कोटा मेडिकल कॉलेज में 6 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी, 1 की मौत; परिवार ने लगाए गलत इंजेक्शन के आरोप
News In Short
- कोटा मेडिकल कॉलेज के गायनिक वार्ड में 6 प्रसूताओं की हालत बिगड़ी, 1 महिला की मौत।
- परिजनों का आरोप- स्टाफ ने गलत इंजेक्शन या दवा दी, जिससे यह हादसा हुआ।
- विधायक संदीप शर्मा अस्पताल पहुंचे, बोले- पहले बाकी मरीजों की जान बचाई जाए।
- मरीजों में प्लेटलेट्स गिरने और यूरिन बंद होने के गंभीर लक्षण मिले।
- जांच के लिए 5 सदस्यीय चिकित्सा टीम और 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई।
News In Detail
Kota: राजस्थान के कोटा स्थित मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के गायनिक वार्ड में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। वार्ड में भर्ती 6 प्रसूताओं की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई, जिनमें से एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। बाकी 5 महिलाओं की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया, और प्रशासन ने तुरंत दो जांच कमेटियों का गठन कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसव के बाद कई महिलाएं गायनिक वार्ड में भर्ती थीं। बुधवार को अचानक 6 महिलाओं की सेहत लगातार बिगड़ने लगी। उनमें तेज बुखार, ब्लड प्रेशर गिरना, प्लेटलेट्स में अचानक कमी और यूरिन आउटपुट बंद होने के लक्षण दिखे। डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें नेफ्रोलॉजी (किडनी) वार्ड में शिफ्ट किया, लेकिन तब तक एक महिला की जान जा चुकी थी। मृतका की पहचान पायल (निवासी भैंसरोडगढ़) के रूप में हुई है। बाकी 5 महिलाओं का इलाज जारी है।
परिजनों का गंभीर आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्टाफ द्वारा गलत दवा या इंजेक्शन देने की वजह से यह घटना घटी। प्रसूता रागिनी के पति लोकेश मीणा ने बताया, रात को ही पत्नी ने यूरिन बंद होने की शिकायत की थी, लेकिन स्टाफ ने गंभीरता नहीं दिखाई। सुबह तक हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉक्टरों की बातचीत से लग रहा था कि किसी गलत दवा का असर है। मृतका पायल के परिजनों ने भी अस्पताल पर कार्रवाई की मांग की है।
विधायक संदीप शर्मा पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। विधायक ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से जवाब तलब करते हुए कहा, यह मामला बेहद गंभीर है। अस्पताल प्रशासन की पहली प्राथमिकता उन पांच महिलाओं की जान बचाना होनी चाहिए जो वर्तमान में संघर्ष कर रही हैं। इस घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
किडनी में फैला संक्रमण
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि प्रभावित महिलाओं में कुछ खतरनाक लक्षण देखे गए हैं। प्रभावित महिलाओं के प्लेटलेट्स काउंट में भारी गिरावट दर्ज की गई। किडनी पर असर पड़ने के कारण महिलाओं का यूरिन आउटपुट पूरी तरह बंद हो गया, जो किडनी फेलियर की ओर इशारा करता है। अधिकांश महिलाओं का ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक कम हो गया है। फिलहाल विशेषज्ञ डॉक्टर 24 घंटे उनकी निगरानी कर रहे हैं।
दो कमेटियों का गठन
घटना की गंभीरता को देखते हुए, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दो अलग-अलग कमेटियां बनाई हैं। पहली कमेटी में 5 वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं, जो बीमार महिलाओं के उपचार पर 24 घंटे नजर रख रहे हैं। दूसरी, 3 सदस्यीय कमेटी इस बात की जांच कर रही है कि संक्रमण की वजह क्या थी? क्या यह किसी विशेष एंटीबायोटिक का रिएक्शन था या आईवी फ्लूइड में कोई खराबी या फिर कोई और तकनीकी चूक? जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम
संक्रमण के खतरे को देखते हुए, प्रशासन ने तुरंत सभी प्रभावित महिलाओं के नवजात शिशुओं को NMCH (न्यू मैटरनल एंड चाइल्ड हॉस्पिटल) वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। डॉक्टरों की एक अलग टीम शिशुओं की देखभाल कर रही है, ताकि वे किसी भी तरह के संक्रमण की चपेट में न आएं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल किसी भी नवजात की तबीयत खराब नहीं है। पूरे गायनिक वार्ड को सैनिटाइज किया जा रहा है।
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