राजस्थान में मानसून की विदाई के बाद मौसम कैसे बदलेगा और लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान से मानसून की विदाई अब अंतिम दौर में पहुंच गई है।
- 2 अक्टूबर को प्रदेश में बारिश का कोई बड़ा अलर्ट नहीं है।
- अगले कुछ दिनों तक ज्यादातर इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा।
- जयपुर, जोधपुर और अजमेर में बारिश की संभावना कम।
- दिन का तापमान बढ़ने के साथ गर्मी फिर महसूस होगी।
राजस्थान में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है। पश्चिमी राजस्थान से शुरू हुई मानसून की वापसी अब प्रदेश के बाकी हिस्सों की ओर बढ़ चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे में राजस्थान के बचे हुए हिस्सों से भी मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। इसके बाद प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इसका सीधा असर बारिश की गतिविधियों पर दिखाई देगा। बारिश कम होने के साथ दिन के तापमान में बढ़ोतरी महसूस हो सकती है।
2 अक्टूबर को कैसा रहेगा राजस्थान का मौसम?
2 अक्टूबर को राजस्थान के ज्यादातर हिस्सों में मौसम साफ और शुष्क रहने की संभावना है। मौसम विभाग के जयपुर केंद्र के ताजा अपडेट में प्रदेश के प्रमुख शहरों में किसी बड़े बारिश अलर्ट की स्थिति नहीं बताई गई है। इस दौरान जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, सीकर, पिलानी और फलौदी जैसे इलाकों में भी मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है।
जयपुर में बारिश के आसार कम
राजधानी जयपुर में 2 अक्टूबर को बड़ी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के 2 अक्टूबर के अवलोकन में जयपुर-अमो स्टेशन पर 1 अक्टूबर का अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। 1 अक्टूबर को यहां बारिश दर्ज नहीं हुई। मानसून की विदाई के साथ अब जयपुर में दिन के समय गर्मी बढ़ने और रात में हल्की राहत रहने का दौर देखने को मिल सकता है।
जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान में भी मौसम शुष्क
पश्चिमी राजस्थान में भी बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है। 1 अक्टूबर को जोधपुर का अधिकतम तापमान 36.7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। फलौदी में अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री और न्यूनतम 26.2 डिग्री सेल्सियस रहा। बारिश नहीं होने और मानसून की वापसी के साथ पश्चिमी राजस्थान में दिन का तापमान आगे बढ़ सकता है।
पिलानी में 40 डिग्री के करीब पहुंचा तापमान
राजस्थान में मानसून की विदाई के बीच कुछ इलाकों में गर्मी का असर भी बढ़ने लगा है। 1 अक्टूबर को पिलानी में अधिकतम तापमान 39.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। श्रीगंगानगर में 39.2 डिग्री और बाड़मेर में 38.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। इससे संकेत मिलता है कि बारिश का दौर कमजोर होने के साथ प्रदेश के कुछ हिस्सों में गर्मी फिर बढ़ सकती है।
अजमेर और सीकर में रातें ठंडी
जहां दिन में कई इलाकों में गर्मी बढ़ रही है, वहीं कुछ शहरों में रात के तापमान में हल्की ठंडक बनी हुई है। 1 अक्टूबर को अजमेर का न्यूनतम तापमान 20 डिग्री, सीकर का 18 डिग्री और उदयपुर का 18.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यानी मानसून की विदाई के साथ प्रदेश में मौसम का मिजाज दो तरह का दिखाई दे रहा है, दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंडक।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
अगले कुछ दिनों में राजस्थान में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक मानसून की वापसी पूरी होने के बाद प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क रह सकता है।
हालांकि अक्टूबर में मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं रहता। स्थानीय परिस्थितियों और दूसरे मौसमी सिस्टम के असर से कुछ इलाकों में बदलाव हो सकता है। इसलिए आने वाले दिनों के जिलेवार पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी रहेगा।
मानसून की विदाई के बाद क्या बदलेगा?
मानसून की वापसी के साथ राजस्थान में बारिश का दौर कमजोर होगा। इसके बाद दिन के तापमान में बढ़ोतरी और रात के तापमान में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है। खेती के लिहाज से भी यह समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि खरीफ फसलों की कटाई और रबी सीजन की तैयारी के बीच मौसम का असर किसानों के कामकाज पर पड़ता है।
अभी राजस्थान के लिए क्या तस्वीर है?
फिलहाल राजस्थान में बड़ी बारिश का अलर्ट नहीं है और मानसून की विदाई अंतिम चरण में है। जयपुर समेत ज्यादातर इलाकों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं पिलानी, श्रीगंगानगर और बाड़मेर जैसे कुछ इलाकों में दिन का तापमान 38 से 40 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है। यानी आने वाले दिनों में राजस्थान में बारिश से ज्यादा गर्मी और शुष्क मौसम पर नजर रहेगी।
यह खबर क्यों जरूरी है:
राजस्थान में मानसून की विदाई के साथ मौसम का मिजाज बदलने वाला है। बारिश की गतिविधियां कम होने के बाद कई इलाकों में दिन का तापमान बढ़ सकता है, जबकि कुछ जगहों पर रात में हल्की ठंडक बनी रहेगी। किसानों और आम लोगों के लिए अगले कुछ दिनों का मौसम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसून के बाद खेती और रोजमर्रा की गतिविधियों पर मौसम का सीधा असर पड़ता है।