तोप की तलाश में दो राज्यों के छूटे पसीने, जेसीबी को मिली सिर्फ मिट्टी की ढेरियां

Jageshwar prasad | Jul 24, 2026, 16:14 IST
नरवर किले से 400 साल पुरानी तोप चोरी, राजस्थान में तलाश जारी
मध्य प्रदेश के नरवर किले से चोरी हुई तोप की राजस्थान में तलाश हो रही है। इस मुहिम में दो राज्यों की पुलिस जुटी है, लेकिन चार-पांच दिन में ही उसके पसीने छूट आए हैं। गांव वालों के विरोध के बाद सर्च अभियान फिलहाल रोक दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश के नरवर किले से 15 जुलाई को चोरी हुई 400 साल पुरानी तोप।
  • मध्य प्रदेश पुलिस को शक कि यह तोप चोरी करके राजस्थान लाई गई।
  • राजस्थान में करौली जिले के गांवडा गांव में चार-पांच दिन से चल रहा सर्च अभियान।
  • राजस्थान और मध्यप्रदेश पुलिस के तोप तलाशी अभियान में छूट रहे पसीने।
  • दोनों राज्यों की पुलिस को तीन दिन में नहीं मिला सुराग, जेसीबी से हो रही खुदाई।

ओम प्रकाश सुमन @ हिंडौनसिटी



मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले से 15 जुलाई को चोरी हुई 400 साल पुरानी तोप की तलाश में दो राज्यों की पुलिस दिन-रात एक कर रही है। हालांकि, अब तक तलाश में सिर्फ मिट्टी की ढेरियां मिली हैं। पुलिस को सुराग का एक तिनका भी हाथ नहीं लगा है।



शिवपुरी जिले में नरवर किले में रखी यह तोप 15-16 जुलाई की रात गायब हो गई। मध्यप्रदेश पुलिस को सूचना है कि 3.5 टन वजन की यह तोप राजस्थान में करौली जिले के गांवडा मीणा गांव में लाई गई है।



दोनों राज्यों की पुलिस की खोजबीन चार-पांच दिन से करौली जिले में हिण्डौन के पास गांवडा मीणा गांव पर टिकी है। नरवर किले से 250 किलोमीटर दूर इस गांव तक तोप को ढोकर लाने में करीब 6 से 7 घंटे का लंबा सफर करना पड़ा होगा।



तोप की तलाश में जेसीबी से खुदाई

बुधवार से गांवड़ा मीणा गांव में पुलिस 3.5 टन की तोप की तलाश के लिए कई जगहों पर जेसीबी से खुदाई करा चुकी है। लेकिन खुदाई में पुलिस को अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।



जमीन के नीचे छिपी धातु का पता लगाने भरतपुर से पुरातत्व विभाग की टीम को बुलाया गया है। यह टीम विशेष मेटल डिटेक्टर से लैस है। इसके साथ ही राजस्थान पुलिस का खोजी दल भी जुटा हुआ है। मध्य प्रदेश पुलिस भी अपने स्तर पर मुखबिरों के माध्यम से तोप का पता लगाने के प्रयास कर रही में है।



3.5 टन की तोप की खोज में दो राज्यों की पुलिस जुटी, करौली के गांव में जेसीबी से खुदाई


सर्च अभियान में 50 से अधिक पुलिसकर्मी

हिण्डौन सदर थाने के एसएचओ गिरिराज प्रसाद का कहना है कि मध्यप्रदेश की शिवपुरी पुलिस ने यहां आकर जानकारी दी कि, चोरी हुई तोप को संभावित तौर पर गांवड़ा मीना इलाके में लाया गया है।



थानेदार के अनुसार पुलिस और प्रशासन की ओर से गांवडा मीणा गांव में कई संभावित जगहों पर खुदाई कराई। सुरक्षा के लिए गांव में भारी बल तैनात है। 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी इस सर्च ऑपरेशन में जुटे हैं।



उन्होंने बताया कि जहां भी मिट्टी ताज़ा खोदी हुई लग रही है, उस हर जगह की छानबीन की जा रही है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय तस्करों के संगठित गिरोह तक पहुंचने से पहले इस धरोहर को हर हाल में बरामद करना चाहते हैं।



3.5 टन की तोप की खोज में दो राज्यों की पुलिस जुटी, करौली के गांव में जेसीबी से खुदाई


3,000 फीट ऊंचे किले से कैसे हुई इतनी बड़ी चोरी?

​उधर, मध्य प्रदेश इस बात से हैरान है कि 3,000 फीट ऊंची पहाड़ी पर बने किले से इतनी भारी-भरकम तोप आखिर कैसे चुरा ली गई।



16वीं शताब्दी की यह तोप बेहद दुर्लभ तोपखाना कला का नमूना मानी जाती है। करीब साढ़े तीन टन की यह तोप किले के खुली कचहरी परिसर में रखी हुई थी।



पुलिस का कहना है कि पहले यह संदेह था कि इस तोप को उन लोगों ने उड़ाया है, जो इसमें सोना छिपा हुआ मान रहे थे। लेकिन, बाद में यह माना गया कि इसे पुरातत्व महत्व की वस्तु मान कर चुराया गया।



​कागजों पर तो किले की सुरक्षा के लिए 6 गार्ड तैनात हैं। इनमें चार गार्ड दिन में तैनात रहते हैं, जबकि दो रात में पहरा देते हैं, लेकिन चोरी वाली रात दोनों गार्ड नदारद थे।



गंभीर बात यह है कि इन गार्डों के पास टॉर्च, लाइट या बुनियादी सुरक्षा उपकरणों तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में ऐतिहासिक धरोहर की रखवाली सिर्फ औपचारिकता रही है।



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मौके पर घसीटे जाने के निशान मिले

मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग और पुलिस के निरीक्षण में मौके से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप, घसीटे जाने के निशान और गाड़ियों के टायर के निशान मिले हैं।



​अनुमान है कि चोरों ने तोप को नुकसान से बचाने और उसकी आवाज़ दबाने के लिए उसे रजाई-गद्दों में लपेटा। फिर बियरिंग वाली लोहे की ट्रॉली के सहारे पहाड़ी के पिछले रास्ते से नीचे उतारा, जहां नीचे एक ट्रांसपोर्ट वाहन उनका इंतजार कर रहा था।



ताज्जुब की बात यह है कि पहाड़ी के नीचे शहर है, लेकिन किसी को 35 क्विंटल की इस तोप के गायब होने की भनक तक नहीं लगी।



​धरोहरों की चोरी का गढ़ रहा मध्य प्रदेश?

नरवर किले की तोप चोरी मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक विरासतों की चोरी की लंबी श्रृंखला का नया मामला है।



भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के आंकड़े बताते हैं कि देश में संरक्षित स्मारकों से मूर्तियों और प्राचीन वस्तुओं की चोरी के मामलों में मध्य प्रदेश शीर्ष पर रहा है।



हालांकि कुछ चीजें बरामद कर ली गईं। लेकिन कई आज भी लापता हैं और आशंका है कि उन्हें काले बाजारों में बेच दिया गया।



उत्तरी मध्य प्रदेश के ग्वालियर, मुरैना और गुना जिलों में ऐसी चोरियां सबसे ज्यादा हुई हैं। मोहम्मद गौस के मकबरे से पीतल के कलश और मानसिंह पैलेस से नक्काशीदार जाली चोरी हो गए।



जैन तीर्थंकरों की खंडित सिर-मूर्तियां और मुरैना के शिव मंदिर से प्राचीन नक्काशी को नुकसान पहुंचाया गया। बुरहानपुर के असीरगढ़ किले से 1978 में चोरी शिवलिंग आज तक नहीं मिला।



​गांवड़ा मीणा में बढ़ रहा तनाव...

राजस्थान में ​करीब 2,500 की आबादी वाला गांवड़ा मीणा गांव मुख्य रूप से मीणा समुदाय का है। गांव वाले इस बात से बेहद नाराज हैं कि बिना किसी सबूत के उनके गांव को चोरों की पनाहगाह बनाकर बदनाम किया जा रहा है।



बढ़ते आक्रोश के बाद पुलिस को गुरुवार दोपहर में ही खुदाई का काम रोकना पड़ा। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब आसपास के गांवों के मुखबिरों की मदद ली जा रही है।



मध्यप्रदेश के नरवर किले से 400 साल पुरानी 3.5 टन की तोप चोरी, राजस्थान में तलाश जारी, गांव वालों में


इधर गांवड़ा मीणा गांव में ​गुरुवार को अठ्ठाईसा क्षेत्र के सर्व समाज के ग्रामीणों की एक महापंचायत हुई, इसके बाद से लगातार करौली के पूर्व विधायक लाखन सिंह मीणा के नेतृत्व में मौके पर मौके पर ही धरना दिया जा रहा है।



ग्रामीणों के मुताबिक गुस्सा इस बात का है कि उन्हें बेवजह घसीटा जा रहा है। अब तक न तो कोई गिरफ्तारी हुई है और न ही कोई सुराग मिला है। उधर, ग्रामीणों ने इसकी शिकायत डीजीपी से की है।



​फिलहाल, पुलिस अतिरिक्त बल के साथ सर्च ऑपरेशन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। पुलिस इस उम्मीद में है कि यह ऐतिहासिक तोप आखिरकार मिल ही जाएगी।



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