जयपुर में तीसरे मोर्चे का होगा शंखनाद, एक मंच पर आएंगे ओवैसी और हनुमान बेनीवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में ओवैसी-बेनीवाल की संयुक्त जनसभा आज।
- नगर निगम चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे का आगाज।
- AIMIM और RLP गठबंधन से सियासी हलचल तेज।
- भाजपा-कांग्रेस के समीकरण पर पड़ सकता है असर।
- ओवैसी-बेनीवाल मंच से साधेंगे जयपुर की जनता।
जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 से पहले आज AIMIM राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल एक ही मंच से जनसभा को संबोधित करेंगे। यह रैली शाम 6:15 बजे से रात 10 बजे तक चलेगी। इसे जयपुर में तीसरे मोर्चे का आधिकारिक शंखनाद माना जा रहा है। इस गठबंधन से भाजपा और कांग्रेस दोनों के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ गई है।
जयपुर में तीसरे मोर्चे का शंखनाद
इस चुनावी रैली के आयोजन के साथ ही जयपुर के चुनावी मुकाबले में तीसरे मोर्चे का आधिकारिक शंखनाद होने जा रहा है। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष जमील खान के अनुसार ओवैसी और बेनीवाल की यह जनसभा जयपुर के मुस्लिम और युवा बहुल इलाकों में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू करने जा रही है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम ने जयपुर नगर निगम की सत्ता में लंबे समय से रहीं दोनों पारंपरिक पार्टियों, भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, के रणनीतिकारों को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है।
जाट-मुस्लिम सोशल इंजीनियरिंग की चर्चा
राजस्थान की पारंपरिक राजनीति अब तक ज्यादातर भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। लेकिन इस बार नगर निगम चुनाव 2026 में ओवैसी और बेनीवाल की जोड़ी ने एक नया सामाजिक समीकरण तैयार कर दिया है।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का राजस्थान की जाट बेल्ट, किसानों और युवाओं के बीच गहरा प्रभाव और मजबूत जनाधार माना जाता है। वहीं सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM जयपुर के परकोटा, हवामहल और आसपास के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपने पैर तेजी से पसार रही है।
भाजपा-कांग्रेस के समीकरण पर क्या पड़ सकता है असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह जाट-मुस्लिम सामाजिक समीकरण जमीन पर वोटों में तब्दील होता है, तो जयपुर के कई वार्डों में सीधे तौर पर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग सकती है।
वहीं कुछ शहरी वार्डों में जहां कांटे की टक्कर मानी जा रही है, वहां यह गठबंधन भाजपा की जीत की राह में भी रुकावट बन सकता है। हालांकि यह विश्लेषण अभी अनुमान पर आधारित है और चुनाव नतीजों के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
'हक, इंसाफ और विकास की लड़ाई'
दोनों नेताओं ने इस जनसभा को 'हक, इंसाफ और विकास की लड़ाई' करार दिया है। उन्होंने जनता से एक मजबूत और ईमानदार विकल्प चुनने की अपील की है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया राजनीतिक गठबंधन जयपुर के चुनावी नतीजों पर कितना असर डाल पाता है।
ये खबर भी पढे़:-
कोटा में सामने आया अजीबो-गरीब मामला, वोटर लिस्ट में हनुमान जी बने मतदाता!
राजेंद्र राठौड़ ने किया कांग्रेस पर पलटवार, कहा-280 दिन तक प्रदेश को आचार संहिता में उलझाया
डूंगरपुर में नगर परिषद की अजीबों-गरीब हरकत, निर्दलीय प्रत्याशी के ऑफिस के सामने छोड़े कुत्ते
राजस्थान के 2 SP को भाजपा और कांग्रेस ने सौंपी कमान, पंजाब में दिग्गज आमने-सामने