जमीन ले ली, मुआवजा नहीं दिया, 429 किसान 3 साल से खाली हाथ

Jageshwar prasad | Jun 28, 2026, 16:39 IST
3 साल से खाली हाथ हैं 429 किसान, 3.35 करोड़ से अधिक का मुआवजा अटका
राजस्थान के डूंगरपुर के सागवाड़ा में NH 927A के लिए जमीन अधिग्रहित हुई। 429 किसानों को 3 साल बाद भी 3 करोड़ 35 लाख से ज्यादा का मुआवजा नहीं मिला।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 3 साल से खाली हाथ हैं 429 किसान, 3.35 करोड़ से अधिक का मुआवजा अटका।
  • 3878 में से 3449 किसानों को 97 करोड़ 53 लाख रुपए का हो चुका है भुगतान।
  • छोटे किसानों का आरोप, पटवारी ने बड़ी रकम वालों का भुगतान कराकर उन्हें रोक दिया।
  • किसानों ने एक सप्ताह में भुगतान न होने पर तहसील घेराव की चेतावनी दी है।
  • एसडीएम ने तकनीकी कारणों से रुके मामलों के लिए NHAI को पत्र लिखने की बात कही।

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में NH 927A के निर्माण के लिए किसानों की जमीन ली गई थी। 3878 में से 3449 किसानों को मुआवजा मिल चुका है। लेकिन 429 किसान अभी भी 3 करोड़ 35 लाख से अधिक की राशि के लिए 3 साल से इंतजार कर रहे हैं।



हाईवे का निर्माण पूरा हो चुका है, पर इन किसानों के हाथ खाली हैं। किसानों ने एक हफ्ते में पैसा न मिलने पर तहसील घेराव की चेतावनी दी है।



जमीन ली, हाईवे बना, पैसा नहीं आया

डूंगरपुर के सागवाड़ा उपखंड में एनएच (National Highway) 927A का निर्माण हुआ। यह हाईवे स्वरूपगंज से खेरवाड़ा, डूंगरपुर, सागवाड़ा, बांसवाड़ा होते हुए रतलाम मध्यप्रदेश बॉर्डर तक जाता है।



इसके लिए सागवाड़ा क्षेत्र में 3878 किसानों की जमीन ली गई थी। एनएचएआई (National Highways Authority of India) ने 3449 किसानों को 97 करोड़ 53 लाख से अधिक की राशि दे दी। बाकी 429 किसान आज भी इंतजार में हैं।



छोटे किसानों को क्यों नहीं मिला पैसा?

भीलूड़ा गणेशपुरी के किसान श्रीराम पाटीदार ने बताया कि पूर्व पटवारी ने कथित तौर पर उन किसानों से सेटिंग की, जिनकी बड़ी रकम बनती थी। उनका भुगतान करवा दिया गया।



लेकिन छोटे और गरीब किसानों का पैसा रोक दिया गया। जब भी वर्तमान पटवारी से बात करते हैं, तो वे बड़े अधिकारियों से बात करने का आश्वासन देकर टाल देते हैं।



रिकॉर्ड से ही गायब कर दिया जमीन का नंबर

किसान देवीलाल पाटीदार ने बताया कि शुरुआत में पटवारी ने कागजों में उनकी जमीन का नंबर ही दर्ज नहीं किया। काफी भागदौड़ के बाद नंबर दर्ज हुआ। पड़ोसियों को मुआवजा मिल गया, लेकिन उनका भुगतान अभी भी रुका है। प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हो रही।



दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक गए किसान

पीड़ित किसान 3 साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार केवल आश्वासन मिलता है। नतीजा कुछ नहीं निकलता। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन सरकार ने ले ली, हाईवे भी बन गया, लेकिन वे आज भी अपने हक के पैसे के लिए भटक रहे हैं।



एक हफ्ते का अल्टीमेटम, वरना घेराव

भीलूड़ा और आसपास के गांवों के किसानों ने एकजुट होकर प्रशासन को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मुआवजे की राशि बैंक खातों में नहीं आई, तो वे सागवाड़ा तहसील कार्यालय का घेराव करेंगे। साथ ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने की भी तैयारी है।



प्रशासन ने क्या कहा?

सागवाड़ा एसडीएम (Sub Divisional Magistrate) ने बताया कि करीब 90 प्रतिशत किसानों को जमीन अधिग्रहण पर मुआवजामिल चुका है। शेष मामले तकनीकी कारणों से लंबित हैं।



कुछ जमीनों पर निर्माण होने के कारण री-सर्वे जरूरी था। इसके लिए एनएच बांसवाड़ा को पत्र लिखा गया है। जैसे ही बजट और राशि आएगी, डीबीटी (DBT – Direct Benefit Transfer) के जरिए सीधे किसानों के खातों में पैसा भेज दिया जाएगा।



आंकड़ों में समझें पूरा मामला

कुल प्रभावित किसान 3878 थे। इनमें से 3449 किसानों को 97 करोड़ 53 लाख 9 हजार 464 रुपए का मुआवजा मिल चुका है। बाकी 429 किसानों को 3 करोड़ 35 लाख से अधिक की राशि मिलनी बाकी है। यह मामला 3 साल से लंबित है।



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