पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड: प्रोजेक्ट पर घटिया सामग्री का ग्रहण, NIA ने नकारी साजिश की बात

Jageshwar prasad | May 02, 2026, 07:58 IST
Photograph: (the sootr)
पचपदरा रिफाइनरी हादसे की जांच में साजिश के सबूत नहीं मिले हैं। आग का मुख्य कारण अलॉय स्टील की जगह घटिया कार्बन स्टील का उपयोग, ऑटोमैटिक सेफ्टी वॉल्व की विफलता और अनुभवहीन इंजीनियरों की तैनाती रही।

News In Short

  • एनआईए की जांच में रिफाइनरी हादसे में किसी भी बाहरी साजिश या हैकिंग को नकारा गया।
  • उच्च गुणवत्ता वाले P-5 अलॉय स्टील की जगह सस्ती कार्बन स्टील का प्रयोग बना आग का कारण ।
  • रिमोट शट-ऑफ सेफ्टी वॉल्व और स्प्रिंकलर सिस्टम जरूरत के समय पूरी तरह फेल रहे।
  • हाइड्रो-टेस्टिंग के दौरान SOP का उल्लंघन और पाइपलाइनों में स्थायी समाधान के बजाय लीपापोती।
  • घटना के समय ड्यूटी पर तैनात इंजीनियरों के पास आपात स्थिति संभालने का अनुभव नहीं था।

News In Detail

Barmer: 20 अप्रैल को राजस्थानकी पचपदरा रिफाइनरी में लगी भीषण आग ने न केवल करोड़ों का नुकसान किया, बल्कि सुरक्षा मानकों की भी पोल खोल दी है। एनआईए (NIA) और तकनीकी विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया है कि रिफाइनरी में आग के पीछे कोई बाहरी साजिश या डिजिटल हैकिंग नहीं थी। यह हादसा पूरी तरह से तकनीकी विफलता, घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और अनुभवहीन प्रबंधन का परिणाम था।



घटिया सामग्री का इस्तेमाल

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा निर्माण में प्रयुक्त स्टील की गुणवत्ता को लेकर हुआ है। क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) की इनलेट लाइन में, जहां तापमान 400°C तक पहुंच जाता है, वहां उच्च गुणवत्ता वाले P-5 अलॉय स्टील का उपयोग किया जाना अनिवार्य था। लेकिन लागत बचाने के चक्कर में वहां तीन से चार गुना सस्ती कार्बन स्टील लगा दी गई। जैसे ही खौलता हुआ वैक्यूम रेजिड्यू इस पाइप से गुजरा, घटिया स्टील दबाव झेल नहीं पाई और लीकेज शुरू हो गया, जिसने ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही भयंकर आग का रूप ले लिया।



धोखा दे गए सेफ्टी सिस्टम

रिफाइनरी को स्मार्ट बनाने वाले ऑटोमैटिक सेफ्टी वॉल्व ऐन मौके पर फेल हो गए। लीकेज होते ही इन वॉल्व को अपने आप बंद हो जाना चाहिए था, लेकिन सिस्टम बेअसर रहा और हजारों लीटर ज्वलनशील पदार्थ आग में घी का काम करता रहा। मजबूरन कर्मचारियों को मैनुअल तरीके से सप्लाई रोकनी पड़ी, जिससे आग पर काबू पाने में घंटों की देरी हुई। साथ ही, आग बुझाने के लिए लगे स्प्रिंकलर और वाटर रिंग्स भी काम नहीं आए।



पुराने हादसों से नहीं लिया सबक

हैरानी की बात यह है कि 2021 में विशाखापट्टनम रिफाइनरी में भी ठीक इसी तरह का हादसा हुआ था। तब पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट सिफारिश की थी कि देश की सभी रिफाइनरियों में कार्बन स्टील को बदला जाए और सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त किए जाएं। सवाल यह उठ रहा है कि पचपदरा जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में इन सुरक्षा सिफारिशों की अनदेखी क्यों की गई?



प्रशासनिक और तकनीकी चूक

हादसे के वक्त मौके पर तैनात स्टाफ की प्रोफाइलिंग से पता चला है कि शिफ्ट में काम करने वाले इंजीनियरों के पास इस तरह की यूनिट संभालने का पर्याप्त अनुभव नहीं था। इसके अलावा, पाइपलाइनों की हाइड्रो-टेस्टिंग के दौरान भी मानक प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया और लीकेज वाली जगहों पर स्थायी समाधान के बजाय लीपापोती की गई।



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