113 साल पुरानी सीमेंट फैक्ट्री पर ताला, 20,000 लोगों के बेरोजगार होने का खतरा
News In Short
- बूंदी के लाखेरी में एशिया की सबसे पुरानी सीमेंट फैक्ट्री बंद।
- 1917 से उत्पादन कर रही फैक्ट्री को 2021 में अडानी ग्रुप ने खरीदा था।
- कोयला महंगा होना और पुरानी तकनीक से लागत बढ़ना बताया है कारण।
- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चल रहा था 2000 परिवारों का रोजगार।
- कांग्रेस ने 1 जून को कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन का किया ऐलान।
News In Detail
राजस्थान के बूंदी जिले का ऐतिहासिक कस्बा लाखेरी आज अपनी पहचान और अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। एशिया की सबसे पहली सीमेंट फैक्ट्री, जिसने 1912-13 में नींव रखी थी और 1917 से देश के निर्माण के लिए सीमेंट का उत्पादन शुरू किया था, पिछले दो महीनों से पूरी तरह बंद है।
करीब 113 साल के गौरवशाली इतिहास को समेटे यह प्लांट अब खामोश है, जिससे लाखेरी ही नहीं, बल्कि पूरे बूंदी जिले की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
ऐतिहासिक धरोहर से बेरोजगारी की मिसाल तक
लाखेरी की सीमेंट फैक्ट्री सिर्फ एक औद्योगिक कम्पनी नहीं, बल्कि भारत के औद्योगीकरण की पहली धड़कन थी। ब्रिटिश काल में स्थापित यह प्लांट बाद में एसोसिएटेड सीमेंट कंपनी (ACC) का हिस्सा रहा। लगभग चार साल पहले अडानी ग्रुप ने इसका अधिग्रहण किया। टेकओवर के बाद पहले उत्पादन जारी था, लेकिन अचानक दो महीने पहले पहिये थम गए।
फैक्ट्री बंद होने का असर विनाशकारी है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 20,000 लोग इस फैक्ट्री पर निर्भर थे। फैक्ट्री में करीब 1,000 कर्मचारी (200 स्थायी + 800 अस्थायी/ठेका मजदूर) सीधे कार्यरत थे, जबकि ट्रांसपोर्ट, लोडिंग-अनलोडिंग, होटल-ढाबा, किराना दुकानें और छोटे व्यापारी इसी इकोसिस्टम पर पल रहे थे। अब स्थिति यह है कि मजदूर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
फैक्ट्री बंद होने के क्या कारण बताए जा रहे हैं?
फैक्ट्री प्रबंधन ने आधिकारिक तौर पर बंदी की पुष्टि तो की है, लेकिन स्पष्ट कारण नहीं बताया है। हालांकि, लाखेरी के एसडीएम सुरेंद्र सिंह चौधरी को शुरुआती तौर पर ये कारण बताए गए:
कोयले की बढ़ती लागत: ईरान-अमेरिका तनाव के कारण समुद्री रास्ते से आने वाला कोयला महंगा हो गया है।
कच्चे माल का खर्च: किशनगढ़ मार्बल से आने वाला कच्चा माल दूरी अधिक होने के कारण महंगा पड़ रहा है।
पुराना प्लांट: यह 100 साल पुराना प्लांट है। इसकी कॉस्टिंग (उत्पादन लागत) नए प्लांट्स के मुकाबले अधिक है, जिससे मुनाफा नहीं हो रहा।
ईसी (पर्यावरण स्वीकृति) का मुद्दा: अनौपचारिक रूप से यह भी चर्चा है कि फैक्ट्री और उससे जुड़ी खदान को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से NO नहीं मिल रही है।
हालांकि, बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने इन तर्कों को पूरी तरह "झूठा, तर्कहीन और विवेकहीन" बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ईसी न मिलना महज एक बहाना है।
कांग्रेस-भाजपा एक साथ
लाखेरी का मुद्दा इतना बड़ा है कि आमतौर पर विरोधी खेमे में रहने वाली कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रबंधन के खिलाफ खड़ी हो गई हैं, हालांकि दोनों अपनी-अपनी जमीन भी साफ कर रही हैं।
कांग्रेस का मोर्चा: बूंदी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एवं केशोरायपाटन विधायक सी.एल. प्रेमी ने 1 जून से कलेक्ट्रेट पर विशाल प्रदर्शन का ऐलान किया है। उनके साथ पूर्व मंत्री अशोक चांदना और बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा भी शामिल होंगे। प्रेमी ने स्थानीय सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
भाजपा का रुख: केशोरायपाटन की पूर्व भाजपा विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने प्रबंधन का जमकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की हठधर्मिता के कारण फैक्ट्री बंद हुई है, यह कोई निजी खिलौना नहीं है। उन्होंने फैक्ट्री के ऐतिहासिक योगदान का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 50 सालों में इस प्लांट ने कंपनी को अरबों का मुनाफा दिया है।
मजदूरों की व्यथा
फैक्ट्री बंद होने के बाद मजदूरों की हालत दयनीय हो गई है। कामगार यूनियन के अध्यक्ष कुमार आशुतोष ने कहा कि अब तक हम चुप थे, लेकिन अब मजदूरों की हालत देखकर रोना आ रहा है। हम मुंबई (अडानी समूह के कार्यालय) गए, हाथ जोड़े, मिन्नतें की, लेकिन प्रबंधन ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया।
मजदूर महासभा के जिलाध्यक्ष अब्दुल गफूर ने कहा कि पूरे कस्बे का कारोबार ठप है। रेहड़ी-पटरी वाले, पल्लेदार, ढाबा संचालक - सब बेरोजगार हो गए हैं।
क्या है आगे का रास्ता?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट तीन स्तरों पर समाधान मांगता है:
तात्कालिक राहत: फैक्ट्री को तुरंत खोलने या कम से कम मजदूरों को संकट कालीन मुआवजा देने की व्यवस्था।
मध्यम अवधि: अडानी ग्रुप को लागत घटाने के लिए टैक्स छूट, कोयले की सब्सिडी या स्थानीय खनन की अनुमति देने जैसे सरकारी प्रोत्साहन।
दीर्घकालिक: पुराने प्लांट को मॉडर्न बनाने (अपग्रेड) के लिए केंद्र-राज्य सरकार की साझेदारी। अगर मुनाफा नहीं है तो इस धरोहर को सीमेंट संग्रहालय या टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने पर भी विचार किया जा सकता है।
स्थानीय प्रशासन के हाथ फिलहाल बंधे हैं, क्योंकि निर्णय अडानी समूह के मुंबई या अहमदाबाद स्थित शीर्ष प्रबंधन के पास है। एचआर मैनेजर अनिल दुबे तक को अधिकृत रूप से बोलने की इजाजत नहीं है।
FAQ
- लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री की स्थापना कब हुई थी और इसका भारत के औद्योगिक इतिहास में क्या स्थान है?
लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री की नींव वर्ष 1912-13 में रखी गई थी और यहां 1917 से उत्पादन शुरू हुआ था। यह एशिया की सबसे पहली और सबसे पुरानी सीमेंट फैक्ट्रियों में से एक है। - प्रशासन और प्रबंधन के अनुसार लाखेरी सीमेंट प्लांट में उत्पादन बंद होने के प्राथमिक कारण क्या बताए जा रहे हैं?
अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण जहाजों से आने वाले कोयले (Fuel) का महंगा होना, किशनगढ़ से आने वाले कच्चे माल की अधिक दूरी (High Transportation Cost) और पुराने प्लांट के कारण हाई प्रोडक्शन कॉस्टिंग को मुख्य कारण बताया जा रहा है।
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