पूर्व विधायक ने मांगी स्थायी पैरोल, जेल में काट रहा तीन साल की सजा
समझें क्या है पूरा मामला
- पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा ने स्थायी पैरोल के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
- हाई कोर्ट ने स्टेट पैरोल कमेटी को 7 दिन में फैसला लेने का निर्देश दिया।
- मीणा 20 साल पुराने SDM पर पिस्टल तानने केस में 3 साल की सजा काट रहे हैं।
- 2005 के मामले में उन्हें सरकारी काम में बाधा और धमकी का दोषी पाया गया था।
- सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद उन्होंने 21 मई 2025 को सरेंडर किया था।
एसडीएम पर पिस्टल तानने के 20 साल पुराने मामले में तीन साल की सजा काट रहे पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा ने स्थायी पैरोल मांगी हैं। पैरोल आवेदन पर समयबद्ध फैसला नहीं होने पर उसने राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुनवाई करते हुए जस्टिस गणेश राम मीणा व जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की खंडपीठ ने स्टेट पैरोल कमेटी को 7 दिन में पैरोल प्रार्थना पत्र पर फैसला लेने के लिए कहा है। कंवरलाल मीणा की ओर से कहा गया था कि करीब दो माह से ज्यादा समय हो जाने के बाद भी स्टेट कमेटी ने पैरोल प्रार्थना पत्र पर निर्णय नहीं लिया है।
याचिका में पैरोल नियमों को चुनौती देते हुए कहा गया था कि इसमें निर्णय लेने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं हैं। ऐसे में अधिकारियों को असीमित समय मिल जाता है, जो कैदी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हनन हैं।
पिछले साल किया था सरेंडर
दरअसल, करीब 20 साल पुराने मामले में एक मई 2025 को हाई कोर्ट ने विधायक की अपील को खारिज करते हुए अपीलेंट कोर्ट (एडीजे, अकलेरा, झालावाड़) के फैसले को बरकरार रखा था। अपीलेंट कोर्ट ने विधायक को राजकार्य में बाधा डालने, सरकारी अधिकारियों को डराने-धमकाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में दोषी करार देते हुए 3 साल की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कंवरलाल मीणा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद कंवरलाल मीणा ने 21 मई 2025 को झालावाड़ कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इसके बाद विधानसभा स्पीकर ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी थी।
20 साल पहले SDM पर तान दी थी पिस्टल
3 फरवरी 2005 को झालावाड़ के मनोहर थाने से दो किमी दूर दांगीपुरा-राजगढ़ मोड़ पर गांव के लोगों ने खाताखेड़ी के उपसरपंच के चुनाव के संबंध में फिर से मतदान करवाने के लिए रास्ता रोक रखा था।
सूचना पर तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता, प्रोबेशनर आईएएस डॉक्टर प्रीतम बी यशवंत और तहसीलदार रामकुमार के साथ मौके पर पहुंचे। वे लोगों को समझा रहे थे। करीब आधे घंटे बाद कंवरलाल मीणा अपने कुछ साथियों के साथ मौके पर आया। उसने एसडीएम मेहता की कनपटी पर पिस्टल तानकर कहा कि दो मिनट में वोटों की गिनती फिर से कराने की घोषणा नहीं की तो जान से मार दूंगा।
मेहता ने उससे कहा- इस तरह से जान जा सकती है, लेकिन दुबारा वोटों की गिनती की घोषणा नहीं हो सकती है। गांव के लोगों ने कंवरलाल को समझाया। इसके बाद उसने विभाग के फोटोग्राफर के कैमरे से कैसेट निकालकर तोड़ दिया और फिर जला दिया। कंवरलाल ने डॉक्टर प्रीतम का डिजिटल कैमरा भी छीन लिया। करीब 20 मिनट बाद कैमरा लौटाया।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने कंवरलाल मीणा को 2 अप्रैल 2018 को दोषमुक्त किया था। अपील कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए उसे दोषी करार दिया था।
FAQ
- कंवरलाल मीणा किस मामले में जेल में हैं?
2005 में झालावाड़ में SDM पर पिस्टल तानने, राजकार्य में बाधा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दोष में 3 साल की सजा हुई। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने फैसले को बरकरार रखा। 21 मई 2025 को उन्होंने सरेंडर किया था। - कंवरलाल मीणा किस मामले में हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्टेट पैरोल कमेटी को 7 दिन में स्थायी पैरोल आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया। कंवरलाल का कहना था कि दो महीने से ज्यादा समय बाद भी कमेटी ने कोई निर्णय नहीं लिया। - कंवरलाल मीणा की विधायक सदस्यता क्यों गई?
सजा होने के बाद जब उन्होंने 21 मई 2025 को सरेंडर किया, तो विधानसभा स्पीकर ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। दोषसिद्धि के बाद जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत सदस्यता स्वतः समाप्त होने का प्रावधान है।
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