जीत के अगले दिन निर्दलीय पार्षद की मौत: मारवाड़ जंक्शन में बोर्ड गठन पर फंसा पेच
समझें क्या है पूरा मामला
- जीत के एक दिन बाद निर्दलीय पार्षद का निधन।
- मारवाड़ जंक्शन में पार्षद की मौत से बदला गणित।
- जीत का जश्न मनाया, अगली सुबह हार्ट अटैक से मौत।
- निर्दलीय जीते अबरार खान की अचानक हुई मौत।
- पार्षद के निधन से नगर पालिका बोर्ड गठन की तस्वीर बदली।
राजस्थान निकाय चुनाव में जीत के एक दिन बाद ही पाली के मारवाड़ जंक्शन से दुखी करने वाली खबर आई। वार्ड नंबर-7 से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले अबरार खान मेव (58) की मंगलवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
एक दिन पहले यानी सोमवार को ही अबरार खान ने समर्थकों के साथ जीत का जश्न मनाया था। अगले ही दिन उनकी मौत से परिवार और समर्थकों में मातम पसर गया। उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा।
निर्दलीय पार्षद की जीत के अगले दिन हुई मौत
अबरार खान की मौत का असर मारवाड़ जंक्शन नगरपालिका के बोर्ड गठन के समीकरण पर भी पड़ेगा। यहां भाजपा और कांग्रेस ने 11-11 सीटें जीती हैं, जबकि 3 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीते थे। किसी दल के पास बहुमत नहीं होने के कारण निर्दलीय ही बोर्ड बनाने में सबसे अहम माने जा रहे थे।
चाय पीते समय अचानक सीने में उठा दर्द
मंगलवार सुबह अबरार खान अपने घर पर थे। एक दिन पहले ही निकाय चुनाव के नतीजे आए थे। जीत के बाद परिचित और समर्थक लगातार उन्हें बधाई देने पहुंच रहे थे। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 8 बजे अबरार खान घर पर चाय पी रहे थे। इसी दौरान उनके सीने में अचानक तेज दर्द हुआ और तबीयत बिगड़ गई। परिजन और वहां मौजूद लोग उन्हें तुरंत पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
हॉस्पिटल में निर्दलीय पार्षद की इलाज के दौरान मौत
बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने अबरार खान का इलाज शुरू किया, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी रही। करीब एक घंटे बाद सुबह 9 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मौत की खबर मिलते ही परिवार और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व विधायक खुशवीर सिंह जोजावर भी हॉस्पिटल पहुंचे। उन्होंने बताया कि चुनाव में जीत के बाद एक दिन पहले ही उन्होंने अबरार खान को बधाई दी थी और उनका मुंह मीठा कराया था।
कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़ा चुनाव
अबरार खान इस निकाय चुनाव में कांग्रेस से टिकट की उम्मीद कर रहे थे। टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया। मारवाड़ जंक्शन के वार्ड नंबर-7 की जनता ने उन्हें पार्षद चुना। सोमवार को नतीजा आने के बाद उनके समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया था।
अबरार खान क्षेत्र में कोयला कारोबारी के रूप में भी जाने जाते थे। वे मुस्लिम समाज के सदर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और पहले वार्ड पंच भी रह चुके थे। स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी वे सक्रिय थे।
निर्दलीय पार्षद की मौत से फंसा बोर्ड का गणित
मारवाड़ जंक्शन को नगरपालिका बनाए जाने के बाद यहां पहली बार निकाय चुनाव हुए हैं। नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं। चुनाव नतीजों में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बराबरी पर रहा। दोनों पार्टियों ने 11-11 वार्ड जीते। तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं। किसी भी पार्टी के पास अपने दम पर बोर्ड बनाने के लिए जरूरी 13 पार्षद नहीं थे। ऐसे में तीनों निर्दलीय पार्षद भाजपा और कांग्रेस के लिए बेहद अहम हो गए थे।
अबरार खान की अचानक मौत के बाद मारवाड़ जंक्शन में बोर्ड गठन का गणित भी बदल गया। चुनाव नतीजों के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाने की स्थिति में थीं।
अब एक निर्वाचित निर्दलीय पार्षद की मौत के बाद आगे की चुनावी और बोर्ड गठन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। निर्वाचन नियमों के अनुसार आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, उसी के आधार पर नगरपालिका की सत्ता का नया समीकरण साफ होगा।
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