डांगावास हत्याकांड में 40 आरोपी बरी, 11 साल बाद परिवार बोला- फिर हत्यारे कौन थे?
समझें क्या है पूरा मामला
- नागौर के डांगावास में 14 मई 2015 को जमीन विवाद में 6 लोगों की हत्या हुई थी।
- CBI जांच के बाद 40 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
- 11 साल बाद कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी को बरी कर दिया।
- पीड़ित परिवार ने सवाल उठाया कि फिर हत्या किसने की।
- परिवार अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा।
नागौर के बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड में 11 साल बाद अदालत का फैसला आया। मेड़ता की एससी-एसटी कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने सवाल उठाया कि जब सभी आरोपी बरी हो गए, तो आखिर 6 लोगों की हत्या किसने की थी? पीड़ित पक्ष ने इसके खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही है। वहीं, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सियासत शुरू कर दी है।
कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा
न्यायाधीश आशीष बिजराणियां ने विधि सम्मत सबूत के अभाव में सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि 14 मई 2015 को हुई घटना में 5 लोगों की मौत होना एक सिद्ध तथ्य है।
कोर्ट ने कहा कि बरी होने का मतलब यह नहीं कि अपराध हुआ ही नहीं। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि दोषी व्यक्ति साक्ष्यों से साबित नहीं हो सके।
पीड़ितों को मुआवजे के आदेश
कोर्ट ने पीड़ित परिवारों और मृतकों के आश्रितों को राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा दिलाने के आदेश दिए हैं। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को जरूरी कार्रवाई करने को कहा गया है। हर आरोपी से अपील अवधि तक के लिए 50 हजार रुपए का व्यक्तिगत बंधपत्र और 50 हजार रुपए की प्रतिभूति भी ली गई।
बचाव पक्ष के वकील का क्या तर्क
आरोपी पक्ष के वकील महेंद्र चौधरी ने बताया कि सीबीआई जांच में कई खामियां थीं। उनके मुताबिक विवादित जमीन असल में परिवादी पक्ष की थी ही नहीं।वकील ने बताया कि जमीन घीसाराम नाम के व्यक्ति को बेची गई थी। बाद में यह जमीन जिमनाराम को मिली, लेकिन नाम पर म्यूटेशन दर्ज नहीं हो सका। इसी वजह से विवाद बढ़ा था।
परिवार अब करेगा हाई कोर्ट का रुख
मृतक के रिश्तेदार गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि कोर्ट का फैसला सर्वमान्य है, लेकिन उनका कहना है कि कोर्ट को पूरी जानकारी नहीं मिल पाई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सभी 40 आरोपी बरी हो गए तो 6 लोगों की हत्या आखिर किसने की थी। परिवार ने अब हाई कोर्ट जाने का फैसला लिया है।
गहलोत ने राजस्थान सरकार को घेरने की कोशिश की
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस फैसले पर बात की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि 11 साल बाद आया यह फैसला चिंताजनक है। गहलोत ने इस मामले में जांच और अभियोजन पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि भाजपा सरकार के शासन में 11 साल पहले ऐसी घटना होना और अब उन्हीं के शासन में प्रतिकूल फैसला आना दिखाता है कि भाजपा न्याय के पक्ष में नहीं है। दलित समाज के साथ हुए इस अन्याय में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
क्या था ये पूरा विवाद
यह पूरा मामला 3.77 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। यह विवाद करीब 40 से 50 साल पुराना बताया जाता है। 14 मई 2015 को पंचायत के बाद बड़ी संख्या में लोग विवादित जमीन पर पहुंचे थे। आरोप है कि भीड़ ने घर और झोपड़ियों पर हमला किया। इसी दौरान मारपीट में 6 लोगों की मौत हो गई थी।
जांच से लेकर फैसले तक का सफर
घटना के बाद शुरुआत में पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बाद में जांच सीआईडी को सौंपी गई। पीड़ित परिवार की मांग पर मामला सीबीआई को दिया गया। 2019 में हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद 40 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब 11 साल बाद यह फैसला आया है।
FAQ
- नागौर का डांगावास हत्याकांड कब हुआ था?
यह घटना 14 मई 2015 को हुई थी। जमीन विवाद के चलते 6 लोगों की हत्या हुई थी। - मेड़ता की एससी-एसटी कोर्ट ने कितने आरोपियों को बरी किया?
कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। यह फैसला 11 साल बाद आया है। - पीड़ित परिवार अब क्या करेगा?
पीड़ित परिवार इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा। परिवार ने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला।
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