MLA रविंद्र सिंह भाटी ने अमित शाह को खून से लिखा लेटर, बीकानेर दौरे के दौरान सौंपा जाएगा
News In Short
- विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने मजदूरों के खून में अपना खून मिलाकर अमित शाह को लिखा पत्र।
- गिरल लिग्नाइट माइंस के मजदूर 45 दिन से 50 डिग्री के तपते रेगिस्तान में धरने पर बैठे हैं।
- मजदूरों का आरोप- 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम करवाया जा रहा है, नौकरी से निकाला जा रहा है।
- मजदूर 1994 में खनन के लिए जमीन दे चुके हैं, अब खुद बेरोजगार हो गए हैं।
- 25-26 मई को बीकानेर दौरे पर आ रहे अमित शाह को यह पत्र सौंपा जाएगा।
News In Detail
राजस्थान के बाड़मेर जिले से एक बेहद भावुक और उद्वेलित करने वाली राजनीतिक तस्वीर सामने आई है। शिव क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने गिरल लिग्नाइट माइंस के आंदोलनकारी मजदूरों के खून में अपना खून मिलाकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को तीन पन्नों का एक पत्र लिखा है।
यह पत्र उन मजदूरों की व्यथा को बयान करता है जो पिछले 45 दिनों से लगभग 50 डिग्री के तपते रेगिस्तान में धरने पर बैठे हैं। 25 और 26 मई को अमित शाह बीकानेर के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान उन्हें यह खून से लिखा पत्र सौंपा जाएगा।
45 दिन से तपते रेगिस्तान में धरना
विधायक भाटी ने कहा कि बाड़मेर के गिरल गांव में एशिया की सबसे बड़ी ओपन लिग्नाइट माइंस है जिसके मजदूर पिछले 45 दिनों से धरने पर बैठे हैं। लगभग 50 डिग्री के तापमान के बीच ये मजदूर अपनी वाजिब मांगों को लेकर आंदोलित हैं। भाटी खुद भी 20 दिनों से इन मजदूरों के साथ धरने पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि मजदूरों की 23 सूत्री मांगें हैं, जिन्हें प्रशासन के सामने रख दिया गया है। 40 दिनों तक मजदूरों की सुध लेने कोई नहीं आया। जब छत्तीस कौम के लोगों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया तब सबको पता चला कि मजदूर धरने पर बैठे हैं।
जमीन देने वाले मजदूर बन गए
भाटी ने अपने पत्र में लिखा है कि जो लोग प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन दे चुके हैं, वे आज मजदूर बन गए हैं। अब उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि मजदूर 1994 में RSMML को खनन के लिए जमीन दे चुके थे। एक समय में ये मजदूर इन जमीनों के मालिक हुआ करते थे।
पत्र में यह बताया गया है कि मजदूरों को निर्धारित 8 घंटे की बजाय 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी इन मजदूरों की समस्याओं को सुनने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
हाईकोर्ट को भ्रमित करने का आरोप
विधायक भाटी ने यह भी आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के सामने गलत तथ्य रखे गए हैं। कोर्ट को पूरी तरह से भ्रमित किया गया है। सच्चाई को कोर्ट के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया। कई लाइनें ऐसी थीं जो जस्टिफाई नहीं थीं।
भाटी ने कहा कि मजदूरों की ही जमीनें थीं, वह चीजें हाईकोर्ट के सामने नहीं रखी गईं। असत्य को सत्य बताकर कोर्ट के सामने पेश किया गया। उन्होंने कहा कि इसका जवाब आने वाले दिनों में दिया जाएगा।
जाति-धर्म पर मजदूरों को तोड़ने का आरोप
रविंद्र भाटी ने कहा कि छत्तीस कौम के लोग अपनी वाजिब मांगों को लेकर प्रयासरत हैं। सभी मजदूरों ने इकट्ठे होकर अपने खून से गृह मंत्री को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को जाति और धर्म के आधार पर तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
अंग्रेजों की फूट डालो, राज करो वाली नीति को अपनाया जा रहा है। उनकी पीड़ा को सुनने और समझने की जरूरत है। मजदूर अपनी मेहनत से जीवनयापन कर रहे हैं और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
आंदोलन जारी रहेगा
विधायक भाटी ने साफ कर दिया है कि जब तक मजदूरों की वाजिब मांगों को नहीं माना जाता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वार्ताएं हुईं, लेकिन कई बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई। वर्तमान में कोई स्पष्ट परिणाम आगे नहीं आया है। वे हर तरीके से मजदूरों का साथ देने को तैयार हैं।
मजदूरों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय श्रमिक, ड्राइवर और ग्रामीण पिछले 45 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। उनकर प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- मजदूरों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी लागू की जाए।
- स्थानीय व्यक्तियों को नौकरी में प्राथमिकता दी जाए।
- मजदूरों को उचित सैलरी दी जाए।
- धरने पर बैठे मजदूरों का बकाया वेतन दिया जाए।
- बोनस एक्ट 1965 के हिसाब से बोनस दिया जाए।
- मजदूरों के लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था की जाए।
क्या है RSMML और गिरल माइंस?
RSMML राजस्थान सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम है, जो रॉक फॉस्फेट, लिग्नाइट, जिप्सम और लाइमस्टोन का खनन करती है। गिरल लिग्नाइट माइंस बाड़मेर जिले के थुम्बली और गिरल गांव में स्थित है। 1994 में RSMML द्वारा इस खदान की शुरुआत की गई थी। इसे राजस्थान की पहली आधुनिक ओपनकास्ट लिग्नाइट खदान माना जाता है।
यह कंपनी मुख्य रूप से लिग्नाइट का उत्पादन करती है, जो गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट को ईंधन देती है। पहले स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन अब युवाओं को नौकरी से हटा दिया गया है। इसी वजह से किसान और गांव के युवा 9 अप्रैल से गिरल गांव में धरने पर बैठे हैं।
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