर होते हैं। देखा जाता है कि कोई अफसर एक जगह कितने समय से है। शर्मा ने पूछा कि नाराज अफसर सिर्फ संदीप मेहता से ही शिकायत क्यों करता? उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान से और भी जज हैं।



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