खाटूश्यामजी पालिका अध्यक्ष चुनाव विवाद: हाईकोर्ट ने कहा,समय पर चुनाव कराना दखल नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने खाटूश्यामजी नगर पालिका के अध्यक्ष पद के चुनाव में दखल देने से इंकार करते हुए सिंगल बैंच के आदेश को सही बताया है। कोर्ट ने कहा है कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू होने पर अदालतों को इसे रोकने या स्थगित करने से बचना चाहिए। चुनाव से असंतुष्ट पक्षों को चुनाव परिणाम के बाद चुनाव याचिका के जरिए ही दखल की गुहार करनी चाहिए।
क्या था विवाद
खाटूश्यामजी नगर पालिका बोर्ड के अध्यक्ष पद के लिए मतदान 21 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच होना था। नगर पालिका में कुल 20 निर्वाचित पार्षद थे। इनमें से 19 पार्षदों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया था। लेकिन,वार्ड नंबर 10 से निर्वाचित पार्षद और अध्यक्ष पद की प्रत्याशी लक्ष्मी कुमारी का कथित अपहरण होने से वह मतदान नहीं कर पाई थीं।
इस पर राज्य निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर 2026 को रिटर्निंग ऑफिसर को 25 सितंबर 2026 को मतदान की प्रक्रिया जारी रखने के आदेश दिए। ताकि लक्ष्मी कुमारी का वोट डाला जा सके।
इस आदेश को वार्ड नंबर 11 से निर्वाचित पार्षद विनीता पूनिया ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 24 सितंबर को सिंगल बेंच ने विनीता पूनिया की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य चुनाव आयोग को रद्ध कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम दंगे,हिंसा,लोक शांति भंग होने या प्राकृतिक आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी अन्य स्थिति में स्थगित नहीं किया जा सकता।
मतदान के समय किसी एक पार्षद मतदाता की गैर-हाजिरी पुनर्मतदान या मतदान अवधि बढ़ाने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने रिटर्निंग आॅफिसर को 21 सितंबर को सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक डाले गए वोटों की गिनती करने और परिणाम घोषित करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के पालन में रिटर्निंग ऑफिसर ने मतगणना पूरी की और 26 सितंबर 2026 को विनीता पूनियां को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दिया।
डीबी पहुंचे चुनाव आयोग व लक्ष्मीकुमारी
सिंगल बैंच के इस आदेश को राज्य चुनाव आयोग व लक्ष्मीकुमारी ने डिविजन बैंच में चुनौती दी। उनका कहना था कि सिंगल बैंच में याचिकाकर्ता ने लक्ष्मीकुमारी को पार्टी नहीं बनाया था जबकि यह जरुरी था। आयोग का कहना था कि निर्वाचन नियमों के अनुसार चुनाव आयोग के पास मतदान का समय बढ़ाने या स्थगित करने का वैधानिक अधिकार है। सिंगल बेंच को चल रही चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।
दखल नहीं बल्कि समय पर पूरा करने का था आदेश
चीफ जस्टिस संजय के.अग्रवाल व जस्टिस समीर जैन ने दोनों अपील खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने कहा है कि सिंगल बैंच का आदेश चुनावी प्रक्रिया में दखल नहीं,बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया को समय पर पूरा करवाने का था। कोर्ट ने कहा है कि लक्ष्मीकुमारी के अपहरण के दावे,मतदान से गैर—हाजिरी के कारण या निर्वाचन अधिकारियों की शक्तियों के इस्तेमाल जैसे तथ्यात्मक और विवादास्पद मुद्दों पर सबूतों की समीक्षा होना जरुरी है। और यह काम केवल चुनाव याचिका के जरिए ही हो सकता है।