केवलादेव नेशनल पार्क में वाटरहोल सेंसस में भी नहीं दिखे ब्लैकबक, शिकार होने की आशंका

Jageshwar prasad | May 18, 2026, 13:47 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के भरतपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में काले हिरणों (ब्लैकबक) को दोबारा बसाने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। 2 साल पहले करौली से रेस्क्यू कर लाए गए तीनों काले हिरण पार्क से पूरी तरह गायब हो चुके हैं।

News In Short

  • करौली से लाकर घना में छोड़े गए 3 ब्लैकबक पूरी तरह लापता हैं।
  • वाटरहोल सेंसस और दैनिक गश्त में भी नजर नहीं आए।
  • पार्क में मौजूद हायना और जैकल का शिकार होने की आशंका।
  • शुरुआती महीनों में पार्क में 2 बच्चों का जन्म हुआ था, जिससे उम्मीद जगी थी।
  • विभाग की अब 15 से 20 ब्लैकबक लाकर सस्टेनेबल पॉपुलेशन बढ़ाने की योजना।

News In Detail

भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, जिसे पूरी दुनिया घना पक्षी विहार के नाम से जानती है, वहां से एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है। पार्क के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को मजबूत करने और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण पैदा करने के उद्देश्य से शुरू किया गया ब्लैकबक मिशन पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ है।



करौली के मंदिर से रेस्क्यू कर लाए गए थे हिरण

घना के उप वन संरक्षक (DFO) चेतन कुमार बी वी ने बताया कि करीब दो साल पहले करौली क्षेत्र के एक मंदिर परिसर से तीन काले हिरणों को रेस्क्यू किया गया था। वहां से इन्हें सुरक्षित ट्रांसलोकेशन प्रक्रिया के तहत केवलादेव पार्क के प्राकृतिक वातावरण में लाकर छोड़ दिया गया था।



शुरुआती महीनों में इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखे। वनकर्मियों की गश्ती टीमों ने न सिर्फ इनकी साइटिंग रिकॉर्ड की, बल्कि इन काले हिरणों ने पार्क में बच्चों को भी जन्म दिया था। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी।



वाटरहोल सेंसस में नहीं आए नजर

पार्क प्रशासन की नींद तब टूटी जब इस साल आयोजित हुए वाटरहोल सेंसस (वन्यजीवों की सालाना पानी के स्रोतों पर होने वाली गणना) की अंतिम रिपोर्ट आई। आमतौर पर इस सेंसस में पानी पीने आने वाले हर छोटे-बड़े वन्यजीव का रिकॉर्ड रखा जाता है, लेकिन इस बार की सूची में एक भी ब्लैकबक दर्ज नहीं हुआ। पिछले करीब 6 से 7 महीनों से किसी भी कैमरे या वनकर्मी को ये हिरण दिखाई नहीं दिए हैं।



वन विभाग ने अब यह साफ किया है कि यह कोई वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया री-इंट्रोडक्शन प्रोग्राम नहीं था, बल्कि केवल एक सामान्य रेस्क्यू शिफ्टिंग थी। यही वजह रही कि इन पर उस स्तर की वैज्ञानिक निगरानी नहीं रखी जा सकी, जैसी रखी जानी चाहिए थी।



हायना और जैकल ने बनाया निवाला?

पार्क प्रशासन अब इन वन्यजीवों के साथ किसी अनहोनी या प्राकृतिक शिकार होने की प्रबल आशंका जता रहा है। डीएफओ के अनुसार, केवलादेव नेशनल पार्क में हायना और जैकल की तादाद काफी अच्छी है। चूंकि ये ब्लैकबक पहले एक मंदिर के सुरक्षित और सीमित दायरे में पले-बढ़े थे, इसलिए वे घने जंगल के खुले वातावरण और हिंसक वन्यजीवों के तौर-तरीकों से अनजान थे। मुमकिन है कि वे खुद को बचा नहीं पाए और शिकारियों का निवाला बन गए।



1980 के दशक में लुप्त हो गए थे ये जीव

केवलादेव उद्यान का इतिहास गवाह है कि 1980 के दशक तक यहां काले हिरण, फिशिंग कैट और ऑटर भारी संख्या में मौजूद थे। लेकिन समय के साथ मानवीय दखल और हेबिटाट (प्राकृतिक आवास) में आए बदलावों के कारण ये जीव यहां से पूरी तरह लुप्त हो गए।



हालांकि, वन विभाग इस असफलता के बाद भी हार मानने को तैयार नहीं है। पार्क के नए मैनेजमेंट और प्रिस्क्रिप्शन प्लान के तहत अब बड़े पैमाने पर काले हिरणों को बसाने की तैयारी है। भविष्य में देश के अन्य अभ्यारण्यों से एक साथ 15 से 20 ब्लैकबक का कुनबा यहां लाया जाएगा, ताकि वे समूह में रहकर खुद को सुरक्षित रख सकें और अपनी आबादी बढ़ा सकें।



अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

केवलादेव नेशनल पार्क में लाए गए ब्लैकबक कहां से रेस्क्यू किए गए थे?

ये काले हिरण करीब दो साल पहले राजस्थान के करौली जिले में स्थित एक मंदिर परिसर से रेस्क्यू कर भरतपुर के घना पक्षी विहार लाए गए थे।



वन विभाग इन काले हिरणों के गायब होने के पीछे क्या मुख्य कारण मान रहा है?

वन विभाग की प्राथमिक आशंका है कि ये हिरण पहले खुले जंगल में रहने के आदी नहीं थे, जिसके कारण वे पार्क में मौजूद हायना या जैकल जैसे हिंसक जीवों का प्राकृतिक शिकार बन गए।



भविष्य में ब्लैकबक को दोबारा बसाने के लिए वन विभाग का क्या प्लान है?

विभाग अब छोटे स्तर के बजाय बड़े पैमाने पर काम करेगा। इसके तहत तकनीकी अध्ययन के बाद एक साथ 15 से 20 काले हिरणों को पार्क में लाकर छोड़ा जाएगा ताकि उनकी एक स्थायी आबादी विकसित हो सके।



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