कोटा में मिड-डे मील के 3213 क्विंटल गेहूं-चावल गायब होने का मामला, 1.10 करोड़ तक कीमत; FIR दर्ज
राजस्थान के कोटा में सरकारी स्कूलों के बच्चों के मिड-डे मील के लिए आवंटित हजारों क्विंटल गेहूं और चावल स्कूलों तक नहीं पहुंचने का मामला सामने आया है। जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के लिए सरकारी गोदाम से पूरा खाद्यान्न उठाया गया था, लेकिन स्कूलों में कम राशन पहुंचने की शिकायतों के बाद कराई गई जांच में 3213 क्विंटल खाद्यान्न की कमी सामने आई। इसकी कीमत सरकारी दर पर करीब 81 लाख रुपये, जबकि बाजार भाव के अनुसार एक करोड़ से 1.10 करोड़ रुपये तक बताई गई है। मामले में परिवहन फर्म के खिलाफ कोटा के नयापुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जांच में 3213 क्विंटल खाद्यान्न की कमी
कोटा में राष्ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों को मिलने वाले गेहूं और चावल की आपूर्ति में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। विभागीय जांच के अनुसार, स्कूलों तक निर्धारित मात्रा में राशन नहीं पहुंचा। रिकॉर्ड और स्कूलों में प्राप्त खाद्यान्न का मिलान करने पर बड़ी कमी का पता चला।जांच में 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल कम पाया गया। दोनों को मिलाकर कुल 3213 क्विंटल खाद्यान्न का हिसाब नहीं मिला है।
सरकारी दर पर 81 लाख, बाजार भाव एक करोड़ से ज्यादा
जांच में सामने आई खाद्यान्न की कमी की कीमत सरकारी दरों के हिसाब से करीब 81 लाख रुपये बताई गई है। वहीं, बाजार भाव के अनुसार इसकी कीमत एक करोड़ से 1.10 करोड़ रुपये तक आंकी गई है। यह खाद्यान्न सरकारी स्कूलों में बच्चों के मिड-डे मील के लिए आवंटित किया गया था।
जुलाई में गोदाम से हुआ था पूरा उठाव
यह मामला जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के खाद्यान्न आवंटन से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, कोटा के सेंट्रल वेयर हाउस नंबर-1 से 14 से 21 जुलाई के बीच गेहूं और चावल का पूरा उठाव किया गया था।
इसके बाद स्कूलों से कम राशन पहुंचने की शिकायतें मिलने लगीं। शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। ब्लॉकवार रिकॉर्ड और स्कूलों में पहुंची खाद्यान्न की मात्रा का मिलान कराया गया, जिसमें बड़ी कमी सामने आई।
गुजरात की परिवहन फर्म को मिली थी जिम्मेदारी
स्कूलों तक खाद्यान्न पहुंचाने की जिम्मेदारी गुजरात के हिम्मतनगर स्थित मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज को दी गई थी। फर्म को 32.06 रुपये प्रति क्विंटल की दर से परिवहन का वर्कऑर्डर जारी किया गया था।
जांच में खाद्यान्न की कमी सामने आने के बाद परिवहन व्यवस्था और राशन की वास्तविक आपूर्ति को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, खाद्यान्न कहां गया और कमी के लिए कौन जिम्मेदार है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।
नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर दर्ज हुई FIR
रसद विभाग ने फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक और अधिकृत सहयोगी शैलेंद्र शर्मा को 14 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। उनसे 15 अक्टूबर सुबह 10:30 बजे तक जवाब मांगा गया था।
निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने के बाद रसद विभाग ने कोटा के नयापुरा थाने में शिकायत दी। इसके आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है।
शिक्षा विभाग ने कराया खाद्यान्न का सत्यापन
जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), प्रारंभिक, कोटा रूप सिंह मीणा के अनुसार, गोदाम से पूरा खाद्यान्न उठने के बावजूद स्कूलों से कम राशन मिलने की शिकायतें आ रही थीं। इसके बाद सभी सीबीईओ से रिपोर्ट लेकर खाद्यान्न का सत्यापन कराया गया।
अधिकारी के मुताबिक, स्कूलों में पहुंचाए गए राशन की पर्चियां भी उपलब्ध हैं। रिकॉर्ड और आपूर्ति की मात्रा का मिलान करने के दौरान गेहूं और चावल की कमी सामने आई।
आगे क्या?
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 3213 क्विंटल खाद्यान्न की कमी कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जांच में परिवहन रिकॉर्ड, गोदाम से उठाव और स्कूलों तक हुई आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज अहम हो सकते हैं। फिलहाल, मामले में आरोपों की जांच जारी है और जिम्मेदारी तय होना बाकी है।