फिर गरमाया रीट 2021 पेपर लीक का मुद्दा, किरोड़ी लाल मीणा ने लिखा अमित शाह को पत्र
समझें क्या है पूरा मामला
- किरोड़ी लाल मीणा ने अमित शाह को भेजा 11 पन्नों का पत्र।
- रीट-2021 पेपर लीक मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग।
- कई नेताओं और अधिकारियों से पूछताछ की मांग उठाई।
- कोलकाता प्रिंटिंग प्रेस को ठेका देने पर खड़े किए सवाल।
- मीणा ने 17 परीक्षाओं में पेपर लीक का किया दावा।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने रीट-2021 पेपर लीक मामले में अमित शाह को पत्र भेजा। यह पत्र 25 जुलाई 2026 को भेजा गया और इसमें 11 पन्ने हैं। मीणा ने मामले की व्यापक और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कई नेताओं और अधिकारियों से पूछताछ की मांग की है। पत्र में कोलकाता की एक प्रिंटिंग प्रेस को दिए गए ठेके पर भी सवाल उठाया गया है।
मीणा ने भेजा 11 पन्नों का पत्र
राजस्थान के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को 25 जुलाई 2026 को पत्र भेजा। यह पत्र रीट 2021 पेपर लीक मामले से जुड़ा है और 11 पन्नों का है।
पत्र में मीणा ने मामले की व्यापक और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस मामले की अब तक निष्पक्ष जांच नहीं हुई। उनके अनुसार कई प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों की भूमिका जांच से बाहर रही है।
मीणा के आरोपों के दायरे में पूर्व शिक्षा मंत्री और वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का नाम भी है। इसके अलावा पूर्व मंत्री सुभाष गर्ग, कुछ विधायक और तत्कालीन सीएमओ अधिकारी भी शामिल हैं। मीणा ने गांधीयन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस एंड गवर्नेंस (GISSG) और राजीव गांधी स्टडी सर्किल (RGSC) से जुड़े पदाधिकारियों से भी पूछताछ की मांग की है। यह सभी आरोप फिलहाल मीणा के पत्र में दर्ज दावे हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
17 परीक्षाओं में लीक का दावा
पत्र में मीणा ने एक बड़ा आंकड़ा भी पेश किया है। उनके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में 18 प्रतियोगी परीक्षाएं हुई थीं। इनमें से 17 परीक्षाओं के पेपर लीक होने का दावा किया गया है।
मीणा का कहना है कि वे विपक्ष में रहते हुए भी यह मुद्दा लगातार उठाते रहे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया था। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को भी कई शिकायतें भेजी गई थीं।
उनके अनुसार ED में मामला दर्ज तो हुआ, लेकिन प्रभावशाली लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मीणा का दावा है कि पर्याप्त सबूत होने के बावजूद कार्रवाई में देरी हुई। यह भी मीणा का अपना आरोप है, जिसकी पुष्टि किसी सरकारी एजेंसी ने अभी नहीं की है।
प्रिंटिंग प्रेस पर सवाल
पत्र में मीणा ने रीट-2021 के प्रश्नपत्र छपाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह काम नियमों के विपरीत कोलकाता की सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस को दिया गया।
मीणा के अनुसार तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष डॉ. डी.पी. जारोली ने यह ठेका दबाव में दिया। उन्होंने दावा किया कि यह दबाव तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री सुभाष गर्ग और सीएमओ की ओर से बनाया गया। पत्र में यह भी लिखा है कि बोर्ड ने लगातार दूसरी बार इसी प्रेस को चुना, जो नियमों के खिलाफ था। यह पूरा आरोप मीणा के पत्र पर आधारित है, इसे स्वतंत्र स्रोत से अभी वेरीफाई नहीं किया गया है।
जारोली के संदेश का जिक्र
पत्र में डॉ. डी.पी. जारोली के एक कथित बयान का भी हवाला दिया गया है। मीणा के मुताबिक जारोली ने पद से हटाए जाने के बाद यह बात कही थी। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक संरक्षण में ही रीट का पेपर लीक हुआ।
पत्र में एक खास तारीख और समय का भी उल्लेख है। दावा है कि 4 फरवरी 2022 को सुबह 9:33 बजे जारोली ने एक व्हाट्सएप संदेश भेजा था। यह संदेश राजस्थान विश्वविद्यालय पेंशनर्स एसोसिएशन के समूह में भेजा गया बताया जाता है।
मीणा के अनुसार उस संदेश में जारोली ने खुद को 'बलि का बकरा' बनाए जाने की बात कही थी। जारोली ने यह भी लिखा था कि कुछ बड़े नेताओं और नौकरशाहों के दबाव में उन्होंने सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस को काम दिया। यह दावा भी फिलहाल मीणा के पत्र पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
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