जयपुर पुलिस की हिरासत में मरा ऋतुराज नाबालिग निकला, जन्म प्रमाण पत्र में 2009 की जन्मतिथि दर्ज
जयपुर के मुहाना थाने में हिरासत में ऋतुराज की टॉर्चर से मौत का मामला सामने आया है। मुहाना पुलिस (Muhana Police) ने बिना मुकदमा जिस ऋतुराज को हिरासत में रखा और टॉर्चर किया, वह पड़ताल में नाबालिग निकला। मंदसौर पालिका द्वारा 22 मई 2013 को जारी जन्म प्रमाण (Birth Certificate) में ऋतुराज की जन्मतिथि 20 दिसंबर 2009 है।
पुलिस ने 22 सितंबर को मुहाना थाने में पूछताछ की थी। उस दिन उसकी उम्र 16 साल 9 महीने थी। किशोर न्याय अधिनियम-2015 के अनुसार पुलिस किसी नाबालिग को न तो वयस्क की तरह लॉकअप में रख सकती है और न ही थाने में पूछताछ कर सकती है।
दो अलग जन्मतिथियां
ऋतुराज एसएमएस हॉस्पिटल में भी 2009 की जन्मतिथि से भर्ती हुआ। लेकिन पुलिस ने उसकी उम्र के लिए जिस पेन कार्ड को रिकॉर्ड में लगाया है, उसमें जन्मतिथि 25 दिसंबर 2007 दर्ज है। इससे दो अलग-अलग जन्मतिथियों का मामला बन गया है।
किसने बनवाया था ऋतुराज का जन्म प्रमाण पत्र?
ऋतुराज का जन्म प्रमाण पहले पिता राजू (राजेश) ने 2013 में मंदसौर नगरपालिका से बनवाया था। इस पर मंदसौर नगरपालिका रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) के हस्ताक्षर हैं और मुहर है।
ऋतुराज के जन्म के कुछ साल बाद राजू और हेमा अलग हो गए थे। इस दौरान प्रकाश की पत्नी की भी मृत्यु हो गई। 2018 में प्रकाश और हेमा ने शादी की। ऋतुराज उनके साथ ही रहा। परिवार की स्थिति में कई बदलाव हुए, लेकिन जन्म प्रमाण पत्र यथावत रहा।
अस्पताल में पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस ऋतुराज को नारायणा हॉस्पिटल लेकर गई तो डॉक्टर को बताया कि यह लावारिस मिला था। मुंह से झाग आ रहे थे। सांप ने डसा है। क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप गोयल ने इसकी पुष्टि की। इसलिए एंटी वेनम के इंजेक्शन लगाए गए थे।
क्या कहते हैं नियम?
जन्म प्रमाण पत्र जन्मतिथि का सबसे ज्यादा वैध दस्तावेज है। एडवोकेट अनुसार यदि किसी एजेंट या खुद ऋतुराज ने इसे गलत तरीके से बदलकर कोई दस्तावेज बनाए तो उन पर मामला बनता है। लेकिन इससे जन्मतिथि नहीं बदलेगी।
किशोर न्याय अधिनियम-2015 के तहत नाबालिग को वयस्क की तरह नहीं रखा जा सकता। न ही उससे थाने में पूछताछ की जा सकती है। इस मामले में इन नियमों का उल्लंघन हुआ है। यह गंभीर मामला है।
क्यों अहम है यह खुलासा?
अगर ऋतुराज नाबालिग था तो उसके साथ कानून के मुताबिक बर्ताव नहीं हुआ। यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर उसकी उम्र साबित होती है।
अब देखना जरूरी है कि इस मामले में जांच कैसे आगे बढ़ती है। पुलिस पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए। मामला संवेदनशील है और इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।