लोकसभा स्पीकर के गृह नगर का अस्पताल बना मौत का रास्ता, आखिर कहां हो रही बड़ी लापरवाही?

Mukesh Sharma | May 09, 2026, 17:46 IST
Photograph: (the sootr)
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के निर्वाचन क्षेत्र कोटा के अस्पताल में मौत का खेल चलता रहा। सरकार जब जागी, जब यहां दो प्रसूताओं की मौत हो गई। अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं और लापरवाही के लिए लोग जवाब मांग रहे हैं।

News In Short

  • स्पीकर ओम बिरला के गृह नगर कोटा के सरकारी अस्पताल में दो प्रसूताओं की मौत।
  • सिजेरियन डिलीवरी के बाद 4 दिन में कुल 8 महिलाओं की हालत अचानक बिगड़ी।
  • हैरानी यह कि 6 की तबीयत बिगड़ने के बाद भी दो अन्य महिलाओं की गई सर्जरी।
  • सभी मरीजों में किडनी फेल जैसे गंभीर लक्षण देखने को मिले, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
  • अस्पताल में इलाज का पूरा सिस्टम सवालों में, कोई बताने को तैयार नहीं कि ऐसा क्यों हुआ।

News In Detail

Kota: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के गृह नगर कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (NMCH) में प्रसव के बाद दो माताओं की मौत ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह अस्पताल राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान माना जाता है।



इस अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के बाद उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।



हॉस्पिटल प्रशासन ने एक डॉक्टर को बर्खास्त करते हुए तीन अन्य स्टाफ सदस्यों को निलंबित कर दिया है। वहीं ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने इलाज के दौरान इस्तेमाल की गई 24 दवाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।



​एक परिवार की उजड़ी खुशियां

कोटा के क्रेशर बस्ती में रहने वाले 21 वर्षीय रवि नायक के घर में आज सन्नाटा पसरा है। जिस आंगन में बच्चे की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहांं उनकी 20 वर्षीय पत्नी ज्योति के अंतिम संस्कार की तैयारियां हो रही हैं।



​रवि ने नम आंखों से बताया कि सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद उनकी पत्नी को घबराहट होने लगी और जल्द ही उसने पेशाब करना बंद कर दिया। रवि का आरोप है कि डॉक्टरों ने गर्दन के पास कैथेटर लगाया, जिससे अत्यधिक खून बहने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।



​क्या हुआ अस्पताल में?

न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पिछले 4 दिनों में कुल 8 महिलाओं की हालत अचानक बिगड़ी है। इनमें से पायल और ज्योति नाम की दो महिलाओं की मौत हो चुकी है। बाकी महिलाओं का इलाज जारी है।



सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के बाद भी प्रशासन ने दो अन्य महिलाओं (किरण और शिरीन) की सर्जरी उसी इमरजेंसी ओटी (EOT) में की, जिसके बाद उनकी तबीयत भी गंभीर हो गई।



3 मई से शुरू हुआ सिलसिला

पूरा मामला 3 मई से शुरू हुआ। इसके बाद 4 मई के दिन और रात में कई महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी के बाद पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती कराया गया। 4 मई की रात 12 बजे सबसे पहले पायल की तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद 48 घंटे के भीतर ही उसकी और ज्योति की मौत हो गई। सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण - यूरिन बंद होना, बीपी लो होना, प्लेटलेट्स गिरना और हाथ-पैरों में तेज दर्द - देखने को मिले।



2 अन्य नए मामले

5 मई को हॉस्पिटल में भर्ती हुईं दो अन्य महिलाओं की तबीयत भी बिगड़ी। पहला मामला किरण (26) का है। किरण की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी जिसके 18 घंटे बाद यूरिन बंद हो गया और किडनी में इन्फेक्शन हो गया।



परिजनों ने बताया कि हॉस्पिटल स्टाफ ने पहले नॉर्मल डिलीवरी का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में सिजेरियन ऑपरेशन कराया गया। तबीयत बिगड़ने पर 8 मई की सुबह 11 बजे उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया, जहां उसकी डायलिसिस करनी पड़ी। अब तक 40 हजार रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं।



दूसरा मामला शिरीन (20) का है जो छह माह की गर्भवती थी। 5 मई को उसे दर्द के चलते हॉस्पिटल लाया गया, जहां जांच में पता चला कि बच्चेदानी का मुंह खुल गया है। डॉक्टरों ने टांके लगाने की सलाह दी। 6 मई को सर्जरी के बाद शिरीन को वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन अगले दिन उसका भी यूरिन बंद हो गया और ब्लीडिंग शुरू हो गई।



7 मई की शाम को उसे डिस्चार्ज करवाकर प्राइवेट हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने बॉडी में गंभीर इन्फेक्शन की पुष्टि की। 8 मई को शिरीन की डायलिसिस हुई। अब तक करीब 50 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं।



​आंकड़ों का जाल

​यह अस्पताल राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र है, जो न केवल कोटा बल्कि बूंदी, झालावाड़, बारां, सवाई माधोपुर और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के मरीजों का भार उठाता है। इस अस्पताल में 100 बेड की सुविधा है। यहां प्रति माह लगभग 450 डिलीवरी (220 सामान्य और 225 सिजेरियन) होती हैं।



इस अस्पताल में 800 से अधिक डॉक्टर (600 रेजिडेंट्स सहित) कार्यरत हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 5,000 मरीजों की ओपीडी है। ​अस्पताल के अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. आरपी मीणा ने कहा, अस्पताल के इतिहास में पहली बार ऐसे मामले सामने आए हैं। हमने जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन समस्या के मूल कारण की पहचान अभी बाकी है।



​सरकार की कार्रवाई और जांच

घटना की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने तुरंत कदम उठाए हैं। जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज से एनेस्थीसिया, मेडिसिन, प्रसूति एवं स्त्री रोग और नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों की एक टीम कोटा भेजी गई है।



जांच पूरी होने तक उन दवाओं और इंजेक्शनों के उपयोग पर रोक लगा दी गई है जो प्रभावित महिलाओं को दी गई थीं। राजस्थान ड्रग कंट्रोलर अजय पाठक ने अस्पताल का निरीक्षण कर दवाओं, तरल पदार्थों और उपभोग्य सामग्रियों के 23 नमूने एकत्र किए हैं।



डॉक्टर बर्खास्त, तीन अन्य निलंबित

हॉस्पिटल प्रशासन ने लापरवाही बरतने वाले चार कर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए ऑपरेटिंग सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर (गायनेकोलॉजी) डॉ. श्रद्धा की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। डॉ. श्रद्धा संविदा पर तैनात थीं। वहीं, इमरजेंसी ओटी के ऑफिसर इंचार्ज एसोसिएट प्रोफेसर (सर्जरी) डॉ. नवनीत शर्मा, ऑपरेशन थिएटर की सिस्टर इंचार्ज गुरजीत कौर और लेबर रूम की सिस्टर इंचार्ज निमेश वर्मा को निलंबित कर दिया गया है।



​परिजनों का गुस्सा और बेबसी

​अस्पताल में भर्ती धन्नी बाई की सास शीला बाई ने कोटा संभागीय आयुक्त अनिल अग्रवाल के सामने हाथ जोड़कर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने कहा, कृपया कुछ कीजिए, हम डरे हुए हैं। उसके दो बेटियां और अब एक नवजात बेटा है। अगर उसे कुछ हो गया तो उनकी देखभाल कौन करेगा?



​फिलहाल पूरा प्रशासन और चिकित्सा जगत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दवाओं की लैब रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि यह साफ हो सके कि यह चिकित्सा लापरवाही थी, दवाओं का रिएक्शन या फिर कोई अज्ञात संक्रमण।



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