NEET 2026 पर पेपर लीक का साया; 140 प्रश्न हू-ब-हू मिलने से हड़कंप
News In Short
- NEET 2026 परीक्षा के पेपर लीक होने की आशंका।
- SOG ने राजस्थान और उत्तराखंड से 13 लोगों को पकड़ा।
- जांच में एक गेस पेपर से 140 प्रश्न हू-ब-हू मेल खाते मिले।
- IB के इनपुट के बाद राजस्थान SOG ने कार्रवाई शुरू की थी।
- सीकर के करियर काउंसलर सहित 13 संदिग्ध हिरासत में।
News In Detail
Sikar: क्या इस बार भी नीट परीक्षा 'क्लीन' नहीं रही? यह सवाल 3 मई को परीक्षा देकर निकले लाखों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को कचोट रहा है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने पिछले चार दिनों में एक बड़े ऑपरेशन के तहत देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट पर हुई इस कार्रवाई ने साल 2024 के नीट विवाद की कड़वी यादें ताजा कर दी हैं।
जांच के दो मुख्य छोर: करियर काउंसलर और गेस पेपर
SOG की जांच फिलहाल दो प्रमुख बिंदुओं पर टिकी है:
सीकर कनेक्शन: सीकर के एक नामी करियर काउंसलर के पास परीक्षा से पहले ही पेपर के अधिकांश प्रश्न पहुंच गए थे, जो उसने कुछ चुनिंदा छात्रों को दिए।
300 प्रश्नों का गैस पेपर: जांच एजेंसी को एक ऐसा गैस पेपर मिला है जिसमें 300 से अधिक प्रश्न थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 140 प्रश्न मुख्य परीक्षा के पेपर से हू-ब-हू मेल खाते हैं। अब एक्सपर्ट्स और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सलाह के बाद यह तय होगा कि इसे तकनीकी रूप से पेपर लीक की श्रेणी में रखा जाए या नहीं।
साजिश का अहम चेहरा
देहरादून से पकड़े गए संदिग्धों में सीकर का राकेश मंडावरिया मुख्य कड़ी माना जा रहा है। राकेश का सीकर के पीपराली रोड (कोचिंग हब) पर एक कंसल्टेंसी ऑफिस है। उसकी निशानदेही पर शनिवार रात देहरादून से 4 और संदिग्धों को उठाया गया। इन सभी को जयपुर लाकर गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है।
कड़े सुरक्षा इंतजामों में मानवीय सेंध
जांच एजेंसियों और एनटीए के लिए यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है। इस बार NEET की सुरक्षा के लिए कई हाई-टेक इंतजाम किए गए थे:
परिवहन: प्रश्नपत्रों को ले जाने के लिए पुलिस सुरक्षा के साथ ही GPS-लगे वाहनों का उपयोग किया गया था।
निगरानी: केंद्रों पर AI कैमरे लगाए गए थे, जिनकी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सेंट्रल कंट्रोल रूम से हो रही थी।
तकनीकी रोक: परीक्षा हॉल में मोबाइल सिग्नल और ब्लूटूथ को पूरी तरह ठप करने के लिए 5G जैमर लगाए गए थे।
वॉटरमार्क: हर प्रश्नपत्र पर यूनिक वॉटरमार्क ID लगी थी, ताकि लीक होने पर तुरंत केंद्र और समय का पता चल सके।
बायोमेट्रिक: प्रत्येक छात्र का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया गया था। साथ ही, 2-3 मई को रेजिडेंट डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं ताकि वे सॉल्वर बनकर न बैठ सकें।
सोशल मीडिया: परीक्षा से पहले फर्जी पेपर बेचने वाले 65 टेलीग्राम चैनलों को ब्लॉक किया गया था।
इन सबके बावजूद यदि पेपर लीक हुआ है, तो यह सिस्टम की मानवीय खामी की ओर इशारा करता है। आशंका जताई जा रही है कि प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन या कस्टडी के स्तर पर मिलीभगत से पेपर लीक हुआ होगा।
क्या फिर रद्द होगी परीक्षा?
साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि पेपर लीक कुछ सीमित केंद्रों तक ही था, इसलिए पूरी परीक्षा रद्द नहीं की गई थी। इस बार 22 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए हैं। यदि SOG की जांच में यह साबित होता है कि लीक का दायरा बड़ा है, तो एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल, SOG की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
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