JJM घोटाला: पूर्व मंत्री महेश जोशी के घर सुबह 5 बजे ACB की दबिश, हुए गिरफ्तार
News In Short
- एसीबी ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को जयपुर स्थित आवास से तड़के 5 बजे किया गिरफ्तार।
- JJM घोटाले में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर 900 करोड़ के अवैध टेंडर जारी करने का आरोप।
- मामले में पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल सहित अब तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है
- महेश जोशी पिछले साल मनी लॉन्ड्रिंग केस में 7 महीने जेल में बिता चुके हैं और फिलहाल जमानत पर थे।
- एसीबी की FIR में जोशी के साथ विभाग के 21 अन्य उच्चाधिकारियों को भी भ्रष्टाचार का आरोपी बनाया गया।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना में हुए करीब 900 करोड़ रुपए के घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने आज बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को जयपुर स्थित उनके सैन कॉलोनी आवास से तड़के सुबह गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई जल जीवन मिशन में टेंडर प्रक्रिया के दौरान हुए भारी भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोपों के तहत की गई है।
तड़के 5 बजे की घेराबंदी
DIG डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में एसीबी की एसआईटी टीम गुरुवार सुबह करीब 5 बजे जयपुर रेलवे स्टेशन के पास पावर हाउस रोड स्थित महेश जोशी के आवास पर पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया। जोशी को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए एसीबी मुख्यालय ले जाया गया, जहां आधिकारिक रूप से उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की गई।
घोटाले की जड़
यह पूरा मामला 2021 में शुरू हुआ, जब श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर पीएचईडी (PHED) विभाग से करोड़ों रुपए के टेंडर हासिल किए थे। गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए 859.2 करोड़ रुपए के 31 टेंडर हासिल किए।वहीं श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 120.25 करोड़ रुपए के 73 टेंडर हासिल करने में सफल रही।
आरोप है कि पूर्व मंत्री महेश जोशी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के बदले मोटी रिश्वत ली थी।
ईमेल आईडी से खुला राज
एसीबी को इस मामले में जांच के दौरान एक ईमेल आईडी से महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। डिजिटल फोरेंसिक जांच में यह खुलासा हुआ कि पूर्व मंत्री सहित 22 उच्चाधिकारी इस संगठित भ्रष्टाचार का हिस्सा थे। इससे पहले 9 अप्रैल को जलदाय विभाग के पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल गिरफ्तारहुए थे, जिनसे पूछताछ में महेश जोशी की संलिप्तता के सबूत मिले।
ED की जांच और पूर्व जेल यात्रा
महेश जोशी का विवादों से पुराना नाता रहा है। अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था। वह करीब 7 महीने जेल में रहे और पिछले साल 3 दिसंबर 2025 को ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर आए थे। अब एसीबी ने अपनी एफआईआर (FIR) के आधार पर उन्हें दोबारा शिकंजे में लिया है।
प्रशासनिक अधिकारियों पर भी गाज
इस मामले में एसीबी ने केवल मंत्री ही नहीं, बल्कि विभाग के 21 अन्य अधिकारियों को भी नामजद किया है, जिनमें वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा और कई चीफ इंजीनियर शामिल हैं। अब तक इस घोटाले में कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि तीन अन्य अभी भी फरार हैं।
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