मेयर बनते ही बिरला के 'बैकुंठ' की चौखट पर धोक, अनुसुईया गोस्वामी की तस्वीर पर उठे सवाल
कोटा की नई मेयर अनुसुइया गोस्वामी चुनाव जीतते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के घर 'बैकुंठ' पहुंचीं। यहां की एक तस्वीर अब सियासी चर्चा में है। तस्वीर में अनुसुइया घर की सीढ़ियों पर झुककर धोक लगाती नजर आ रही। कांग्रेस इसे जनता के जनादेश और सत्ता की चौखट से जोड़कर सवाल उठा रही। वहीं इसे किसी वरिष्ठ नेता के घर जाकर आशीर्वाद लेने की सामाजिक-राजनीतिक परंपरा के तौर पर भी देखा जा सकता।
इस तस्वीर की टाइमिंग ने बहस को एक और एंगल दे दिया। 25 सितंबर को ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती है, जिन्हें एकात्म मानववाद और अंत्योदय के विचार का प्रणेता माना जाता है। आलोचक इसी बहाने भाजपा में संगठन बनाम व्यक्ति की राजनीति का सवाल उठा रहे। हालांकि इस आलोचना पर अनुसुइया गोस्वामी या भाजपा की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
65 वोट लेकर मेयर बनीं अनुसुईया
शुक्रवार को हुए कोटा नगर निगम के मेयर चुनाव में भाजपा की अनुसुइया ने कांग्रेस की सुनीता सुमन को 30 वोट से हराया। अनुसुइया को 65 और सुनीता को 35 वोट मिले। 100 वार्ड वाले कोटा नगर निगम में भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और चार निर्दलीय पार्षद हैं। दो निर्दलीयों ने भाजपा प्रत्याशी को समर्थन दिया था। इस हिसाब से भाजपा के पास 59 वोट माने जा रहे थे, लेकिन अनुसुइया को 65 वोट मिले। यानी उन्हें तय संख्याबल से छह वोट ज्यादा मिले। इसे कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग से जोड़कर देखा जा रहा।
मेयर का पद OBC महिला के लिए आरक्षित था। भाजपा में इस पद के लिए कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन आखिर में पार्टी ने अनुसुइया पर दांव लगाया।
पहली बार पार्षद, सीधे मेयर की कुर्सी तक पहुंचीं
अनुसुइया गोस्वामी इस बार वार्ड नंबर 98 से चुनाव जीतकर पहली बार पार्षद बनी। पार्षद के रूप में यह उनका पहला कार्यकाल है, लेकिन भाजपा संगठन में वे लंबे समय से काम कर रही। वे भाजपा महिला मोर्चा की कोटा शहर जिलाध्यक्ष रह चुकी और संगठन में जिला और प्रदेश स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल चुकी। मेयर प्रत्याशी बनाए जाने के समय भी उनकी संगठन में लंबे समय की सक्रियता प्रमुख रूप से सामने आई थी। पार्षद का पहला चुनाव जीतने के बाद सीधे मेयर बनना भी उनकी जीत को खास बनाता है।
अनुसुइया का ओम बिरला से क्या कनेक्शन?
कोटा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का गृह नगर और संसदीय क्षेत्र है। स्थानीय राजनीति में अनुसुइया को लंबे समय से बिरला के करीबी राजनीतिक खेमे से जोड़कर देखा जाता रहा। मेयर चुनाव के दौरान भी उनके नाम पर मुहर लगने के पीछे संगठन में सक्रियता के साथ बिरला से उनकी राजनीतिक नजदीकी की चर्चा रही।
जीत के बाद अनुसुइया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का भी आभार जताया। इसके बाद वे बिरला के कोटा स्थित आवास 'बैकुंठ' पहुंचीं। यहीं उनकी चौखट पर झुककर धोक लगाने वाली तस्वीर सामने आई। यही वजह है कि तस्वीर को सिर्फ शिष्टाचार की मुलाकात के बजाय उनके राजनीतिक रिश्ते से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
डोटासरा ने पूछा- मेयर जनता की या सत्ता की चौखट की?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस तस्वीर को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे जनता के जनादेश और लोकतंत्र से जोड़ते हुए सवाल उठाया। डोटासरा ने तस्वीर का जिक्र करते हुए सवाल किया कि कोटा की नई मेयर जनता की हैं या सत्ता की चौखट की?
कांग्रेस की आपत्ति का केंद्र अनुसुईया का बिरला से मिलना नहीं, बल्कि चौखट पर झुककर धोक लगाने वाली तस्वीर है। विपक्ष इसे निर्वाचित जनप्रतिनिधि और पार्टी के बड़े नेता के बीच राजनीतिक ताकत के रिश्ते के तौर पर पेश कर रहा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के दिन तस्वीर से क्यों बढ़ी बहस?
इस पूरे विवाद में तारीख भी अहम है। 25 सितंबर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती है। दीनदयाल उपाध्याय ने 'एकात्म मानववाद' का विचार दिया था। अंत्योदय यानी समाज के आखिरी व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का विचार भी उनकी राजनीतिक सोच का प्रमुख हिस्सा रहा है।
भाजपा अपने वैचारिक और संगठनात्मक इतिहास में दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को प्रमुखता से रखती है। इसी वजह से आलोचक इस तस्वीर को संगठन और विचार के मुकाबले व्यक्ति को ज्यादा महत्व देने के सवाल से जोड़ रहे। उनका तर्क है कि जिस दिन भाजपा दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को याद कर रही, उसी दिन एक निर्वाचित मेयर की पार्टी के बड़े नेता के घर की चौखट पर धोक लगाती तस्वीर अलग राजनीतिक संदेश देती है।
धोक सम्मान की परंपरा भी, फिर विवाद क्यों?
राजस्थान में धोक (ढोक) लगाना सम्मान जताने का आम तरीका है। परिवार के बड़े-बुजुर्गों, धार्मिक स्थलों और सम्मानित लोगों के सामने झुककर आशीर्वाद लेने की पुरानी परंपरा रही है। राजनीति में भी जीत के बाद वरिष्ठ नेताओं से मिलने और आशीर्वाद लेने की तस्वीरें अक्सर सामने आती हैं। इसलिए विवाद सिर्फ धोक लगाने पर नहीं है। सवाल उस जगह, राजनीतिक रिश्ते और तस्वीर से निकलने वाले संदेश को लेकर उठाया जा रहा है।
अनुसुइया नई मेयर हैं। बिरला कोटा की राजनीति के सबसे प्रमुख भाजपा नेताओं में हैं और अनुसुईया को उनके राजनीतिक खेमे से जोड़कर देखा जाता रहा है। ऐसे में जीत के तुरंत बाद बिरला के घर पहुंचना और चौखट पर धोक लगाने की तस्वीर ने विपक्ष को हमला करने का मौका दिया।
तस्वीर पर सियासत, अब जवाब का इंतजार
अनुसुईया गोस्वामी की जीत का चुनावी गणित भाजपा के लिए मजबूत रहा। पार्टी के 57 पार्षद होने के बावजूद उन्हें 65 वोट मिले। दूसरी तरफ मेयर बनते ही बिरला के घर पहुंचने की उनकी तस्वीर ने जीत के साथ एक अलग राजनीतिक बहस जोड़ दी। कांग्रेस इसे सत्ता के सामने झुकने की तस्वीर बता रही है। वहीं धोक लगाने को सम्मान और आशीर्वाद लेने की परंपरा के रूप में भी देखा जा सकता है।
दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के दिन तस्वीर सामने आने से बहस में 'व्यक्ति बनाम संगठन' का सवाल भी जुड़ गया है। लेकिन इस तस्वीर का राजनीतिक मतलब क्या है, इसे लेकर दोनों पक्षों की व्याख्या अलग है। अब भाजपा या अनुसुईया की प्रतिक्रिया आने पर उनका पक्ष भी इस बहस की तस्वीर साफ करेगा।
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