निकाय के वार्डों में भी कम हुआ ओबीसी आरक्षण, जोर पकड़ेगा सियासी विवाद!
समझें क्या है पूरा मामला
- 21 से घटकर 18.86 फीसदी पर सिमटा कोटा,10,245 में से ओबीसी को मिले केवल 1,933 वार्ड।
- हाई कोर्ट पहुँच सकता है विवाद,ओबीसी संगठनों का रोस्टर प्रणाली पर विरोध दर्ज।
- 6,123 वार्ड रहेंगे अनारक्षित,राज्य के 59.76 फीसदी वार्डों पर होगी ओपन फाइट।
- महिला प्रतिनिधित्व को मजबूती, प्रदेशभर से चुनकर आएंगी कुल 3,356 महिला पार्षद।
प्रदेश की 309 नगरीय निकायों में 10,245 वार्डों के आरक्षण का गणित सामने आते ही ओबीसी वर्ग में असंतोष की लहर दौड़ गई है। राज्य स्तरीय नीति में ओबीसी के लिए 21 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद वार्डों के सीमांकन में यह आंकड़ा महज 18.86 प्रतिशत (1,933 वार्ड) पर ही सिमट गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 50 फीसदी कुल आरक्षण की संविधानिक सीमा और एससी-एसटी की आबादी के अनुपात में पहले कोटा तय होने के कारण ओबीसी के खाते में तकनीकी रूप से यह गिरावट आई है।
हालांकि, 2.14 फीसदी सीटों की इस कटौती को लेकर ओबीसी संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस कारण 17 अगस्त को निकलने वाली वार्ड आरक्षण लॉटरी के तुरंत बाद मामला राजस्थान हाई कोर्ट की चौखट तक पहुँचने के पूरे आसार बन गए हैं।
यह रहेगा वार्ड आरक्षण का गणित
प्रदेश के 309 शहरी निकायों के 10,245 वार्डों में 17 अगस्त को आरक्षण की लॉटरी निकलेगी। हर निकाय में एससी, एसटी, ओबीसी और अनारक्षित वार्ड तय करने के लिए लॉटरी से फैसला होगा। वार्डों की लॉटरी जिला स्तर पर होगी। इस बार प्रदेश के निकायों में 3356 महिला पार्षद बनेंगी। हर कैटेगरी में 33 फीसदी वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
निकायों के 10,245 वार्डों में से 6123 वार्ड अनारक्षित रहेंगे। ओबीसी के लिए 1933,एससी के 1794,एसटी के लिए 395 आरक्षित होंगे। हर निकाय में प्रत्येक कैटेगरी में 33 फीसदी वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।
ओबीसी को वार्डों में भी मात्र 18.86 फीसदी आरक्षण
इस बार ओबीसी को वार्डों में भी पूरा 21 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिला है। 10,245 वार्ड में से 1933 वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित होंगे जो कि निर्धारित 21 फीसदी से कम मात्र 18.86 फीसदी होगा।
ओबीसी नेता पहले ही निकाय प्रमुखों और जिला परिषदों में ओबीसी आरक्षण कम देने का आरोप लगा रहे हैं। अब वार्डों में भी विवाद होने के आसार हैं।
संभागवार देखें तो अजमेर में 19.70, बीकानेर में 18.57, जयपुर में 18.55, भरतपुर में 18.03, जोधपुर में 18.94, कोटा में 18.82 और उदयपुर संभाग में 19.66 फीसदी आरक्षण मिला है।
59.76 फीसदी वार्ड अनारक्षित,एससी को 17.51 फीसदी वार्ड आरक्षित,एसटी के 3.57 फीसदी वार्ड आरक्षित होंगे।
प्रदेश के 309 निकायों में 59.76 फीसदी वार्ड अनारक्षित हैं। एससी के 17.51 फीसदी वार्ड और एसटी के लिए 3.57 फीसदी वार्ड आरक्षित हैं। ओबीसी के लिए 18.86 फीसदी वार्ड आरक्षित हैं।
अनारक्षित वर्ग के लिए सबसे ज्यादा वार्ड
प्रदेश के निकायों में अनारक्षित वार्ड सबसे ज्यादा है। 10245 में से 6,123 पार्षद अनारक्षित वार्डो से होंगे। सबसे ज्यादा महिला पार्षद भी अनारक्षित वाडों से ही बनेंगी। अनारक्षित ओपन वार्डों से सामान्य वर्ग सहित किसी भी कैटेगरी का व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है। अनारक्षित महिला वार्ड से किसी भी वर्ग की महिला चुनाव लड़ सकती है।
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