शेखावाटी की प्यास बुझाएगा किशाऊ: राजस्थान के लिए 124 MCM पानी का रास्ता साफ
समझें क्या है पूरा मामला
- किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों के बीच दिल्ली में हुआ समझौता।
- राजस्थान का जल हिस्सा 124 MCM प्रस्तावित है।
- शेखावाटी की जल जरूरतों से परियोजना को जोड़ने की तैयारी।
- जल घटक की 90% लागत केंद्र सरकार उठाएगी।
राजस्थान के पानी की कमी वाले शेखावाटी इलाके के लिए एक और बड़े जल प्रोजेक्ट का रास्ता आगे बढ़ा है। यमुना के पुराने हिस्से का पानी सीकर, चूरू और झुंझुनूं तक लाने की योजना के बाद अब किशाऊ बांध से भी राजस्थान को पानी मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में राजस्थान समेत 6 राज्यों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर एमओयू किया। इस दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे।
किशाऊ परियोजना टौंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित है। टौंस यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। इस प्रोजेक्ट का फायदा राजस्थान के साथ दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को मिलना है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होगा। इससे राजस्थान समेत उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को फायदा होगा।
राजस्थान के लिए क्यों अहम किशाऊ बांध प्रोजेक्ट
राजस्थान के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए अहम है, क्योंकि किशाऊ जलाशय से राज्य के लिए 124 MCM पानी का लाभ प्रस्तावित है। हालांकि इस आंकड़े को अभी अंतिम जल आवंटन नहीं माना जाना चाहिए। परियोजना से राज्यों को मिलने वाले पानी का अंतिम बंटवारा संबंधित समझौतों और मंजूर व्यवस्थाओं के आधार पर तय होगा।
दिल्ली में किशाऊ परियोजना को लेकर 6 राज्यों के बीच बनी बात
किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने की जमीन जून 2026 में ही तैयार हो गई थी। 16 जून को नई दिल्ली में अमित शाह की अध्यक्षता में राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की बैठक हुई थी। इसमें लंबे समय से अटके मुद्दों पर सहमति बनी और सभी 6 राज्य एमओयू करने के लिए तैयार हुए थे। अब इसी सहमति को औपचारिक समझौते में बदला गया।
जून की बैठक में परियोजना की लागत को लेकर भी बड़ी अड़चन दूर की गई। तय हुआ कि परियोजना के जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में देगी। बाकी 10 प्रतिशत राशि 6 राज्यों को मिलकर देनी होगी।
हिमाचल के हिस्से का पानी भी राजस्थान को मिलेगा
एक और महत्वपूर्ण फैसला हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को लेकर हुआ। हिमाचल के हिस्से का पानी राजस्थान और दिल्ली को देने पर सहमति बनी। इसके बदले राजस्थान और दिल्ली को परियोजना के बिजली वाले हिस्से में हिमाचल की लागत साझा करनी होगी।
एमओयू के बाद अगला बड़ा पड़ाव केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी है। केंद्र ने जून की बैठक के बाद ही साफ किया था कि समझौता होने के बाद परियोजना को कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।
किशाऊ बांध से क्या होगा फायदा?
किशाऊ सिर्फ पानी देने वाला बांध नहीं है। इसे पानी के भंडारण, सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन वाली बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में तैयार किया गया है। किशाऊ कॉरपोरेशन के उपलब्ध परियोजना विवरण में करीब 236 मीटर ऊंचे बांध, 1,324 MCM लाइव स्टोरेज और 6 लाभार्थी राज्यों का जिक्र है।
परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने और पेयजल तथा औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना के डिजाइन और बिजली क्षमता के आंकड़ों में समय के साथ संशोधन भी हुए हैं। राजस्थान के लिहाज से इसका सीधा मतलब ऊपरी यमुना बेसिन से भविष्य में पानी का एक और स्रोत तैयार होना है।
किशाऊ प्रोजेक्ट से राजस्थान में दूर होगा जलसंकट
शेखावाटी के लिए यहां दो योजनाओं का फर्क समझना जरूरी है। राजस्थान को 1994 के ऊपरी यमुना जल समझौते के तहत मिलने वाला पानी और किशाऊ परियोजना से प्रस्तावित पानी एक ही हिस्सा नहीं है।
पुरानी यमुना व्यवस्था के तहत राजस्थान अपने हिस्से का पानी पश्चिमी यमुना नहर से लेने की तैयारी कर रहा। केंद्र के सितंबर 2026 के विवरण के मुताबिक करीब 580 MCM पानी तीन भूमिगत पाइपलाइनों से राजस्थान लाने की योजना है। इससे प्रदेश के कम बारिश और पानी की कमी वाले इलाकों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
दूसरी ओर किशाऊ बांध से राजस्थान के लिए 124 MCM जल लाभ प्रस्तावित है। यानी एक योजना राजस्थान के पहले से तय यमुना जल हिस्से को शेखावाटी तक पहुंचाने की है, जबकि किशाऊ भविष्य में पानी का अतिरिक्त स्रोत बन सकता।
शेखावाटी के लिए क्यों अहम है प्रोजेक्ट?
सीकर, चूरू और झुंझुनूं लंबे समय से पानी की कमी से जूझते रहे हैं। राजस्थान सरकार के लिए इसलिए यमुना और किशाऊ दोनों परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं।यमुना जल के लिए पाइपलाइन बनने से पहले से तय हिस्से का पानी शेखावाटी तक पहुंचाने का रास्ता तैयार होगा। वहीं किशाऊ बांध बनने और जल बंटवारा अंतिम रूप लेने के बाद इस क्षेत्र के लिए एक और जल स्रोत उपलब्ध हो सकता।
इसका असर केवल पीने के पानी तक सीमित नहीं रहेगा। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर खेती, उद्योग और नए निवेश के लिए भी संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
अभी शेखावाटी तक पानी पहुंचने में वक्त लगेगा
एमओयू को किशाऊ परियोजना के लिए बड़ी प्रशासनिक सफलता माना जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि राजस्थान को तुरंत पानी मिलना शुरू हो जाएगा।
पहले परियोजना को जरूरी केंद्रीय मंजूरियों से गुजरना होगा। इसके बाद निर्माण और राज्यों तक पानी पहुंचाने के लिए जरूरी व्यवस्था तैयार करनी होगी। परियोजना के पुराने आधिकारिक विवरण में निर्माण शुरू होने के बाद इसे पूरा करने के लिए लगभग 96 महीने का अनुमान भी दिया गया। यही वजह है कि फिलहाल सबसे बड़ा बदलाव यह है कि दशकों से राज्यों के बीच अटकी किशाऊ परियोजना पर राजनीतिक और वित्तीय सहमति आगे बढ़ी है।
86 साल पुरानी है किशाऊ प्रोजेक्ट की कहानी
किशाऊ कोई नया प्रोजेक्ट नहीं। इसकी कहानी आजादी से भी पहले शुरू होती। किशाऊ कॉरपोरेशन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक परियोजना की परिकल्पना 1940 में की गई थी। तत्कालीन पंजाब सरकार ने 1944-45 में परियोजना स्थल का सर्वे कराया था, लेकिन 1946 में जांच और सर्वे का काम रुक गया था।
1962 में उत्तर प्रदेश सरकार ने दोबारा सर्वे शुरू कराया। 1964 में शुरुआती परियोजना रिपोर्ट बनी और 1965 में इसे केंद्र के सामने रखा गया। उस समय करीब 235 मीटर ऊंचा बांध बनाने का प्रस्ताव था। तकनीकी सवाल उठने के बाद डिजाइन में बदलाव सुझाए गए। 1970 में फिर सर्वे शुरू हुआ और 1978 में नई डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेजी गई।
इसके बाद भी तकनीकी, वित्तीय और राज्यों के बीच हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दों के कारण प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका। केंद्र ने 2008 में इसे नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया। 2010 में संशोधित DPR भी पेश की गई। बाद में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की संयुक्त कंपनी किशाऊ कॉरपोरेशन बनाई गई, लेकिन परियोजना जमीन पर नहीं उतर पाई।
राजस्थान के लिए अब तस्वीर दो स्तर पर बन रही। पहला, यमुना के पुराने हिस्से को पाइपलाइन से शेखावाटी तक पहुंचाना। दूसरा, किशाऊ परियोजना को मंजूरी और निर्माण के चरण से निकालकर भविष्य में राजस्थान के प्रस्तावित पानी को जमीन पर उतारना।
करीब आठ दशक पुरानी किशाऊ परियोजना के लिहाज से 6 राज्यों का एमओयू एक बड़ा पड़ाव है। लेकिन शेखावाटी के लोगों के लिए इसकी असली सफलता उस दिन मानी जाएगी, जब समझौतों और फाइलों से निकलकर पानी वास्तव में उनके इलाके तक पहुंचेगा।
FAQ
- किशाऊ डैम प्रोजेक्ट को लेकर दिल्ली में क्या हुआ?
किशाऊ परियोजना पर 6 राज्यों के बीच दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के बीच समझौता हुआ है। राजस्थान का जल हिस्सा 124 MCM प्रस्तावित है। - किशाऊ परियोजना से राजस्थान को कितना पानी मिलेगा?
किशाऊ जलाशय से राजस्थान के लिए 124 MCM पानी का लाभ प्रस्तावित है। हालांकि यह अभी अंतिम जल आवंटन नहीं माना जा सकता। किशाऊ बांध से मिलने वाला पानी शेखावाटी क्षेत्र के लिए एक अतिरिक्त जल स्रोत बन सकता है। - किशाऊ परियोजना की लागत कौन उठाएगा?
परियोजना के जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार उठाएगी। बाकी 10 फीसदी राशि 6 लाभार्थी राज्यों को मिलकर देनी होगी। - किशाऊ डैम प्रोजेक्ट क्या है?
किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टौंस नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय बांध परियोजना है, जिससे छह राज्यों को पानी और बिजली का लाभ मिलना है।
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