जोधपुर MDM अस्पताल के लेखाधिकारी राजीव राजौरिया APO, बार-बार अफसर बदलने पर उठ रहे सवाल
नरेश रमेश@जोधपुर
मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल के लेखाधिकारी राजीव राजौरिया को राजस्थान सरकार ने APO कर दिया है। राजौरिया राजस्थान लेखा सेवा के अधिकारी हैं। सरकार की ओर से जारी आदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से आदेशों की प्रतीक्षा में रखा गया है।
वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव पवन जैमन की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। आदेश में राजौरिया को APO करने की वजह प्रशासनिक कारण बताई गई है। अब उन्हें वित्त विभाग, जयपुर में अपनी उपस्थिति देनी होगी।
सरकार के आदेश में इसके अलावा कोई दूसरी वजह नहीं बताई गई है। हालांकि, अस्पताल में राजौरिया को अचानक APO किए जाने के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास तौर पर लेखा शाखा में पहले भी अधिकारियों को हटाए जाने के कारण इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।
पहले भी हटे हैं अधिकारी
MDM अस्पताल में लेखा अधिकारी को अचानक हटाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहां इस पद पर तैनात अधिकारी को APO किया जा चुका है।
अस्पताल से जुड़े लोगों के मुताबिक, लेखा शाखा में बार-बार अधिकारी बदलने को लेकर कर्मचारियों के बीच भी चर्चा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस पद पर अधिकारी लंबे समय तक क्यों नहीं टिक पा रहे हैं।
हर बार सरकारी आदेश में प्रशासनिक कारण का जिक्र होता है। इसके आगे कोई वजह सार्वजनिक नहीं की जाती। इस बार भी आदेश में केवल प्रशासनिक कारण बताते हुए राजौरिया को APO किया गया है।
महिला अधिकारी भी हुई थीं APO
राजौरिया से पहले अस्पताल की लेखा शाखा में एक महिला अधिकारी तैनात थीं। उन्हें भी अचानक APO किया गया था। हालांकि, अगले ही दिन उन्हें वापस उसी पद पर लगा दिया गया था।
बताया जाता है कि महिला अधिकारी के कामकाज को लेकर अच्छा फीडबैक था। उनके दोबारा पद संभालने के कुछ दिन बाद फिर बदलाव हुआ। उन्हें पद से हटा दिया गया और उनकी जगह राजीव राजौरिया को जिम्मेदारी दी गई।
अब राजौरिया को भी APO कर दिया गया है। कम समय में लेखा शाखा में इस तरह बार-बार बदलाव होने से अस्पताल में चर्चाओं का दौर तेज है। कर्मचारी इसे सामान्य प्रशासनिक बदलाव मानने के बजाय इसके पीछे की वजह जानना चाहते हैं।
पेमेंट को लेकर चर्चा
राजौरिया को APO किए जाने के पीछे क्या कारण है, इसे लेकर सरकार की तरफ से प्रशासनिक कारण के अलावा कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि, अस्पताल से जुड़े सूत्र इसके पीछे ठेकेदारों के पेमेंट और टेंडर से जुड़े मामलों की चर्चा कर रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि एक बड़े ठेकेदार का पेमेंट अटका हुआ था। लेखा शाखा की तरफ से नियमों के कारण भुगतान को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसी तरह कुछ टेंडर से जुड़े मामलों में भी आपत्ति होने की बात कही जा रही है।
यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ फर्मों से जुड़े काम और भुगतान को लेकर लेखा शाखा पर दबाव था। अधिकारी नियमों के मुताबिक प्रक्रिया पूरी करने की बात कर रहे थे।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सरकार के APO आदेश में भी ठेकेदार, पेमेंट या टेंडर से जुड़े किसी विवाद का जिक्र नहीं है।
क्या अधिकारियों पर था दबाव?
अस्पताल के कुछ कर्मचारियों का दावा है कि लेखा अधिकारियों पर वित्तीय मामलों में दबाव रहता है। इसी वजह से यहां अधिकारी बार-बार बदले जा रहे हैं।
उनका कहना है कि बिल पास करने से लेकर टेंडर और दूसरी वित्तीय फाइलों तक लेखा अधिकारी की भूमिका अहम होती है। नियमों के मुताबिक दस्तावेज पूरे नहीं होने
पर लेखा शाखा भुगतान या फाइल पर सवाल उठा सकती है। ऐसे में किसी पेमेंट या टेंडर पर आपत्ति होने पर मामला अटक सकता है।
इसी आधार पर अस्पताल के अंदर राजौरिया को APO करने के पीछे भी दबाव होने की चर्चा है। लेकिन फिलहाल ये कर्मचारियों और सूत्रों के दावे हैं। किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
आदेश में सिर्फ प्रशासनिक कारण
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे अहम तथ्य सरकार का आदेश है। इसमें राजीव राजौरिया को प्रशासनिक कारणों से APO करने की बात कही गई है। उन्हें जयपुर स्थित वित्त विभाग में उपस्थिति देने के निर्देश हैं।
आदेश में उनके कामकाज पर किसी तरह का आरोप नहीं लगाया गया है। न ही किसी वित्तीय गड़बड़ी, जांच या शिकायत का जिक्र किया गया है।
इसलिए राजौरिया को APO किए जाने को किसी गड़बड़ी से जोड़ना फिलहाल सही नहीं होगा।
दूसरी तरफ, अस्पताल में एक के बाद एक लेखा अधिकारियों के बदलने से सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। पहले महिला अधिकारी को APO करना, फिर वापस लगाना और बाद में दोबारा हटाना चर्चा में रहा था। अब राजौरिया को भी APO कर दिया गया है।
बार-बार बदलाव पर सवाल
MDM अस्पताल पश्चिमी राजस्थान के बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल है। यहां रोज बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल का बजट, खरीद, ठेके और भुगतान भी बड़े स्तर पर होते हैं। ऐसे में लेखा शाखा की भूमिका काफी अहम हो जाती है।
इस शाखा में लगातार अधिकारी बदलने से रोजमर्रा के काम पर भी असर पड़ सकता है। पुरानी फाइलों और भुगतान के मामलों को समझने में नए अधिकारी को समय लगता है।
फिलहाल राजौरिया को हटाने की आधिकारिक वजह प्रशासनिक कारण ही है। लेकिन बार-बार हो रहे बदलाव ने अस्पताल के अंदर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राजौरिया की जगह किस अधिकारी को जिम्मेदारी मिलती है और क्या सरकार इस फैसले के पीछे की कोई और वजह साफ करती है।