पंचायत चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 15 आरएएस अफसरों के तबादले; जानें किसे क्या मिली जिम्मेदारी?
समझें क्या है पूरा मामला
- पंचायत चुनाव से ऐन पहले बड़ा फेरबदल।
- आचार संहिता से पहले 15 आरएएस के तबादले।
- ज्यादातर एसडीएम और एडीएम स्तर के अफसर।
- कार्मिक विभाग ने जारी किया आदेश।
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव (Panchayat Election) की आचार संहिता लागू होने से ऐन पहले भजनलाल सरकार ने प्रशासनिक बेड़े में बड़ा फेरबदल किया है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य में 15 राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के तबादले (RAS Officer transfer) किए गए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार दोपहर 3 बजे पंचायत चुनाव के आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा और आचार संहिता लागू होने से कुछ ही समय पहले की गई इस कार्रवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किन अधिकारियों के हुए तबादले
श्री नरेन्द्र पाल सिंह को अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, जैसलमेर बनाया गया है। श्री अनिल कुमार पूनिया को रजिस्ट्रार, गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा लगाया गया है। श्री सुरेश चौधरी को उपायुक्त, जयपुर विकास प्राधिकरण बनाया गया है।
श्री अवि गर्ग को रजिस्ट्रार, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर की जिम्मेदारी दी गई है। श्री सुरेन्द्र प्रसाद को उपखण्ड अधिकारी, नारायणपुर कोटपुतली-बहरोड़ लगाया गया है। श्री सुनील शर्मा-I को शासन उप सचिव, सहायता विभाग, जयपुर बनाया गया है।
श्री दिनेश शर्मा को उपखण्ड अधिकारी एवं उप परियोजना अधिकारी, सहरिया विकास परियोजना, शाहबाद बारां लगाया गया है। श्री रवि कुमार को सहायक निदेशक, लोक सेवाएं, करौली बनाया गया है। श्री शिव राज मीना को उपखण्ड अधिकारी, सवाईमाधोपुर लगाया गया है।
अन्य अधिकारियों की तैनाती
श्री कपिल कुमार को उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, राजसमन्द बनाया गया है। श्री राजेश मीना को उपखण्ड अधिकारी, मण्डावर दौसा लगाया गया है। श्री ऋतु राज शर्मा को उपखण्ड अधिकारी एवं उप परियोजना अधिकारी, सहरिया विकास परियोजना, किशनगंज बारां की जिम्मेदारी दी गई है।
श्री बनवारी लाल बैरवा को उपखण्ड अधिकारी, फूलियाकलां भीलवाड़ा लगाया गया है। सुश्री धारा को प्रोटोकॉल अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग, जयपुर बनाया गया है। श्री श्याम सुन्दर बेनीवाल को उपखण्ड अधिकारी, हनुमानगढ़ लगाया गया है।
चुनावी कमान पर नियंत्रण
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इस सूची में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बदले गए 15 अधिकारियों में से अधिकांश उपखंड अधिकारी (SDM – Sub Divisional Magistrate) और अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM – Additional District Magistrate) स्तर के हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले पंचायत चुनावों में एसडीएम ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाते हैं। आचार संहिता लगने से ठीक पहले सरकार ने संवेदनशील और महत्वपूर्ण उपखंडों में अनुभवी प्रशासनिक चेहरों को तैनात किया है।
इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया और कानून व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण रखा जा सके। यह सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना जरूरी है कि इसका असर चुनाव पर कैसा पड़ता है।
आचार संहिता के बंधन से बचना
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा एक बार चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के साथ ही पूरे ग्रामीण क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाती है। इसके बाद सरकार अपनी मर्जी से किसी भी फील्ड अधिकारी का तबादला नहीं कर सकती।
यदि बहुत जरूरी हो तो सरकार को चुनाव आयोग से लंबी कागजी कार्रवाई और विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। इसमें आयोग की मंजूरी मिलना तय नहीं होता। इस कानूनी पेंच से बचने के लिए ही सरकार ने आचार संहिता की घोषणा से ठीक पहले यह सूची जारी की है।
स्थानीय समीकरण साधने की कोशिश
पंचायतीराज चुनाव सत्ताधारी भाजपा के लिए ग्रामीण इलाकों में अपनी जमीनी पकड़ साबित करने की सबसे बड़ी परीक्षा है। जिला परिषद सदस्य, प्रधान और सरपंच के पदों पर अपने समर्थकों को जिताने के लिए स्थानीय विधायकों और मंत्रियों का भारी दबाव होता है।
अक्सर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में ऐसे अधिकारियों की तैनाती चाहते हैं, जिनके साथ उनका बेहतर समन्वय हो। इस सूची में नारायणपुर कोटपुतली-बहरोड़, मण्डावर दौसा, शाहबाद और किशनगंज बारां जैसी जगहों पर किए गए बदलाव स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश माने जा रहे हैं।
क्यों अहम है यह फेरबदल?
यह फेरबदल पंचायत चुनाव से ठीक पहले हुआ है। इसलिए इसे अहम माना जा रहा है। इससे चुनाव प्रक्रिया पर सरकार की पकड़ मजबूत हो सकती है।
आचार संहिता लगने के बाद ऐसे तबादले संभव नहीं होते। इसलिए सरकार ने समय रहते यह कदम उठाया। अब सभी की नजर चुनाव आयोग की घोषणा और आगे की प्रक्रिया पर है।