RGHS में 2200 करोड़ का बकाया, निजी अस्पतालों ने बंद किया इलाज
News In Short
- अस्पतालों द्वारा कैशलेस इलाज रोकने और दावों के भुगतान न होने के कारण RGHS संकट में।
- निजी अस्पतालों का सरकार पर 2200 करोड़ रुपए का क्लेम बकाया, जिससे कैशलेस सेवा ठप।
- प्रदेश के 50 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स पिछले 20 दिनों से इलाज के अभाव में परेशान।
- वेतन से प्रतिमाह 875 रुपए तक की कटौती के बावजूद लाभार्थियों को नहीं मिल रहीं स्वास्थ्य सेवायें।
- राज्य मानवाधिकार आयोग ने RGHS संकट को मानवाधिकारों का हनन मानकर सुओ मोटो संज्ञान लिया।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के 50 लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) इन दिनों खुद आईसीयू में नजर आ रही है। निजी अस्पतालों द्वारा पिछले 20 दिनों से कैशलेस इलाज रोकने और दावों के भुगतान न होने के कारण प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा चरमरा गया है।
2200 करोड़ का भारी-भरकम बकाया
निजी अस्पतालों का आरोप है कि राज्य सरकार पर उनका लगभग 2200 करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है। पिछले आठ महीनों से क्लेम का सेटलमेंट नहीं होने के कारण अस्पतालों को दवा खरीद और स्टाफ के वेतन में भारी परेशानी हो रही है। इसी के फलस्वरूप लाभार्थियों को अस्पतालों और फार्मेसी स्टोर्स पर नो स्टॉक या कैशलेस सेवा बंद जैसे जवाब मिल रहे हैं।
हाल ही में RGHS घोटाले में हुई डॉक्टरों की गिरफ्तारी और एसओपी (SOP) में बदलाव न किए जाने से निजी अस्पताल संचालक सरकार से नाराज हैं।
कर्मचारियों पर दोहरी मार
सरकारी कर्मचारी इस विवाद के बीच सबसे बड़े पीड़ित बनकर उभरे हैं। कर्मचारियों के वेतन से हर महीने उनके पे-स्केल के आधार पर 265 रुपए से लेकर 875 रुपए तक की अनिवार्य कटौती की जा रही है। वेतन कटने के बावजूद गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पेंशनर्स को निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
सरकारी और अस्पताल पक्ष
एक ओर राशा (RASHA) के सीईओ हरजी लाल अटल का कहना है कि अधिकांश अस्पतालों में उपचार हो रहा है। बजट की उपलब्धता के आधार पर भुगतान किया जा रहा है। समस्याओं के समाधान के प्रयास किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर प्राइवेट हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विजय कपूर का कहना है कि RGHS प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाई जाए। अस्पतालों का तुरंत भुगतान करें और जो अनियमितता कर रहे हैं, उन्हें कड़ी सजा मिले।
मानवाधिकार आयोग की सख्त टिप्पणी
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मामले पर सुओ मोटो (Suo Motu) संज्ञान लिया है। राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी नागरिक को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलना या इलाज से इनकार करना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने सरकार और निजी अस्पतालों के बीच चल रहे विवाद में आम जनता और कर्मचारियों के पिसने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने प्रशासन से इस गतिरोध को तुरंत समाप्त करने और उपचार की निरंतरता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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