डकैती के दौरान दोनों हाथ कटने के बाद भी डटे रहे थे मानसिंह, 44 साल बाद अब मिलेगा सम्मान

thesootr Desk | Apr 15, 2026, 20:25 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में बांसवाड़ा के कांस्टेबल मानसिंह ने 1982 में डकैती के दौरान अपने दोनों हाथ गंवाने के बावजूद संघर्ष जारी रखा। उनकी बहादुरी को 44 साल बाद अब सम्मानित किया जा रहा है। पुलिस लाइन के चिल्ड्रन्स पार्क का नाम भी बदलकर शहीद मानसिंह बालोद्यान किया गया।

News In Short

  • 44 साल बाद बांसवाड़ा के मानसिंह को पुलिस स्थापना दिवस पर सम्मानित किया जाएगा।
  • पुलिस कांस्टेबल मानसिंह ने 1982 में डकैती के दौरान वीरता दिखाते हुए शहीद हुए थे।
  • अब एसपी ने मानसिंह की वीरता को उजागर कर सम्मानित करने का निर्णय लिया।
  • पुलिस लाइन के चिल्ड्रन्स पार्क का नाम बदलकर शहीद मानसिंह बालोद्यान किया गया।
  • मानसिंह की बहादुरी को सलाम करते हुए उनकी तस्वीर पुलिस लाइन में लगाई जाएगी।

News In Detail

Banswara: राजस्थान के आदिवासी इलाके बांसवाड़ा में एक ऐसी दास्तान है, जो शौर्य का परिचय देती है। 1982 में एक डकैती के दौरान पुलिस कांस्टेबल मानसिंह ने डकैतों के छक्के छुड़ा दिए। डकैतों ने तलवार से उनके दोनों हाथ काट डाले, लेकिन मानसिंह ने हार नहीं मानी। बिना हाथों के ही वह डकैतों से लोहा लेते रहे और अंतिम सांस तक डटे रहे।



उनकी इस बहादुरी को 44 साल बाद अब सलाम किया जा रहा है। इस बार पुलिस स्थापना दिवस पर 16 अ्प्रैल को शहीद मानसिंह को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल बांसवाड़ा के पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी ने की है, जिन्होंने पुराने दस्तावेज खंगालकर इस वीर सपूत की कहानी को फिर से जन-जन तक पहुंचाया।



वो खौफनाक रात

2 मार्च 1982 की रात बांसवाड़ा जिले की घाटोल पुलिस चौकी में तैनात कांस्टेबल मानसिंह गश्त पर थे। रात करीब 8-10 बजे के बीच उन्हें सूचना मिली कि बैंक ऑफ बड़ौदा की घाटोल शाखा में 8 से 10 डकैतों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया है। बिना एक पल की देरी किए मानसिंह मौके पर पहुंच गए। उनके पास सिर्फ एक सरकारी रिवाल्वर थी और सामने था डकैतों का एक पूरा गिरोह।



उन्होंने बिना डरे एक डकैत को दबोच लिया। लेकिन उसके साथियों ने पीछे से हमला बोल दिया। एक डकैत ने तलवार उठाई और मानसिंह के दोनों हाथ काट दिए। खून से लथपथ मानसिंह ज़मीन पर गिर गए, लेकिन उनका हौसला नहीं गिरा। बिना हाथों के वह उठे और तब तक लड़ते रहे जब तक उनकी सांसें थम नहीं गईं।



शहादत के बाद मानसिंह की बहादुरी को सलाम किया गया। उन्हें मरणोपरांत पुलिस पदक फॉर गैलेंट्री से सम्मानित किया गया। यह पदक किसी भी पुलिसकर्मी के लिए सबसे बड़े वीरता पुरस्कारों में से एक है।



एसपी सुधीर जोशी ने खंगाला इतिहास

बांसवाड़ा के आईपीएस सुधीर जोशी ने जब इस कहानी के बारे में सुना तो वह भावुक हो उठे। उन्होंने पुराने दस्तावेज मंगवाए, रिपोर्ट खंगालीं और 44 साल पहले की उस वीरता की सच्चाई को उजागर किया। उनका मानना था कि मानसिंह जैसे शहीदों को सिर्फ एक पदक से नहीं, बल्कि हर दिन याद किया जाना चाहिए। तब उन्होंने निर्णय लिया कि पुलिस स्थापना दिवस के मौके पर शहीद मानसिंह को मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा।



शहीद मानसिंह बालोद्यान

एसपी सुधीर जोशी की पहल पर बांसवाड़ा पुलिस लाइन में स्थित चिल्ड्रन्स पार्क का नाम बदलकर शहीद मानसिंह बालोद्यान किया गया है। यह पार्क उन बच्चों को प्रेरित करेगा जो कल के जवान बनेंगे। साथ ही पुलिस लाइन में शहीद मानसिंह की तस्वीर भी लगाई जाएगी, ताकि हर पुलिसकर्मी उनकी शहादत को याद कर सके।



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