बंगाल में मारवाड़ियों का बजा डंका, भाजपा के टिकट पर पांच प्रवासी राजस्थानी जीते
News In Short
- बंगाल चुनाव में प्रवासी राजस्थानियों को भी मिली सफलता।
- चुनाव में भाजपा के टिकट पर 9 मारवाड़ी उम्मीदवार उतरे थे।
- पांच प्रवासी राजस्थानियों ने दर्ज की शानदार जीत।
- बंगाल में बड़ी संख्या में प्रवासी राजस्थानी बसे हुए हैं।
- बंगाल में भाजपा की जीत में राजस्थान के नेताओं की भी अहम भूमिका।
News In Detail
Jaipur: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में प्रवासी राजस्थानियों ने भी अपना डंका बजवाया है। भाजपा ने चुनाव मैदान में 9 प्रवासी राजस्थानी उम्मीदवारों को उतारा था। इनमें से 5 उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज कर ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाने में सफलता हासिल की है।
भवानीपुर में राजस्थान टीम की रणनीति पड़ी भारी
इस पूरे चुनाव में सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला भवानीपुर विधानसभा सीट पर देखा गया। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके अपने ही क्षेत्र में भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने करारी शिकस्त दी। इस जीत के पीछे की कहानी राजस्थान के उन नौ दिग्गज नेताओं से जुड़ी है, जिन्हें भाजपा ने इस 'मिशन बंगाल' की जिम्मेदारी सौंपी थी।
भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत माइक्रो मैनेजमेंट पर ध्यान केंद्रित किया। वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में 8 अन्य प्रवासी राजस्थानी नेताओं की एक टीम बनाई गई थी। इस टीम ने बैकबोन (रीढ़ की हड्डी) के रूप में काम करते हुए हर घर तक पहुंच बनाई। शुभेंदु अधिकारी ने अपनी जीत के बाद राजेंद्र राठौड़ और उनकी पूरी टीम का आभार जताते हुए कहा कि राजस्थान के इन नेताओं के परिश्रम ने ही जीत की राह आसान की।
जीत के पांच सितारे: कौन और कहां से जीता?
पश्चिम बंगाल की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर राजस्थान से जुड़े उम्मीदवारों ने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की है। सफल उम्मीदवारों का विवरण इस प्रकार है:
| उम्मीदवार का नाम | विधानसभा सीट | जीत का अंतर (वोट) |
|---|---|---|
| अशोक कीर्तनिया | बनगांव उत्तर | 40,670 |
| अजय पोद्दार | कुल्टी | 26,498 |
| राजेश कुमार | जगद्दल | 20,909 |
| भरत कुमार झंवर | बेलडांगा | 13,208 |
| विजय ओझा | जोड़ासांको | 5,797 |
इनमें से विजय ओझा विशेष रूप से चर्चा में हैं, जो पिछले 15 साल से कोलकाता नगर निगम के वार्ड 23 से पार्षद रहे हैं। उनका मूल जुड़ाव राजस्थान के बीकानेर से है।
व्यापार से राजनीति की दहलीज तक
ये सभी नेता मूलतः राजस्थान के विभिन्न जिलों के निवासी हैं, जो वर्षों पहले रोजगार और व्यापार के सिलसिले में पश्चिम बंगाल जाकर बस गए थे। बंगाल की संस्कृति में रचे-बसे इन प्रवासियों ने न केवल व्यापार में सफलता पाई, बल्कि वहां की सक्रिय राजनीति में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। राजस्थान से इनका जुड़ाव आज भी अटूट है, जिसका प्रमाण बीकानेर और अन्य जिलों से लगातार मिल रहे समर्थन में दिखता है।
बड़ी संख्या में नेताओं की ड्यूटी
इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव में राजस्थान से काफी भाजपा नेताओं की ड्यूटी लगाई गई। वजह यह थी कि बंगाल में बड़ी संख्या में मारवाड़ी वोटर हैं, जो बरसों से वहां बस गए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राजस्थान के 50 वरिष्ठ नेताओं ने प्रवासी राजस्थानियों के बीच सघन जनसंपर्क कर पार्टी को मजबूती प्रदान की। इसके कारणा 2021 की तुलना में भाजपा को बेहतर चुनावी नतीजे प्राप्त हुए हैं।
ये भी पढ़ें:-
सीबीएसई की नई मूल्यांकन प्रणाली, अब रटने की जगह सीखने का होगा आंकलन
सरकारी कर्मचारियों के भत्तों के भुगतान में बड़ी गड़बड़ी उजागर, एजी ने सरकार को किया अलर्ट
रिनोवेशन की आड़ में अवाप्त जमीन पर खड़ी कर दी बिल्डिंग; 44 साल पुराना आवास बताकर कोर्ट को किया गुमराह
हार के बाद कांग्रेस में इस्तीफों का दौर शुरू, जितेंद्र सिंह ने महासचिव पद छोड़ा