मूंडवा नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव: RLP ने बनाया बोर्ड, भाजपा की गीता को एक भी वोट नहीं
समझें क्या है पूरा मामला
- नागौर के मूंडवा में आरएलपीने मारी बाजी।
- कांग्रेस के 3 पार्षदों के साथ मिलकर बनाया बोर्ड।
- अलका कंदोई दूसरी बार चेयरमैन बनीं।
- भाजपा प्रत्याशी गीता को एक भी वोट नहीं।
- मूंडवा में 25 वार्ड में से भाजपा 10, RLP 7, निर्दलीय 5, कांग्रेस 3 थे।
मूंडवा नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। RLP की अलका कंदोई लगातार दूसरी बार पालिकाध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं।
चुनाव में अलका कंदोई को 13 वोट मिले, जबकि भाजपा से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरे घनश्याम सदावत को 12 मत प्राप्त हुए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी गीता का खाता भी नहीं खुला। गीता को एक भी वोट नहीं मिला, यहां तक कि खुद का वोट भी नहीं मिला।
भाजपा के 10 पार्षद फिर भी हारी
मूंडवा नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं और अध्यक्ष बनने के लिए 13 वोट चाहिए थे, दरअसल 25 में बहुमत 13 होता है, लेकिन पार्षद चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। भाजपा के 10 पार्षद निर्वाचित हुए, जबकि उसके समर्थित 4 निर्दलीय भी जीतकर आए।
इस लिहाज से भाजपा समर्थित खेमे के पास कुल 14 पार्षद थे, जो बहुमत के 13 से ज्यादा थे। इसके बावजूद अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी गीता को 0 वोट मिला।
टिकट बंटवारे में नाराजगी पड़ी भारी
अध्यक्ष पद के लिए टिकट वितरण के दौरान भाजपा ने घनश्याम सदावत और रमाकांत शर्मा जैसे वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करते हुए पहली बार पार्षद चुनी गईं गीता को प्रत्याशी बनाया। टिकट नहीं मिलने के बाद घनश्याम सदावत ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।
वहीं दूसरी ओर RLP के 7 और कांग्रेस के 3 पार्षद जीतकर आए थे। भाजपा के एक बागी पार्षद का समर्थन भी RLP-कांग्रेस खेमे को मिला, इस तरह इस गठबंधन के पास 11 नहीं बल्कि 13 वोट हो गए और RLP ने बोर्ड बना लिया।
मूंडवा नगर पालिका चुनाव परिणाम 2026 में पार्टीवार स्थिति ऐसी रही: भाजपा 10 सीट, RLP 7, निर्दलीय 5, कांग्रेस 3। 14 सितंबर को मतगणना हुई थी, मतदान 9 और 11 सितंबर को हुआ था।
नागौर जिले में RLP का प्रभाव है। बेनीवाल की पार्टी ने मूंडवा और बासनी में बोर्ड में भागीदारी की संभावना पहले ही जताई थी। नागौर नगर परिषद में भी कांग्रेस 27 सीट के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन वहां भी निर्दलीय किंगमेकर हैं।
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