राजस्थान में दो नवंबर से लागू होंगे लैंड कन्वर्जन के नए नियम, जानें कितने वर्ग मीटर तक घर बनाने पर नहीं लगेगी फीस
लैंड यूज चेंज की प्रक्रिया के लिए अब विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राजस्थान सरकार ने कृषि भूमि का भू-रूपांतरण (Land Conversion) के लिए नए नियम बनाए हैं। नए नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में लैंड कन्वर्जन के लिए ऑफलाइन की जगह ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के तुरंत बाद लैंड यूज चेंज की परमिशन जारी हो जाएगी।
आवेदन के बाद 30 दिन में लैंड यूज कन्वर्जन करना होगा। अन्यथा आवेदन को ऑटोमेटिक लैंड यूज चेंज माना जाएगा। ये नियम दो नवंबर से प्रदेश में लागू होंगे। निकाय, यूआईटी, पालिका और डेवलपमेंट अथॉरिटी के क्षेत्राधिकार में ये नियम लागू नहीं होंगे।
राजस्थान में लैंड यूज कन्वर्जन की गलत जानकारी पर जुर्माना
आवेदक द्वारा गलत जानकारी देने पर अनुमति रद्द कर दी जाएगी। साथ ही प्रीमियम का दो गुना जुर्माना लगेगा। बिना अनुमति उपयोग पाए जाने पर चार गुना जुर्माना लगेगा। इस आदेश के खिलाफ आवेदक 30 दिन में कलेक्टर के यहां ऑनलाइन अपील कर सकता है।
लैंड कन्वर्जन में किन्हें मिलेगी छूट?
500 वर्ग मीटर तक की जमीन पर निवास, मवेशी शेड या स्टोर हाउस निर्माण करने पर अब कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसके अलावा कुछ अन्य श्रेणियों को भी छूट मिलेगी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) की व्हाइट या ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को छूट रहेगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति द्वारा अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपयोग की जाने वाली जमीन पर भी शुल्क नहीं लगेगा।
स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और चैरिटेबल ट्रस्टों द्वारा संचालित अस्पताल या स्कूलों को भी छूट रहेगी। इससे इन संस्थानों को राहत मिलेगी। यह कदम सराहनीय माना जा रहा है।
भूमि रूपांतरण का एक महीने में होगा निस्तारण
अभी तक भूमि रूपांतरण आदेश जारी होने के बाद म्यूटेशन के लिए राजस्व अधिकारियों और पटवारी के पास अलग से प्रक्रिया करनी पड़ती थी। नियमों में सरलीकरण के बाद आवेदन के 30 दिन में राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन दर्ज होकर लैंड यूज चेंज किया जाएगा।
लैंड यूज चेंज होने के बाद ले-आउट और नक्शा पास कराने के लिए निकायों और विभागों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र और इंटीग्रेटेड टाउनशिप के ले-आउट और बिल्डिंग प्लान को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी कमेटी मंजूरी देगी।
कॉलोनी के लिए क्या नियम?
आवासीय कॉलोनियों में 40 प्रतिशत जमीन सार्वजनिक सुविधाओं और सड़कों के लिए रखनी होगी। 60 प्रतिशत आवासीय और 5 प्रतिशत व्यावसायिक या संस्थाओं के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य किया गया है। इससे व्यवस्थित विकास होगा।
लैंड कन्वर्जन की दरें
कृषि से आवासीय, सार्वजनिक उपयोग और औद्योगिक के लिए डीएलसी दर का 5 प्रतिशत शुल्क होगा। कृषि से व्यावसायिक, संस्थागत और टाउनशिप के लिए डीएलसी दर का 10 प्रतिशत शुल्क होगा।
खाद्य प्रसंस्करण इकाई के लिए डीएलसी दर का 2.5 प्रतिशत शुल्क होगा। अक्षय ऊर्जा और नमक निर्माण यूनिट के लिए डीएलसी दर का 0.5 प्रतिशत शुल्क होगा। इन दरों से आवेदकों को स्पष्टता मिलेगी।
लैंड कन्वर्जन की ऑनलाइन पोर्टल से होगी प्रक्रिया
ग्रामीण इलाकों में अभी तक लैंड कन्वर्जन की पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन होती है। अधिकारियों द्वारा फाइल की स्वीकृति के बाद आदेश जारी किए जाते थे। अब नई व्यवस्था के अनुसार पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के जरिए करना होगा।
कृषि भूमि (Agricultural Land) के लिए अलग-अलग कैटेगरी में निर्धारित प्रीमियम और फीस चुकाकर फॉर्म-ए सबमिट करना होगा। इसके बाद अनुमति आदेश मिल जाएंगे। आगे की प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन ही फाइल संबंधित विभाग के पास चली जाएगी। इससे समय और पैसे की बचत होगी।
लैंड कन्वर्जन में क्यों अहम है यह बदलाव?
यह बदलाव आम लोगों के लिए बड़ी राहत है। अब उन्हें विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। साथ ही समय पर काम होगा।
गलत जानकारी पर सख्त जुर्माना लगेगा। इससे दुरुपयोग रुकेगा। किसानों और छोटे निर्माण करने वालों को छूट मिलेगी। अब देखना जरूरी है कि यह व्यवस्था कैसे लागू होती है।