पाली मेडिकल कॉलेज का अनोखा फैसला, नए MBBS बैच के आते ही सीनियर्स की 15 दिन छुट्टी

Saurabh Mishra | Oct 07, 2026, 18:09 IST
पाली मेडिकल कॉलेज में रैगिंग रोकथाम
पाली के महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज ने नए एमबीबीएस छात्रों को सुरक्षित माहौल देने के लिए सीनियर्स को 15 दिन के लिए कैंपस से दूर रखा है। यह कदम नए छात्रों को रैगिंग से मुक्त माहौल में कॉलेज और हॉस्टल की जिंदगी में ढालने के लिए उठाया गया है। सीनियर छात्रों की थ्योरी की क्लास ऑनलाइन जारी रहेगी, लेकिन उन्हें हॉस्टल में रहने की अनुमति नहीं होगी।

पाली के महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज (Maharana Pratap Medical College) ने रैगिंग रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कॉलेज में एमबीबीएस का नया बैच आने के साथ ही सीनियर छात्रों को 15 दिन के लिए कैंपस से दूर कर दिया गया। सीनियर छात्र न कॉलेज कैंपस में आ सकेंगे और न ही हॉस्टल में रह सकेंगे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि नए छात्रों को शुरुआती दिनों में किसी तरह का डर या दबाव महसूस न हो, इसलिए यह व्यवस्था की गई।



महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज के इस फैसले के तहत 2022-23 से लेकर 2025-26 बैच तक के छात्रों की 28 सितंबर से 12 अक्टूबर तक ऑफलाइन क्लास नहीं होगी। हॉस्टल में रहने वाले सीनियर छात्रों को भी कमरे खाली करने के लिए कहा गया। इस दौरान उनके कॉलेज कैंपस, रीडिंग रूम और लाइब्रेरी में आने पर रोक रहेगी। हालांकि, उनकी पढ़ाई पूरी तरह बंद नहीं की गई। थ्योरी की क्लास ऑनलाइन चलेंगी।



मेडिकल कोर्स के हिसाब से जिन छात्रों की अस्पताल में ड्यूटी जरूरी है, उन्हें वहां जाना होगा। हॉस्टल में रहने की अनुमति नहीं होने के कारण कई छात्र आसपास किराए पर कमरा लेकर रह रहे।



प्रिंसिपल बोले- हमने अपने स्तर पर नहीं लिया फैसला

महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ ओपी सुथार के मुताबिक यह फैसला कॉलेज ने अपने स्तर पर नहीं लिया। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट, यूजीसी (UGC) और नेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission) के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाया गया।



कॉलेज प्रशासन का फोकस नए छात्रों को शुरुआती दिनों में ऐसा माहौल देने पर है, जहां वे बिना किसी दबाव के कॉलेज और हॉस्टल की नई जिंदगी में खुद को ढाल सकें। हालांकि, UGC और NMC के नियमों को देखने पर एक बात साफ होती है। नियम नए और पुराने छात्रों के बीच दूरी बनाए रखने, फ्रेशर्स के हॉस्टल में सीनियर्स की आवाजाही पर सख्त निगरानी और एंटी-रैगिंग व्यवस्था मजबूत करने की बात करते हैं।



2022 में 48 छात्रों पर हुई थी कार्रवाई

पाली के महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज प्रशासन के इस कदम को समझने के लिए 2022 की घटना भी अहम है। जुलाई 2022 में कॉलेज में छात्रों के दो गुटों के बीच विवाद हुआ था। मामला पहले फुटबॉल मैच के दौरान बिगड़ा और बाद में हॉस्टल तक पहुंच गया था। छात्रों के बीच झगड़ा हुआ। घटना के वीडियो भी सामने आए थे।



मामले की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज ने एक कमेटी बनाई थी। जांच रिपोर्ट के बाद 48 छात्रों को 21 दिन के लिए सस्पेंड किया गया। इनमें 2018 बैच के 14, 2019 बैच के 25 और 2020 बैच के 9 छात्र शामिल थे। इन छात्रों को कुछ समय के लिए हॉस्टल से भी बाहर कर दिया गया था। इस मामले में जूनियर छात्रों ने सीनियर्स पर रैगिंग का आरोप भी लगाया था। हालांकि, उस समय कॉलेज प्रशासन ने रैगिंग के आरोप को स्वीकार नहीं किया था।



रैंगिंग को लेकर UGC के नियम क्या कहते हैं?

UGC के एंटी-रैगिंग नियम 2009 से लागू हैं। इनके मुताबिक किसी फ्रेशर को डराना, अपमानित करना, जबरन कोई काम करवाना, मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करना या सीनियर होने का दबाव बनाना रैगिंग के दायरे में आ सकता। कॉलेजों को ऐसी किसी भी गतिविधि को रोकने और शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।



UGC की गाइडलाइन में फ्रेशर्स को जहां तक संभव हो अलग हॉस्टल ब्लॉक में रखने की बात भी कही गई है। अगर ऐसा मुमकिन नहीं है तो फ्रेशर्स के रहने वाले हिस्से में सीनियर्स की आवाजाही पर वार्डन, सिक्योरिटी गार्ड और कॉलेज स्टाफ को नजर रखनी होगी। नए छात्रों को यह जानकारी भी देनी होती है कि रैगिंग होने पर वे किससे शिकायत कर सकते हैं।



मेडिकल कॉलेजों के लिए NMC के नियम और सख्त

मेडिकल कॉलेजों के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन ने 2021 में अलग एंटी-रैगिंग नियम जारी किए थे। ये नियम 18 नवंबर 2021 को नोटिफाई किए गए थे। इनका मकसद मेडिकल कॉलेजों से रैगिंग को पूरी तरह खत्म करना है।



नियमों के मुताबिक मेडिकल कॉलेजों में एंटी-रैगिंग कमेटी और एंटी-रैगिंग स्क्वॉड जैसी व्यवस्था होनी चाहिए। कैंपस और हॉस्टल के उन हिस्सों की पहचान भी की जानी चाहिए, जहां रैगिंग का खतरा ज्यादा हो सकता। फ्रेशर्स के लिए काउंसलिंग और ओरिएंटेशन की व्यवस्था करने पर भी इसमें जोर दिया गया है।



फ्रेशर्स को जहां तक संभव हो सीनियर्स से अलग हॉस्टल ब्लॉक या विंग में रखा जाना चाहिए। सीनियर्स अगर फ्रेशर्स के हॉस्टल वाले हिस्से में जाते हैं तो उनकी आवाजाही पर सख्त निगरानी जरूरी है। बाद में फ्रेशर्स और सीनियर्स के बीच बातचीत भी तय कार्यक्रम और कॉलेज की निगरानी में कराने का प्रावधान है।



पाली मेडिकल कॉलेज ने इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए नए बैच के शुरुआती 15 दिनों में सीनियर्स को ही कैंपस से दूर रखने का रास्ता चुना है। कॉलेज प्रशासन को उम्मीद है कि इससे नए MBBS छात्रों को शुरुआती दिन बिना किसी डर और दबाव के बिताने का मौका मिलेगा।



FAQs

  1. पाली के महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज में सीनियर छात्रों को कैंपस से दूर क्यो रखा जा रहा है?
    सभी सीनियर छात्रों को 15 दिन के लिए कैंपस से दूर रखने का निर्णय नए एमबीबीएस छात्रों को शुरुआती दिनों में किसी तरह का डर या दबाव महसूस न होने के लिए लिया गया है।
  2. महाराणा प्रताप मेडिकल कॉलेज नए बैच से पहले 15 दिनों में सीनियर छात्रों की पढ़ाई का क्या होगा?
    2022-23 से 2025-26 बैच तक के छात्रों के लिए पहले 15 दिनों में सीनियर छात्रों की थ्योरी की क्लास ऑनलाइन जारी रहेगी, लेकिन उन्हें हॉस्टल में रहने या कॉलेज कैंपस में आने की अनुमति नहीं होगी।
  3. पाली मेडिकल कॉलेज में रैगिंग रोकने के लिए क्या कदम उठाये गये है।
    पाली मेडिकल कॉलेज ने रैगिंग रोकने के लिए न केवल सीनियर छात्रों को कैंपस से दूर रखा है, बल्कि नए और पुराने छात्रों के बीच दूरी बनाए रखने, सख्त निगरानी और एंटी-रैगिंग व्यवस्था को मजबूत करने का भी ध्यान रखा है।
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