रिनोवेशन की आड़ में अवाप्त जमीन पर खड़ी कर दी बिल्डिंग; 44 साल पुराना आवास बताकर कोर्ट को किया गुमराह

Jageshwar prasad | May 05, 2026, 09:51 IST
Photograph: (the sootr)
जयपुर के लालकोठी में 1981 में अवाप्त सरकारी जमीन पर रिनोवेशन के बहाने अवैध बिल्डिंग खड़ी कर ली गई। गूगल इमेज से खुलासा हुआ कि 2025 तक जमीन खाली थी, जबकि कोर्ट में 1982 से मकान होने का झूठा दावा किया गया था।

News In Short

  • लालकोठी में रिनोवेशन की आड़ में अवैध रूप से नई बिल्डिंग बनाने का मामला उजागर हुआ।
  • निर्माणकर्ता ने कोर्ट में 44 साल पुराने मकान का झूठा दावा किया, जबकि 2025 तक जमीन खाली थी।
  • गूगल सैटेलाइट इमेजरी ने एक साल के भीतर हुए इस अवैध निर्माण की तकनीकी पुष्टि कर दी है।
  • जेडीए ने जमीन पर कब्जे के बजाय महज अवैध निर्माण का नोटिस देकर औपचारिकता पूरी की।
  • 1981 में अवाप्त इस विवादित भूमि पर गृह निर्माण समितियों और जेडीए के बीच पुराना वाद चल रहा है।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान की राजधानी के लालकोठी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जेडीए (JDA) की सतर्कता और भू-माफियाओं के दुस्साहस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खसरा नंबर 228 की अवाप्तशुदा जमीन पर एक निर्माणकर्ता ने न केवल अवैध रूप से बहुमंजिला इमारत खड़ी कर ली, बल्कि इसके लिए माननीय उच्च न्यायालय को भी गुमराह कर रिनोवेशन की अनुमति प्राप्त कर ली।



कोर्ट में झूठा दावा

मामले के अनुसार, निर्माणकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि संबंधित भूखंड पर वर्ष 1982 से उसका आवास बना हुआ है और वह केवल पुराने ढांचे की मरम्मत (रिनोवेशन) करना चाहता है। कोर्ट ने इस दलील के आधार पर रिनोवेशन की अनुमति दे दी। हालांकि, तकनीक ने इस झूठ को बेनकाब कर दिया।



गूगल अर्थ की 9 फरवरी 2025 की सैटेलाइट इमेज स्पष्ट रूप से दिखाती है कि उस समय तक वहां जमीन पूरी तरह खाली थी। महज एक साल के भीतर, 4 मई 2026 की इमेज में वहां एक नया लोहे का स्ट्रक्चर और बिल्डिंग नजर आने लगी है, जो साबित करता है कि रिनोवेशन के नाम पर नया निर्माण किया गया है।



अवाप्ति और विवाद का इतिहास

विवादित जमीन ग्राम भोजपुरा के खसरा नंबर 228 का हिस्सा है, जिसे राज्य सरकार ने वर्ष 1981 में ही अवाप्त कर लिया था। अवाप्ति के बावजूद, मीना कॉलोनी गृह निर्माण सहकारी समिति ने नियमों को ताक पर रखकर इस जमीन को बेच दिया और वहां देव विहार नामक अवैध कॉलोनी सृजित कर दी। जेडीए रिकॉर्ड के अनुसार, 1996 में भी यहां से अतिक्रमण हटाया गया था और केस दर्ज किया गया था, लेकिन भू-माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हुए।



जेडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल

हैरानी की बात यह है कि जेडीए प्रवर्तन शाखा ने इस मामले में अतिक्रमण की सख्त धारा 72 के तहत कार्रवाई करने के बजाय, इसे केवल अवैध निर्माण मानकर धारा 32 और 33 के तहत नोटिस जारी किए। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जेडीए ने सरकारी जमीन पर कब्जे को नजरअंदाज कर निर्माणकर्ता को अप्रत्यक्ष रूप से राहत देने की कोशिश की है। फिलहाल, जेडीए के डीआईजी आनंद शर्मा ने आश्वासन दिया है कि कोर्ट के आदेशों का अध्ययन कर सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।



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