RCA चुनाव से पहले ललित मोदी की सलाह- राजस्थान क्रिकेट की पहचान खिलाड़ियों से हो
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान क्रिकेट में राजनीति नहीं, खिलाड़ियों का प्रदर्शन बने पहचान।
- RCA चुनाव से पहले ललित मोदी ने व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई।
- चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और खिलाड़ियों को निष्पक्ष अवसर देने पर जोर।
- खिलाड़ियों के लिए बीमा, पेंशन और आर्थिक सुरक्षा की वकालत।
- तीन साल से अटके स्टेडियम प्रोजेक्ट पर स्वतंत्र ऑडिट की मांग।
जयपुर। राजस्थान क्रिकेट संघ यानी आरसीए के 29 सितंबर को होने वाले चुनाव से पहले क्रिकेट प्रशासन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व आरसीए अध्यक्ष और आईपीएल के पहले चेयरमैन ललित मोदी ने राजस्थान क्रिकेट की मौजूदा व्यवस्था, चयन प्रक्रिया, खिलाड़ियों की आर्थिक सुरक्षा और प्रशासनिक विवादों पर अपनी राय रखी है।
ललित मोदी ने कहा कि राजस्थान क्रिकेट को नियंत्रण की राजनीति से बाहर निकालकर खिलाड़ियों के विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। उनके अनुसार, किसी क्रिकेट संघ की पहचान उसके खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों से होनी चाहिए, न कि लगातार सामने आने वाले विवादों से।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरसीए या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई में किसी पद पर लौटने की उनकी इच्छा नहीं है। हालांकि, यदि राजस्थान क्रिकेट के विकास के लिए उनसे सलाह मांगी जाती है तो वे अपने विचार साझा करने के लिए तैयार हैं।
राजनीति के बजाय खिलाड़ियों का प्रदर्शन जरूरी
ललित मोदी ने राजस्थान क्रिकेट में सत्ता और नियंत्रण को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ियों से ज्यादा राजनीति महत्वपूर्ण हो जाती है, तो इसका नुकसान प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उठाना पड़ता है।
उनके अनुसार, आरसीए का चुनाव क्रिकेट के विकास और बेहतर व्यवस्था के उद्देश्य से होना चाहिए। प्रशासन में केवल पुराने अनुभव के आधार पर लोगों को लंबे समय तक पद पर बने रहने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। संघ को ऐसे सक्षम लोगों की जरूरत है, जो खिलाड़ियों के लिए काम कर सकें।
उन्होंने आरसीए में पेशेवर अधिकारियों, पूर्व क्रिकेटरों और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया। नए नेतृत्व को पांच साल की योजना बनाकर काम करना चाहिए और हर साल अपनी प्रगति की रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।
आरसीए या बीसीसीआई में लौटने की इच्छा नहीं
आरसीए और बीसीसीआई प्रशासन में वापसी के सवाल पर ललित मोदी ने कहा कि उनका वह अध्याय पूरा हो चुका है। उन्होंने किसी पद पर दोबारा लौटने की इच्छा से इनकार किया।
हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर खेल के विकास के लिए उनकी सलाह वास्तव में मांगी जाती है, तो वे विचार देने में खुशी महसूस करेंगे। उन्होंने नए नेतृत्व को राजनीति, पक्षपात और गोपनीयता के बजाय प्रोफेशनलिज्म, पारदर्शिता और प्रदर्शन पर ध्यान देने की सलाह दी।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
राजस्थान में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन समय-समय पर चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस पर ललित मोदी ने कहा कि खिलाड़ियों के चयन में व्यक्तिगत प्रभाव हावी नहीं होना चाहिए।
उन्होंने स्वतंत्र चयनकर्ताओं की नियुक्ति का सुझाव दिया। चयनकर्ताओं का निश्चित कार्यकाल होना चाहिए और उन्हें हितों के टकराव की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक खिलाड़ियों के प्रदर्शन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की बात भी कही।
उनके अनुसार, चयनकर्ताओं को क्रिकेट से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। साथ ही, हर खिलाड़ी को निष्पक्ष अवसर दिया जाना जरूरी है। किसी युवा खिलाड़ी को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि प्रदर्शन से ज्यादा किसी प्रभावशाली व्यक्ति की सिफारिश महत्वपूर्ण है।
खिलाड़ियों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत
ललित मोदी ने कहा कि आईपीएल ने शीर्ष स्तर के खिलाड़ियों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाए हैं, लेकिन राज्य संघों को घरेलू और राज्य स्तर के खिलाड़ियों के लिए भी मजबूत व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।
उन्होंने सीनियर पुरुष और महिला खिलाड़ियों के लिए बेहतर रिटेनर फीस, मैच फीस में बढ़ोतरी, चोट और चिकित्सा बीमा, पेंशन सहायता और प्रदर्शन बोनस का सुझाव दिया। साथ ही, जिला अकादमियों को पर्याप्त आर्थिक मदद देने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि आरसीए की वार्षिक आय का एक हिस्सा अलग से खिलाड़ी विकास और कल्याण कोष में रखा जा सकता है। इससे खिलाड़ियों को लंबे समय तक आर्थिक और चिकित्सा सहायता मिल सकती है।
क्रिकेट प्रशासन के विवादों के लिए स्वतंत्र पैनल
राजस्थान क्रिकेट में प्रशासनिक विवादों और कानूनी मामलों पर भी ललित मोदी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक या कानूनी अधिकारों से जुड़े मामलों में अदालत का रास्ता खुला रहना चाहिए। लेकिन सामान्य क्रिकेट प्रशासन के विवाद वर्षों तक अदालतों में नहीं चलने चाहिए।
उन्होंने आरसीए में स्वतंत्र विवाद समाधान और मध्यस्थता पैनल बनाने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, अगर हर प्रशासनिक निर्णय अदालत की लड़ाई में बदल जाएगा तो क्रिकेट का प्रभावी संचालन मुश्किल हो जाएगा।
तीन साल से अटके स्टेडियम प्रोजेक्ट पर क्या कहा?
पूर्व आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत के कार्यकाल में शुरू हुए स्टेडियम प्रोजेक्ट के करीब तीन साल से रुके होने पर भी ललित मोदी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बड़ी परियोजनाएं नेतृत्व में बदलाव, राजनीतिक हस्तक्षेप, अस्पष्ट वित्तीय व्यवस्था या अनुबंध संबंधी विवादों के कारण अटक सकती हैं।
उन्होंने कहा कि स्टेडियम किसी एक पदाधिकारी की निजी परियोजना नहीं है, बल्कि यह राजस्थान क्रिकेट की संपत्ति है। नए नेतृत्व को इस प्रोजेक्ट का स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराना चाहिए।
उन्होंने लागत, निर्माण की प्रगति और काम पूरा होने की संभावित तारीख को लेकर हर तिमाही सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने का सुझाव दिया। इससे परियोजना में पारदर्शिता बढ़ सकती है और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है।
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