जिस अफसर पर अवैध खनन मामले में कार्रवाई की सिफारिश, उसे मिला सम्मान
समझें क्या है पूरा मामला
- जालोर के खनिज अभियंता नरेन्द्र खटीक पर कार्रवाई की सिफारिश हुई थी।
- 23 दिन बाद ही उन्हें 15 अगस्त समारोह में सम्मानित कर दिया गया।
- खटीक पर अवैध खनन रोकने में लापरवाही के आरोप हैं।
- विभाग ने उनके खिलाफ चार्जशीट का प्रस्ताव भेज रखा था।
- एक ही अधिकारी पर कार्रवाई और सम्मान से प्रशासनिक तालमेल पर सवाल उठे।
राजस्थान के जालोर में खान एवं भू-विज्ञान विभाग के खनिज अभियंता नरेन्द्र खटीक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके 23 दिन बाद ही जिला प्रशासन ने उन्हें 15 अगस्त के समारोह में सम्मानित कर दिया। खटीक पर अवैध खनन रोकने में लापरवाही का आरोप है। विभाग ने उनके खिलाफ चार्जशीट तैयार करने का प्रस्ताव भी भेज रखा था।
जालोर जिले में प्रशासनिक तालमेल और सूचना तंत्र की एक गंभीर चूक अब चर्चा का विषय बनी हुई है। खान एवं भू-विज्ञान विभाग के खनिज अभियंता नरेन्द्र खटीक के खिलाफ पहले ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा चुकी थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने महज 23 दिन बाद उन्हीं को 15 अगस्त के मुख्य समारोह में जिला स्तर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कर दिया।
विभाग ने भेजा था चार्जशीट का प्रस्ताव
विभाग ने खटीक को अनुशासनहीनता और राजकीय कार्यों में अरुचि का दोषी मानते हुए चार्जशीट तैयार करने का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा था। उन पर अवैध खनन रोकने में लापरवाही बरतने और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया गया है। अधीक्षण खनि अभियंता, जोधपुर वृत्त, डी. पी. गौड़ ने 23 जुलाई को निदेशक, उदयपुर, को पत्र भेजकर राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत खटीक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का अनुरोध किया था।
एसई ने बताई थी कार्यशैली को लोकसेवक विरोधी
सिफारिश पत्र में आरोप लगाया गया था कि रानीवाड़ा क्षेत्र में अवैध खनन और क्रेशरों की जांच को लेकर खटीक ने कोई कार्रवाई नहीं की। आहोर-भाद्राजून क्षेत्र में ईआरसीसी ठेकेदार द्वारा अवैध रॉयल्टी वसूली की शिकायतों पर भी वे चुप रहे। 22 मई से 24 जून के बीच उन्हें चार बार नोटिस और स्मरण पत्र भेजे गए।
ये नोटिस 22 मई, 3 जून, 9 जून और 24 जून को जारी हुए। 24 जून के कारण बताओ नोटिस में साफ लिखा गया था कि बार-बार स्मरण पत्र और मौखिक आदेशों के बावजूद रिपोर्ट पेश न करना उनकी कार्यशैली को लोकसेवक के विपरीत दिखाता है। इसे सीधे तौर पर अनुशासनहीनता बताया गया था।
15 अगस्त को मिला प्रशस्ति पत्र
विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल ही रही थी कि इसी बीच 15 अगस्त को कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गावंडे ने नरेन्द्र खटीक को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर दिया। इस पत्र में खास तौर पर लिखा गया कि यह सम्मान अवैध खनन के विरुद्ध कार्रवाई, राजस्व लक्ष्य पूरा करने और बजरी के वैध खनन के पट्टे शुरू करने के सराहनीय कार्य के लिए दिया जा रहा है।
एक ही अधिकारी, दो विपरीत तस्वीरें
यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि जिस अधिकारी को अवैध खनन रोकने में नाकाम रहने पर विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा था, उसी को अवैध खनन रोकने के लिए ही सम्मानित कर दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम जालोर जिला प्रशासन और खनिज विभाग के बीच तालमेल की कमी को उजागर करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिला स्तर पर सम्मान के लिए नाम तय करते वक्त संबंधित अधिकारी के खिलाफ चल रही कार्रवाई की जानकारी क्यों नहीं ली गई।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस पर विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण आ सकता है।
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