विधायक के कब्जे पर चला बुलडोजर, 20 बीघा सरकारी जमीन मुक्त
ऐसे समझें पूरा मामला
- विधायक ने बिना आवंटन हुए 20 बीघा बेशकीमती चारागाह भूमि पर किया था अवैध कब्जा।
- 'द सूत्र' के खुलासे के बाद भीलवाड़ा प्रशासन ने की विधायक के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई।
- विधायक के कब्जे को हटाया, तारबंदी उखाड़ी, निर्माण को ढहा कर मुक्त कराई जमीन।
- विधायक बैरवा ने बेटों और करीबियों की संस्था बना रचा था सरकारी जमीन हड़पने का खेल।
- आवंटन नहीं होने के बाद भी जारी हुआ बिजली कनेक्शन, उठे मिलीभगत के गंभीर सवाल।
Jaipur: राजस्थान में शाहपुरा से भाजपा विधायक लालाराम बैरवा के सरकारी जमीन पर किए कब्जे को प्रशासन ने हटा दिया है। प्रशासन ने शुक्रवार को बुलडोजर चलाकर निर्माण हटाया और वहां हो रही तारबंदी को उखाड़ दिया।
'द सूत्र' ने गुरुवार को भीलवाड़ा जिले के विधायक बैरवा का कारनामा विस्तार से छापा था। यह खुलासा किया था कि सत्तारूढ़ दल के विधायक ने गौशाला के नाम पर बेशकीमती 20 बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा जमा लिया है। इस खुलासे के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।
भीलवाड़ा जिला प्रशासन खबरों के बाद शुक्रवार को हरकत में आया। पुलिस की उपस्थिति में केकड़ी बाइपास हाइवे पर विधायक के गैर-कानूनी कब्जे पर बुलडोजर चला दिया।
आवंटन नहीं हुआ, फिर भी किया कब्जा
विधायक की जेबी संस्था देव गौशाला सेवा संस्थान ने आवंटन नहीं होने के बावजूद 5 हेक्टेयर (करीब 20 बीघा) चारागाह भूमि पर कब्जा कर लिया था।
विधायक बैरवा ने जमीन पर तारबंदी करने के साथ ही बीचों बीच भारी भरकम टीनशेड तथा एक पक्का कमरा बना लिया था। साथ ही बोरिंग करा कर बिजली कनेक्शन ले लिया था।
शुक्रवार सुबह तहसीलदार भींवराव परिहार के नेतृत्व में सबसे पहले बिजली कंपनी ने बिजली कनेक्शन काटा। इसके बाद प्रशासन की टीम ने जेसीबी से निर्माण और तारबंदी को तोड़कर हटा दी।
परिवार की संस्था बना कब्जाई सरकारी जमीन
दरअसल, विधायक लालाराम बैरवा ने 21 अगस्त, 2025 को देव गौसेवा संस्था शाहपुरा नाम से एक संस्था सहकारिता विभाग में रजिस्टर्ड करवाई थी।
इसमें उनके बेटे चिनार देवतवाल अध्यक्ष और सचिव स्वयं विधायक थे। दूसरा बेटे जतिन देवतवाल को कोषाध्यक्ष और भतीजे कुदंन देवतवाल को सहसचिव बनाया गया। इसके अलावा पीए हुकमचंद कुमावत को उपाध्यक्ष और दिशांक गर्ग व राहुल बोहरा को सदस्य बनाया।
फिर विधायक ने शाहपुरा से 2 किलोमीटर दूर माता जी का खेड़ा पंचायत की चारागाह जमीन पर कब्जा जमा लिया। यह जमीन बेहद कीमती है, क्योंकि यहां से भविष्य में केकड़ी-जयपुर-भीलवाड़ा-मांडल एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित है। यह जमीन वर्तमान में बेशकीमती है।
नियम के कारण आवंटन से इनकार
रजिस्ट्रेशन होने के बाद विधायक की जेबी संस्था ने सरकार में एक अर्जी लगाई। इसमें शाहपुरा की आराजी संख्या 2543 रकबा 78.68 हेक्टेयर चारागाह जमीन में से 5 हेक्टेयर जमीन देव गोशाला के लिए आवंटन करने की मांग की गई।
राजस्थान भू-राजस्व ( गोशाला को भूमि आवंटन) नियम-1957 के नियम -4 के तहत आवंटन के लिए कुछ शर्ते निर्धारित हैं। इसमें राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1958 और राजस्थान गोशाला अधिनियम-1960 के अधीन रजिस्ट्रेशन होने तथा गौशाला का तीन साल से संचालित होना जरुरी है।
भीलवाड़ा के अतिरिक्त जिला कलक्टर के पास इस गोशाला की जमीन आवंटन की फाइल आई तो उन्होंने ब्रेक लगा दिया। उन्होंने 25 फरवरी, 2026 को एसडीएम शाहपुरा और देव गोशाला सेवा संस्था को नियमों में छूट का कोई प्रावधान नहीं का हवाला दिया। इसके आधार संस्था को जमीन आवंटन नहीं होने की जानकारी दी।
आवंटन नहीं हुआ फिर भी किया निर्माण
विधायक और शाहपुरा के स्थानीय प्रशासन को पता था कि कलक्टर ने नियमों के तहत जमीन आवंटन से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद विधायक ने जमीन पर निर्माण व तारबंदी कर ली।
प्रशासन को विधायक के जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण करने की जानकारी थी। लेकिन विधायक के दबाव में प्रशासन चुप्पी लगाए रहा।
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
इतने दिन क्यों रहा कब्जा: पटवारी, गिरदावर, तहसीलदार की नाक के नीचे इतना बड़ा निर्माण कैसे हो गया। शाहपुरा के इतिहास में 5 हेक्टेयर भूमि से कब्जा हटाने की यह पहली कार्रवाही मानी जा रही है।
बिजली कंपनी की लापरवाही: बिना भूमि आवंटन पत्रों की जांच किए चारागाह भूमि पर बिजली कनेक्शन कैसे जारी कर दिया। बिजली का बिल और बोरिंग खुदवाने का खर्च किस मद से वहन किया जा रहा था।
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