पचपदरा रिफाइनरी में आग: हाईटेक कवच में कहां रह गई कमी? उठ रहे गंभीर सवाल
News In Short
- पचपदरा रिफाइनरी में अग्नि दुर्घटना को जांच एजेंसियां कई एंगल से खंगाल रहीं है।
- यह हादसा तकनीकी विफलता, साजिश या सिस्टम से छेड़छाड़ का परिणाम तो नहीं।
- एनआईए (NIA) की टीमें कर रही हैं जांच, हर संभावना का रखा जा रहा है ध्यान।
- 1 जुलाई 2026 की डेडलाइन अब खतरे में, बजट में बढ़ोतरी की भी पूरी संभावना।
News In Detail
Balotra: राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में हुई हालिया अग्नि दुर्घटना ने कई आशंकाओं को जन्म दे दिया है। इसके कारण जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ गई हैं। यह हादसा महज एक तकनीकी विफलता है या इसके पीछे जल्दबाजी और सुरक्षा में चूक का कोई बड़ा पैटर्न है या कोई साजिश है, इसकी परतों को जांच अब एनआईए की टीमें कर रही हैं।
क्या डेडलाइन का दबाव सुरक्षा पर भारी पड़ा?
परियोजना के आंकड़ों को देखें तो एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा होता है। जो प्रोजेक्ट 8 साल में 90.4% तक पहुंचा था, उसके अंतिम 9.6% काम को कहीं उद्घाटन की संभावित तारीखों के दबाव में तेजी से निपटाने की कोशिश तो नहीं की गई है।
रिफाइनरी का कमीशनिंग फेज (90% के बाद का चरण) सबसे संवेदनशील माना जाता है। आशंका जताई जा रही है कि क्या इस फेज में जरूरी सुरक्षा परीक्षणों को पूरी तरह से अंजाम दिए बिना ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया?
मानक के अनुसार किसी भी यूनिट का 72 घंटे का फुल-ट्रायल जरूरी है, लेकिन आग लगने के वक्त यूनिट ट्रायल मोड में ही थी।
साजिश या सिस्टम टेम्पियरिंग का संदेह?
रिफाइनरी में आगका सबसे रहस्यमयी पहलू करोड़ों की लागत वाले अर्ली वार्निंग सिस्टम का मौन रहना है। गैस रिसाव के बावजूद सेंसर का अलर्ट न देना और ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर का एक्टिव न होना किसी बड़ी तकनीकी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
जांच एजेंसियां इस संभावना को भी खारिज नहीं कर रही हैं कि कहीं सिस्टम के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई? यही कारण है कि कंट्रोल रूम के पिछले 48 घंटों के डेटा लॉग और एंट्री रजिस्टर की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
सुरक्षा घेरे में बड़ी चूक
हादसे के साथ ही वीवीआईपी मंच तक एक अज्ञात युवक का पहुंच जाना सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है। पीएम नरेंद्र मोदी की सभा के प्रतिबंधित 'D' एरिया में युवक का प्रवेश और वीडियो बनाना यह दर्शाता है कि ग्राउंड लेवल पर सुरक्षा घेरा उतना अभेद्य नहीं था, जितना दावा किया गया। इसी लापरवाही के चलते पचपदरा एसएचओ को निलंबित किया गया है। इस मामले में RAC जवानों की भूमिका पर भी उंगली उठ रही है।
टाइमलाइन और बजट पर पड़ेगा असर
इन तमाम आशंकाओं के बीच एक सच्चाई यह भी है कि इस हादसे ने रिफाइनरी के भविष्य की राह मुश्किल कर दी है। 1 जुलाई 2026 की डेडलाइन अब खतरे में दिख रही है। आशंका है कि प्रभावित यूनिट को ठीक करने में ही 4 से 6 महीने लग सकते हैं। ₹79,450 करोड़ के इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट की लागत में और अधिक इजाफा होने की पूरी संभावना है।
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