कन्हैयालाल हत्याकांड में हाई कोर्ट से आरोपियों को झटका, UAPA के तहत ट्रायल जारी रहेगा

Jageshwar Prasad | Nov 06, 2026, 16:25 IST
उदयपुर की दुकान में हुई हत्या पर अदालत का सख्त रुख
राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर पीठ ने कन्हैयालाल हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट के आरोप तय करने के आदेशों को चुनौती देने वाली सभी अपीलें खारिज कर दीं। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के आदेशों को वैध माना और उन्हें बरकरार रखा।

सोर्स के अनुसार ये आदेश 12 जनवरी और 13 फरवरी 2024 को विशेष एनआईए अदालत ने जारी किए थे। इस फैसले के बाद मुकदमा अब बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ेगा। अदालत ने माना कि आरोप तय होने का चरण पहले ही प्रारंभिक न्यायिक जांच पार कर चुका है।




किन धाराओं में चलेगा ट्रायल

सोर्स के मुताबिक आठ प्रमुख आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य), 18 (साजिश) और 20 (आतंकवादी गिरोह का सदस्य होना) के तहत ट्रायल जारी रहेगा। इसके साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की अन्य गंभीर धाराएं भी लागू हैं। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की और चार्जशीट दाखिल की।



आरोपियों की अपीलों पर अदालत की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने साफ किया कि आरोप तय करने के शुरुआती चरण में किसी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम फैसला नहीं लिया जाता। अदालत ने यह भी कहा कि साजिश का कोई प्रत्यक्ष या प्रत्यक्षदर्शी सबूत न होना किसी आरोपी को बरी करने का आधार नहीं बन सकता। परिस्थितियों के सामूहिक असर से भी आपराधिक साजिश का पता लगाया जा सकता है।




बचाव पक्ष की दलीलें खारिज

सुनवाई में बचाव पक्ष की कई दलीलें अदालत ने सिरे से ठुकरा दीं। आरोपियों के बनाए वीडियो और ऑनलाइन धमकियों पर दी गई सफाई को स्वीकार नहीं किया गया। किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन से सीधा जुड़ाव न होने का तर्क भी UAPA की धाराओं से राहत के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। अदालत के अनुसार इन सभी बातों की जांच ट्रायल के दौरान ही होगी।



ट्रायल कोर्ट करेगा सबूतों का मूल्यांकन

हाई कोर्ट ने कहा कि मुकदमे के दौरान पेश होने वाले सभी सबूतों और गवाहों का स्वतंत्र मूल्यांकन निचली अदालत करेगी। इसका मतलब है कि अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने के बाद ही होगा। तब तक हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिला रहेगा।




पिछली जमानत याचिकाओं पर भी सख्ती

मेरी खोज में 3-4 अक्टूबर 2026 का एक अलग हाईकोर्ट फैसला भी मिला। उस फैसले में पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज हुई थीं। अदालत ने वहां भी UAPA के तहत प्रारंभिक तौर पर मामला बनने की बात कही थी। इससे साफ है कि इस मामले में अदालत का रुख लगातार सख्त बना हुआ है।




कन्हैयालाल हत्याकांड के बारे में

कन्हैयालाल हत्याकांड उदयपुर में हुआ एक अत्यंत जघन्य और सनसनीखेज मामला है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। यह वारदात 28 जून 2022 को उदयपुर के मालदा स्ट्रीट इलाके में स्थित कन्हैयालाल तेली की टेलरिंग दुकान (सुप्रीम टेलर्स) में हुई थी।



कन्हैयालाल के 8 वर्षीय बेटे द्वारा सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा (भाजपा की तत्कालीन प्रवक्ता) के समर्थन में एक पोस्ट शेयर हो गई थी। इसके बाद कन्हैयालाल को लगातार धमकियां मिल रही थीं और उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी।



दो मुख्य आरोपियों- मोहम्मद रियाज़ अत्तारी और गौस मोहम्मद- ने कपड़े का नाप देने के बहाने दुकान में प्रवेश किया और धारदार हथियारों से कन्हैयालाल की गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी। आरोपियों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाया और आतंक फैलाने के उद्देश्य से इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।



घटना की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी थी। एनआईए ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और आईपीसी की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया।



एनआईए ने इस पूरे मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें से 9 आरोपी भारत में पुलिस/न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि 2 आरोपी पाकिस्तानी नागरिक बताए जाते हैं जो अभी भी एनआईए की गिरफ्त से बाहर हैं। मुख्य आरोपी अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हैं।

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