500 करोड़ की नवअंश चिटफंड ठगी में ईडी की एंट्री, पीड़ितों को समन

Jageshwar prasad | Jul 06, 2026, 19:15 IST
500 करोड़ चिटफंड घोटाला: ED ने शुरू की जांच, पीड़ित निवेशकों को भेजे समन
राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले से जुड़ी नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के 500 करोड़ रुपए के चिटफंड घोटाले में ED ने जांच शुरू कर दी है। ED ने पीड़ित निवेशकों से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • खैरथल-तिजारा में 500 करोड़ की चिटफंड के नाम पर ठगी, ED ने शुरू की जांच।
  • 15 साल तक भरोसा जीता, फिर निवेशकों के करोड़ों लेकर फरार।
  • 24% ब्याज का लालच, गरीबों-महिलाओं की जीवनभर की बचत डूबी।
  • 9 आरोपी गिरफ्तार, 2 फरार, ED मनी ट्रेल की जांच करेगी।
  • एजेंट की मौत के बाद खुला घोटाला, ED की एंट्री से पीड़ितों में उम्मीद।

सुनील जैन @ अलवर



खैरथल-तिजारा जिले के मातौर गांव से जुड़े बहुचर्चित नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के करीब 500 करोड़ रुपए के कथित चिटफंड घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशलाय (ईडी) ने भी जांच शुरू कर दी है।



ईडी के जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने कई पीड़ित निवेशकों को समन जारी कर बैंक खातों, एफआईआर, निवेश संबंधी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तलब किए हैं। ईडी की एंट्री से हजारों पीड़ित निवेशकों में अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की उम्मीद जगी है।



ईडी ने परिवादी सत्यवीर चौधरी, राजकुमार, धर्मेंद्र चौधरी सहित अन्य पीड़ितों से पैन कार्ड, आधार कार्ड, पहचान व पते के प्रमाण, नवअंश ग्रुप के खिलाफ दर्ज शिकायतों और एफआईआर की प्रतियां मांगीं हैं।



इसके साथ स्वयं व परिवार के बैंक खातों का विवरण तथा कंपनी और उसके एजेंटों के माध्यम से खुलवाए गए एफडी, बचत व ऋण खातों की भी पूरी जानकारी मांगी है। माना जा रहा है कि एजेंसी अब पूरे मामले में मनी ट्रेल, निवेशकों के पैसे के प्रवाह और कथित वित्तीय अनियमितताओं की गहराई से जांच करेगी।



15 साल तक भरोसा, फिर करोड़ों लेकर फरार

मामले के अनुसार वर्ष 2010 में मातौर निवासी दाताराम चौधरी और उसके भांजे नरेश चौधरी ने नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के नाम से फाइनेंस कंपनी शुरू की। कंपनी ने खैरथल, मुंडावर, टपूकड़ा, पहल, ततारपुर सहित राजस्थान और हरियाणा के कई इलाकों में एजेंटों का नेटवर्क खड़ा किया।



लोगों को मासिक 2 प्रतिशत (24 प्रतिशत वार्षिक) ब्याज और आसान ऋण का लालच देकर बचत, एफडी और आरडी योजनाओं में निवेश कराया गया।



शुरुआती वर्षों में समय पर भुगतान कर लोगों का भरोसा जीता गया। इसके बाद हजारों निवेशकों ने लाखों रुपए जमा करा दिए। आरोप है कि करीब 15 साल बाद संचालक करोड़ों रुपए लेकर फरार हो गए।



करीब 5 हजार निवेशक, गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार कंपनी से करीब 5 हजार लोग जुड़े थे, जिनमें अधिकांश गरीब परिवार और महिलाएं थीं। किसी ने बेटी की शादी, किसी ने बच्चों की पढ़ाई तो किसी ने बुजुर्गावस्था के सहारे के लिए अपनी जीवनभर की बचत जमा कराई थी। कंपनी बंद होने के बाद हजारों परिवार आर्थिक संकट में आ गए।



पुलिस कर चुकी है 9 आरोपियों को गिरफ्तार

29 सितंबर 2025 को खैरथल थाने में दर्ज मुकदमे के बाद पुलिस ने जांच में 10 लोगों को आरोपी बनाया। इनमें एजेंट दिनेश कुमार की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।



फिलहाल उमराव, दाताराम, सतपाल और पुरण न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि जयपाल, नरेश, जिलेसिंह, वेंकटेश्वर प्रसाद और प्रेम कुमार जमानत पर बाहर हैं। मामले की पैरवी पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रताप सैन कर रहे हैं।



सक्षम प्राधिकारी की कार्यशैली पर सवाल

पीड़ितों का आरोप है कि 11 फरवरी 2026 को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त होने के बावजूद दावों के निस्तारण की प्रक्रिया बेहद धीमी रही। कई लोगों के आवेदन स्वीकार नहीं किए गए और सुनवाई भी समय पर नहीं हुई। उनका कहना है कि महीनों से कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं।



संपत्तियां कुर्क कर निवेशकों को भुगतान की मांग

ग्रामीणों ने आरोपियों की चल-अचल संपत्तियां तत्काल कुर्क कर नीलाम करने तथा बड्स (BUDS) एक्ट-2019 के तहत निवेशकों को भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि संपत्तियों की बिक्री के बिना पीड़ितों को उनकी जमा राशि वापस मिलना मुश्किल है।



एजेंट की मौत के बाद खुला पूरा मामला

11 सितंबर 2025 को कंपनी के एजेंट दिनेश कुमार का शव खैरथल रेलवे अंडरपास के पास मिला था। परिजनों ने करोड़ों रुपए डूबने के दबाव में आत्महत्या का आरोप लगाया। इसके कुछ दिन पहले ही नरेश चौधरी गायब हो गया था और बाद में दाताराम भी फरार हो गया।



इसके बाद हजारों निवेशकों का गुस्सा फूट पड़ा और पूरे घोटाले का खुलासा हुआ। अब ईडी की जांच शुरू होने के बाद पूरे मामले में धन के प्रवाह, निवेश और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच तेज होने की संभावना है। हजारों पीड़ितों की निगाहें अब ईडी की कार्रवाई पर टिकी हैं ।



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