पचपदरा रिफाइनरी में उद्घाटन के दिन स्कूली बच्चों को लाने का आदेश, विरोध के आगे लिया वापस
News In Short
- राजस्थान में पचपदरा रिफाइनरी का 21 अप्रैल को उद्घाटन का कार्यक्रम।
- पीएम नरेंद्र मोदी बालोतरा जिले में स्थित इस रिफाइनरी का करेंगे लोकार्पण।
- स्कूली बच्चों को 21 अप्रैल को रिफाइनरी में लाने का दिया था आदेश।
- जन विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने इस आदेश को वापस ले लिया।
- लोगों का आरोप था कि रैली में ले जाने के लिए जारी हुआ था यह आदेश।
News In Detail
Balotra: राजस्थान में शिक्षा विभाग को अपना एक आदेश जन विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। बालोतरा के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी इस आदेश में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को पचपदरा रिफाइनरी के भ्रमण पर ले जाने की बात कही गई थी, लेकिन लोगों ने इसे प्रधानमंत्री की 21 अप्रैल को पचपदरा रैली में भीड़ जुटाने का एक तरीका करार देकर सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना की थी।
क्या था पूरा मामला?
पिछले 17 अप्रैल 2026 को मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी बालोतरा ने एक लिखित आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत जिले के समस्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि वे कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को 21 अप्रैल 2026 को रिफाइनरी के कार्यों, उद्देश्यों और लाभों की जानकारी दिलाने हेतु भ्रमण पर भेजें।
आदेश में तर्क दिया गया था कि इस भ्रमण से विद्यार्थियों के कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा में मदद मिलेगी। प्रथम दृष्टया यह एक शैक्षणिक गतिविधि लग रही थी, लेकिन इसकी टाइमिंग ने बड़े सवाल खड़े कर दिए।
रैली के लिए भीड़ जुटाने का आरोप
जैसे ही यह आदेश सार्वजनिक हुआ, सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया। स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों ने दावा किया कि 21 अप्रैल को ही पचपदरा में प्रधानमंत्री की एक बड़ी जनसभा/रैली प्रस्तावित है। आरोप लगाया गया कि रिफाइनरी दिखाने के बहाने प्रशासन स्कूली बच्चों को रैली स्थल तक ले जाना चाहता था, ताकि वहां भीड़ संख्या को बढ़ाया जा सके।
सोशल मीडिया पर लोगों ने शिक्षा विभाग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भीषण गर्मी के मौसम में बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण के नाम पर राजनीति का हिस्सा बनाना अनुचित है। कई अभिभावकों ने भी बच्चों की सुरक्षा और इस तरह के अनिवार्य भ्रमण पर आपत्ति जताई।
विरोध के बाद आदेश की वापसी
सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' और 'फेसबुक' जैसे मंचों पर यह सरकारी आदेश तेजी से वायरल होने लगा। यूजर्स ने शिक्षा का राजनीतिकरण बंद करने के नारे के साथ सरकार और विभाग को घेरना शुरू कर दिया। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लपकते हुए जिला प्रशासन पर सत्ता पक्ष के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।
बढ़ते दबाव और चौतरफा घेराबंदी को देखते हुए विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा। सूत्रों के अनुसार उच्च स्तर से मिले निर्देशों के बाद विभाग ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया।
विभाग की सफाई
हालांकि, विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि विभाग इस विवाद को और तूल नहीं देना चाहता था। जानकारों का मानना है कि यदि यह आदेश वापस नहीं लिया जाता तो सरकार की किरकिरी होने का डर था।
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