गजब की आस्था: इस गांव में हरियाली हैं भगवान की अमानत, इसलिए हर घर में सदियों पुराने पेड़

Purshottam Kumar Joshi | Jan 24, 2026, 16:19 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के मांदलदा गांव में पेड़ों के साथ रहना, उनका संरक्षण करना और भगवान देवनारायण की आज्ञा का पालन करना यहां के निवासियों की गहरी आस्था का प्रतीक है।

News In Short

  • राजस्थान के मांदलदा गांव में पेड़ों को काटना अपराध माना जाता है।
  • यहां के लोग अपने घरों का डिज़ाइन पेड़ों के इर्द-गिर्द तैयार करते हैं।
  • गांव में पेड़, टहनियां, और पत्तियां घरों के अंदर और बाहर फैलती हैं।
  • गांव की मान्यता के अनुसार, भगवान देवनारायण के आदेश से पेड़ों को नुकसान पहुंचाना मना है।
  • यहां की संस्कृति में बच्चों का नामकरण भगवान देवनारायण के पांच नामों में से एक पर होता है।

News In Detail

राजस्थान में चित्तौड़गढ़ जिले के मांदलदा गांव में पेड़ों का संरक्षण और उनकी पूजा एक गहरी आस्था का प्रतीक है। यहां के लोग पेड़ों के बीच घर बनाते हैं और घर के रिनोवेशन में भी किसी पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाते। गांव के लोगों द्वारा भगवान देवनारायण की आज्ञा के अनुसार ही परिवार में जन्मे पहले बच्चे का नाम देवनारायण के पांच नामों में से एक रखा जाता है। गांव में कई सालों से यह परंपरा चली आ रही है। पेड़ों को भगवान की अमानत माना जाता है।



पेड़ों और आस्थाओं से जुड़ा एक अनोखा गांव

चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित मांदलदा गांव अपने अनोखे वास्तुकला और पेड़ों के प्रति गहरी आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यहां के लोग मानते हैं कि भगवान देवनारायण की आज्ञा के अनुसार पेड़ों को कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। यही कारण है कि इस गांव में घरों की संरचना पेड़ों के अनुसार बनाई जाती है और हर निर्माण में पेड़ों की शाखाओं और तनों को ध्यान में रखा जाता है।



पेड़ों के साथ वास्तुकला का अद्भुत मेल

मांदलदा गांव के घरों में आप देखेंगे कि बाथरूम, किचन, और कमरे तक में पेड़ अपनी टहनियों के साथ आकर निकलते हैं। यहां तक कि गांव की सड़कों पर भी पेड़ बीचों बीच उगते हुए दिखाई देते हैं। इन पेड़ों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए घरों का डिज़ाइन इन्हीं के हिसाब से बदल दिया जाता है। इस अनूठी परंपरा के चलते गांव का हर घर और उसके आसपास का माहौल खास होता है।



पर्यावरण संरक्षण, परंपराएं और विश्वास

मांदलदा के लोग विश्वास करते हैं कि अगर किसी पेड़ या उसकी टहनी को नुकसान पहुंचाया जाए, तो उसका दुष्प्रभाव उनके परिवार पर पड़ता है। यही कारण है कि गांव के लोग, खासकर घरों के मालिक, किसी भी प्रकार से पेड़ों को काटने से बचते हैं। रिनोवेशन के दौरान भी यह सुनिश्चित किया जाता है कि एक भी पेड़ को नुकसान न पहुंचे।



भगवान देवनारायण की आज्ञा

यहां के लोग भगवान देवनारायण को अपना आराध्य मानते हैं और उनके द्वारा दी गई आज्ञाओं का पालन करते हैं। गांव के किसी भी घर में पैदा होने वाले पहले बच्चे का नाम भगवान देवनारायण के पांच नामों में से एक रखा जाता है। इस प्रकार हर परिवार की पहचान और आस्था भगवान देवनारायण से जुड़ी होती है।



सीसी सड़क का निर्माण और पेड़ों की रक्षा

गांव में सीसी सड़क के निर्माण के दौरान एक पेड़ बीच में आ गया था, लेकिन उसे काटा नहीं गया। सड़क बनाने में उस पेड़ को बचाने का पूरा प्रयास किया गया। यह पेड़ों के प्रति गांववासियों की आस्था को दर्शाता है, जो पेड़ों को भगवान की अमानत मानते हैं।



गांव के लोग और उनकी आस्था

मांदलदा गांव में लगभग 2200 से 2500 लोग रहते हैं, जिनमें अधिकांश गुर्जर समाज से हैं। इन लोगों की हर परंपरा भगवान देवनारायण से जुड़ी हुई है। गांव में पेड़-पौधों की रक्षा करना और उनकी देखभाल करना यहां के लोगों की धार्मिक आस्था का हिस्सा है। गांव के लोग यह मानते हैं कि पेड़ों को नुकसान पहुंचाने से उनके जीवन में विपत्तियां आ सकती हैं।



गांव में प्राचीन मंदिर

गांव के निकट स्थित भगवान देवनारायण का प्राचीन मंदिर है, जिसे गांव के लोग बहुत श्रद्धा से पूजते हैं। मंदिर में भगवान के पैरों के निशान, मोजड़ी के निशान, और अन्य धार्मिक निशानों की पूजा की जाती है। यह मंदिर गांववासियों के लिए आस्था का केंद्र है और उनकी धार्मिक विश्वासों का प्रतीक है।



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