माउंट आबू में मिला देश का दूसरा सबसे मोटा पेड़, 150 साल है पुराना

Ashish Bhardwaj | Sept 09, 2026, 15:18 IST
माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य
राजस्थान के माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य में 150 साल पुराना सफेदा वृक्ष देश का दूसरा सबसे मोटा पाया गया है। यह देश के सबसे मोटे सफेदा वृक्ष से सिर्फ 15 सेंटीमीटर पीछे है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • माउंट आबू में मिला देश का दूसरा सबसे मोटा सफेदा वृक्ष।
  • 150 साल पुराने पेड़ की वन विशेषज्ञ ने की खोज।
  • आबू का सफेदा राष्ट्रीय रिकॉर्ड से सिर्फ 15 सेमी दूर।
  • वन विभाग करेगा दुर्लभ वृक्ष का संरक्षण।
  • 20 मीटर ऊंचा सफेदा बना राजस्थान की वन विरासत।

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य में ब्रिटिशकाल में लगाया गया करीब 150 साल पुराना सफेदा वृक्ष देश का दूसरा सबसे मोटा सफेदा वृक्ष पाया गया है। इसकी खोज उदयपुर के वन विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने की। यह वृक्ष देश के सबसे मोटे सफेदा वृक्ष से महज 15 सेंटीमीटर पीछे है। अब वन विभाग इसके संरक्षण की तैयारी में जुटा है।



150 साल पुराना, 20 मीटर ऊंचा वृक्ष

डॉ. शर्मा के शोध के अनुसार आबू पर्वत का यह विशाल सफेदा वृक्ष लगभग 150 वर्ष पुराना है और करीब 20 मीटर ऊंचा है। इसकी वक्ष ऊंचाई यानी छाती की ऊंचाई पर परिधि 4.55 मीटर दर्ज की गई है।



यही आंकड़ा इसे देश के विशाल सफेदा वृक्षों में दूसरे स्थान पर पहुंचाता है। खास बात यह है कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड में दर्ज देश के सबसे मोटे सफेदा वृक्ष से आबू का यह वृक्ष महज 15 सेंटीमीटर पीछे है।



जानिए देश का सबसे मोटा सफेदा वृक्ष कहां है

राष्ट्रीय रिकॉर्ड के अनुसार आंध्र प्रदेश के अनामैया जिले की मदनपल्ली रेंज स्थित हॉर्सली हिल पर देश का सबसे मोटा सफेदा वृक्ष दर्ज है। हिल स्टेशन के नाम पर ही इस वृक्ष का नाम हॉर्सली हिल रखा गया है।



वर्ष 1859 में तत्कालीन चित्तूर जिले के कलेक्टर डब्ल्यू. एच. हॉर्सले ने वहां यूकेलिप्टस ग्रैंडिस प्रजाति का पौधा लगाया था। वर्ष 1995 में भारत सरकार ने इस वृक्ष को देश का सबसे बड़ा सफेदा वृक्ष घोषित करते हुए महावृक्ष पुरस्कार प्रदान किया था।



उस समय वृक्ष की आयु करीब 136 वर्ष, ऊंचाई 36 मीटर और वक्ष ऊंचाई पर परिधि 4.38 मीटर दर्ज की गई थी। वर्तमान में इसकी आयु करीब 167 वर्ष, ऊंचाई लगभग 40 मीटर और परिधि 4.70 मीटर बताई गई है।



सिर्फ 15 सेंटीमीटर का रह गया अंतर

आबू के सफेदा वृक्ष की खासियत सिर्फ उसकी मोटाई ही नहीं, बल्कि उसकी संरचना भी है। डॉ. सतीश कुमार शर्मा के अनुसार वृक्ष के तने पर करीब तीन मीटर तक कोई शाखा नहीं है। इसके बाद तना कई शाखाओं में विभाजित हो जाता है।



इतनी उम्र के बावजूद वृक्ष का खड़ा रहना और उसका विशाल आकार आबू पर्वत की अनूठी जलवायु और यहां मौजूद पुराने वृक्षों की विरासत को सामने लाता है।



डॉ. शर्मा ने राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध महावृक्ष रिकॉर्ड से इसके आंकड़ों का मिलान कर इस वृक्ष की अहमियत सामने रखी है। उनके अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि आबू का यह पेड़ केवल राजस्थान का विशालतम सफेदा ही नहीं, बल्कि मोटाई के लिहाज से देश की महत्वपूर्ण वृक्ष विरासतों में शामिल है।



अब लगेगा सूचना पट्ट, संरक्षण की तैयारी

इस महत्वपूर्ण खोज के बाद वन विभाग द्वारा वृक्ष के संरक्षण की दिशा में कदम उठाए जाने की तैयारी है। वृक्ष के पास सूचना पट्ट (साइन बोर्ड) लगाने की योजना है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को राजस्थान की इस दुर्लभ वृक्ष विरासत के बारे में जानकारी मिल सके।



डॉ. शर्मा का कहना है कि ऐसे पुराने और विशाल वृक्ष केवल पेड़ नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र के प्राकृतिक इतिहास के जीवंत दस्तावेज होते हैं। उनका मानना है कि इनका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है।



देश के सबसे मोटे सफेदा वृक्ष और माउंट आबू के इस वृक्ष के बीच अब अंतर महज 15 सेंटीमीटर रह गया है। ऐसे में डॉ. सतीश कुमार शर्मा के इस शोध को राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण वन-विरासत उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है।



ये खबर भी पढे़:-

राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव: जयपुर की 18 निकायों में पहले 3 घंटे में 39 फीसदी से ज्यादा वाेटिंग



निकाय चुनाव को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, नामांकन मामले में 19 याचिकाएं की खारिज



सीएम के घर ही वोट मांगने पहुंचीं कांग्रेस प्रत्याशी, पिता बोले - मैं तो भाजपा का हूं



राजस्थान के 39 जिलों के 162 नगरीय निकायों में कल मतदान, तैयारियां पूरी



Tags:
  • राजस्थान
  • वन विभाग
  • भारत सरकार
  • आंध्र प्रदेश