कोटा किडनी फेलियर मामले में गहलोत ने उठाए सवाल, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
समझें क्या है पूरा मामला
- कोटा किडनी फेलियर मामले पर गहलोत ने उठाए सवाल
- डॉक्टरों को क्लीन चिट मिलने के बाद फिर गरमाया मामला
- पांच परिवारों ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की
- गहलोत ने सरकार से पूरे मामले पर जवाब मांगा
- RGHS और सरकारी इलाज व्यवस्था पर भी उठे सवाल
कोटा में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत और किडनी फेलियर का मामला एक बार फिर चर्चा में है। जांच के बाद तीन डॉक्टरों को दोबारा काम पर बहाल कर दिया गया है। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरे मामले को लेकर सवाल उठाए हैं।
गहलोत ने कहा कि अगर जांच में डॉक्टरों की कोई गलती नहीं मिली, तो पहले उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई थी। वहीं अगर अस्पताल में कोई गंभीर कमी थी, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है। इस पूरे मामले में मरीजों और उनके परिवारों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
कोटा अस्पताल का मामला क्या है?
यह मामला मई 2026 में सामने आया था। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में प्रसव के बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई थी।
इनमें कुछ महिलाओं की किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। इस दौरान कई महिलाओं की मौत भी हुई। घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और इलाज को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
प्रसव के बाद बिगड़ी तबीयत
मामले में सी-सेक्शन के बाद कुछ महिलाओं की हालत खराब हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार कई महिलाओं को किडनी से जुड़ी गंभीर परेशानी हुई। घटना के बाद अस्पताल में इलाज और मरीजों की देखभाल को लेकर जांच शुरू की गई। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कुछ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई भी की थी।
तीन डॉक्टर फिर बहाल हुए
मामले में मई में तीन वरिष्ठ डॉक्टरों को निलंबित किया गया था। इनमें डॉ. बीएल पाटीदार, डॉ. खुशबू मीणा और डॉ. नवनीत कुमार शामिल थे। इसके बाद अलग-अलग स्तर पर मामले की जांच कराई गई। जांच के लिए कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली से विशेषज्ञों की टीमें लगाई गईं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इन जांचों में डॉक्टरों की ओर से चिकित्सा लापरवाही नहीं पाई गई। इसके बाद तीनों डॉक्टरों को दोबारा बहाल कर दिया गया।
गहलोत ने इसी पर सवाल उठाए
डॉक्टरों की बहाली के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार से सवाल किए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले में चीजें साफ होनी चाहिए। गहलोत का सवाल है कि अगर डॉक्टरों की कोई गलती नहीं थी, तो उन्हें पहले निलंबित क्यों किया गया। वहीं अगर शुरुआती जांच में अस्पताल की व्यवस्था को लेकर कमियां सामने आई थीं, तो फिर उन कमियों के लिए जिम्मेदार कौन है। गहलोत ने मामले में जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई है। उन्होंने मरीजों और उनके परिवारों के सवालों का जवाब देने की बात कही है।
शुरुआती जांच में क्या आया था?
मामला सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे। शुरुआती जांच में इलाज के तरीके और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ कमियां बताई गई थीं।
कुछ रिपोर्टों में ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था, सफाई और दवाओं से जुड़े सवालों का भी जिक्र हुआ था। इसके अलावा मरीजों की निगरानी और जरूरी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठे थे।
दवाओं को लेकर भी सवाल
मामले में इस्तेमाल की गई कुछ दवाओं को लेकर भी सवाल उठे थे। बाद की जांच में एक ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल को मानकों पर खरा नहीं उतरने की बात सामने आई थी।
हालांकि डॉक्टरों को लेकर हुई अंतिम जांच में चिकित्सा लापरवाही साबित नहीं हुई। इसलिए शुरुआती जांच और अंतिम जांच के बीच सामने आए अंतर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
परिवारों ने भी मांगी जांच रिपोर्ट
डॉक्टरों की बहाली के बाद मृत महिलाओं के परिवारों ने भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। परिवारों ने जिला प्रशासन से जांच रिपोर्ट और Action Taken Report की कॉपी मांगी है। उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी मिलनी चाहिए कि जांच में क्या सामने आया और उसके बाद सरकार ने क्या कदम उठाए।
मुआवजे और नौकरी का भी सवाल
परिवारों ने इलाज से जुड़े सवालों के साथ मुआवजे की मांग भी उठाई है। कुछ परिवारों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें आर्थिक मदद और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का भरोसा दिया गया था। परिवार अब इन वादों पर भी स्थिति साफ करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
RGHS को लेकर क्या मामला है?
राजस्थान सरकार की Rajasthan Government Health Scheme (RGHS) सरकारी कर्मचारियों और दूसरे पात्र लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा देती है। इसमें सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा शामिल है।
हाल के महीनों में RGHS को लेकर सरकार ने अस्पतालों और इलाज से जुड़े नियमों में कई निर्देश जारी किए हैं। इनमें दवाओं, बिलों, जांच और अस्पतालों की प्रक्रिया से जुड़े निर्देश शामिल हैं।
हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर कोटा किडनी फेलियर मामले में RGHS को सीधे जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। इस मामले का मुख्य मुद्दा अस्पताल में इलाज, मौतों और किडनी फेलियर की जांच है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
अब सवाल यह है कि अलग-अलग जांचों के बाद आखिर पूरी घटना की जिम्मेदारी किसकी बनती है। डॉक्टरों को जांच में राहत मिल गई है, लेकिन मरीजों के परिवार अभी भी जवाब चाहते हैं। परिवार यह जानना चाहते हैं कि महिलाओं की हालत आखिर क्यों बिगड़ी। उन्हें किडनी से जुड़ी गंभीर परेशानी कैसे हुई और मौतों की वजह क्या थी।
सरकार की ओर से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इन सवालों का जवाब ज्यादा स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल परिवारों की मांग है कि जांच की पूरी जानकारी सामने रखी जाए।