राजस्थान में हारे, लेकिन कांग्रेस में किसी इस्तीफे के संकेत नहीं, अब लोकसभा की तैयारी के लिए जुटने को कहा
मनीष गोधा, JAIPUR. राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई है लेकिन जिम्मेदार लोगों में से इस्तीफा किसी का नहीं होगा। पार्टी अब लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटेगी। पार्टी का मानना है कि राजस्थान में हार तो हुई है, लेकिन अन्य दो राज्यों से यहां स्थिति बेहतर रही है। पार्टी के विधायक ठीक संख्या में जीत कर आए हैं और वोट प्रतिशत भी बढ़ा है।
डेढ़ घंटे चली बैठक में हार के कारणों की समीक्षा की
कांग्रेस ने आज दिल्ली में राजस्थान के नेताओं के साथ हार के कारणों की समीक्षा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई यह बैठक करीब डेढ़ घंटे चली और हार के कारणों की विस्तार से समीक्षा भी की गई। सूत्रों की मानें तो हार को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा से कुछ सवाल जवाब भी हुए, लेकिन अंत में तय यही हुआ कि जो हुआ सो हुआ अब लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटना है।
राजस्थान में अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन
हालांकि, यह तैयारी किसके नेतृत्व में होगी यह अभी कुछ तय नहीं हुआ है। इतने संकेत जरूर मिले हैं कि अभी किसी का इस्तीफा नहीं होगा। यानी लोकसभा चुनाव तक गोविंद सिंह डोटासरा के प्रदेश अध्यक्ष बने रहने की पूरी संभावना है। नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर बैठक में चर्चा नहीं हुई बताई जा रही है। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पार्टी के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा की पार्टी ने राजस्थान में अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। जहां हमारा वोट प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले बड़ा है और कई प्रत्याशी 1500 से भी काम वोटो से हारे हैं। अब हम लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुड़ेंगे और पूरी पार्टी ने जिस तरह विधानसभा चुनाव में एकजुटता से चुनाव लड़ा है इस तरह से लोकसभा चुनाव में भी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी।
बड़े नेताओं की रुचि नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर है
खुद के इस्तीफा की पेशकश के बारे में रंधावा ने कहा कि मैं पार्टी से पहले ही कहा था कि मैं सिर्फ विधानसभा चुनाव आता क्या रहना चाहता हूं उसके बाद मुझे पंजाब में सक्रिय होना है, लेकिन पार्टी ने भी राजस्थान में ही काम करते रहने के लिए कहा है। अन्य नेताओं के इस्तीफा के बारे में उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। दरअसल राजस्थान में मौजूदा स्थिति को देखते हुए कांग्रेस का कोई भी नेता फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर आने में ज्यादा रुचि नहीं दिख रहा है क्योंकि लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को बहुत अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं दिख रही है। पार्टी के ज्यादातर बड़े नेताओं की रुचि नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर है। इस बारे में केंद्रीय पर्यवेक्षक भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी रिपोर्ट पार्टी आला कमान को सौंप चुके हैं। अब इस पर फैसले का इंतजार है।