वर्ल्ड अर्थराइटिस डे: राजस्थान में बढ़ रहे है घुटनों के दर्द के मामले, देश में है दूसरे नंबर पर
वर्ल्ड अर्थराइटिस डे पर राजस्थान में चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्य में हर लाख आबादी पर 5,500 से ज्यादा लोग इस समस्या प्रभावित हैं। यानी हर 100 में से 5 से ज्यादा लोग। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों से ज्यादा है। घुटनों का दर्द इस बीमारी का सबसे आम है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है?
ये आंकड़े जीबीडी (GBD – Global Burden of Disease) स्टडी से सामने आया हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है, इसे आसान भाषा में समझते हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस (osteoarthritis) में जोड़ों के बीच का कार्टिलेज धीरे-धीरे खराब होने लगता है। कार्टिलेज (हड्डियों के सिरों पर चढ़ी नरम परत) घर्षण कम करता है।
यह परत कमजोर हो तो दर्द और अकड़न शुरू हो जाती है। बीमारी बढ़ने पर जोड़ों को हिलाना मुश्किल हो जाता है। फिर रोज के काम करना भी भारी हो जाते है।
महिलाओं पर ज्यादा है बीमारी
आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में महिलाओं में यह दर प्रति लाख 6,113 है। पुरुषों में यह आंकड़ा 4,487 है। आसान भाषा में हर 100 महिलाओं में करीब 6 महिलाएं प्रभावित हैं। पुरुषों में यह संख्या करीब साढ़े 4 है।
तीन-चौथाई मामले सिर्फ घुटनों के
बीमारी सबसे ज्यादा घुटनों में दिखती है। कुल मामलों में करीब तीन-चौथाई मामले घुटनों से जुड़े हैं। हाथ, कूल्हे और दूसरे जोड़ भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
घुटने की बीमारी के लक्षण क्या हैं?
घुटने की बीमारी के लक्षण रोजमर्रा के कामों में साफ दिखते हैं। लंबे समय तक खड़े रहने में परेशानी होती है। सीढ़ियां चढ़ना और बाजार जाना मुश्किल लगने लगता है। सामान्य रफ्तार से चलना भी भारी पड़ता है।
बढ़ती बुजुर्ग आबादी से बढ़ा दबाव
राजस्थान में बुजुर्गों की आबादी लगातार बढ़ रही है। 1990 में 65 साल से ज्यादा उम्र वालों की हिस्सेदारी 3.8 प्रतिशत थी। अब यह बढ़कर 6.4 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है।
उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में घिसावट का खतरा बढ़ता है। मोटापा, पुरानी चोट और कम शारीरिक गतिविधि भी खतरा बढ़ाते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना जोड़ों का दर्द बढ़ा सकता है। नियमित व्यायाम न करना भी जोड़ों पर असर डालता है।
सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं
ऑस्टियोआर्थराइटिस केवल बुजुर्गों को नहीं होता। कम उम्र में भी इसके लक्षण दिख सकते हैं। पुरानी चोट और ज्यादा वजन इसकी वजह बन सकते हैं।
डॉ. राजीव भार्गव के अनुसार
सीनियर ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. राजीव भार्गव ने जांच के अनुसार। इस बीमारी की गंभीरता जानने के लिए एक्स-रे किया जाता है। जरूरत पड़ने पर सीटी (CT – Computed Tomography) स्कैन की सलाह दी जाती है। कुछ मामलों में एमआरआई (MRI – Magnetic Resonance Imaging) भी करवाई जाती है।
क्या हर मरीज को सर्जरी चाहिए?
जवाब है, नहीं। शुरुआती और मध्यम अवस्था में दूसरे उपाय भी इस समस्या को कम कर सकते है। डॉक्टर की सलाह से व्यायाम और वजन नियंत्रण मददगार होते हैं। फिजियोथेरेपी और दर्द कम करने वाले उपचार भी काम आते हैं। इलाज का तरीका मरीज की उम्र और दर्द पर निर्भर करता है। चलने-फिरने की क्षमता और जांच के नतीजे भी देखे जाते हैं।
कब पड़ती है ज्वाइंट रिप्लेसमेंट की जरूरत?
बीमारी गंभीर हो और दर्द लगातार बना रहे, तब यह विकल्प सोचा जाता है। दवा और फिजियोथेरेपी से राहत न मिलने पर ही सर्जरी पर विचार होता है। इसमें खराब जोड़ की सतह को कृत्रिम जोड़ से बदला जाता है।
आदतें बदलें, जोड़ों को बचाएं
जोड़ों के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम जरूरी है। वजन पर नियंत्रण और पुरानी चोटों का सही इलाज भी अहम है। उम्र के हिसाब से पैदल चलना और हल्का व्यायाम मदद करता है। मांसपेशियां मजबूत करने वाली गतिविधियां भी फायदेमंद हो सकती हैं।
लगातार घुटनों का दर्द (knee pain), सूजन या अकड़न को सामान्य नहीं लें। कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें। इससे बीमारी की स्थिति समझने और सही इलाज शुरू करने में मदद मिलती है।
FAQs
- राजस्थान में ऑस्टियोआर्थराइटिस के मामले कितने गंभीर हैं?
राजस्थान में हर लाख आबादी पर 5,500 से ज्यादा लोग ऑस्टियोआर्थराइटिस से प्रभावित हैं, जिससे यह समस्या गंभीर हो गई है। - क्या ऑस्टियोआर्थराइटिस केवल बुजुर्गों को होता है?
नहीं, ऑस्टियोआर्थराइटिस केवल बुजुर्गों को नहीं होता, कम उम्र में भी इसके लक्षण दिख सकते हैं। पुरानी चोट और ज्यादा वजन इसके कारण बन सकते हैं। - ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज के क्या विकल्प हैं?
ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज के लिए दवाइयाँ, फिजियोथेरेपी, व्यायाम, और यदि आवश्यक हो तो जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसे विकल्प उपलब्ध हैं।