पंचायत चुनाव के लिए कांग्रेस ने 41 जिलों में लगाए पर्यवेक्षक, वैभव गहलोत को अलवर की जिम्मेदारी
समझें क्या है पूरा मामला
- पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन की तैयारी तेज की।
- राजस्थान के 41 जिलों में नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया।
- वैभव गहलोत को टीकाराम जूली के गृह जिले अलवर की जिम्मेदारी।
- पर्यवेक्षकों की सूची में 5 सांसद और 7 विधायक शामिल।
- छह नेताओं को दो-दो जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने प्रदेश के 41 जिलों में नेताओं को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी है। इस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे और कांग्रेस नेता वैभव गहलोत का नाम भी शामिल है। उन्हें नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के गृह जिले अलवर का पर्यवेक्षक बनाया गया है।
कांग्रेस की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों में 5 सांसद और 7 विधायक शामिल हैं। पार्टी ने अलग-अलग जिलों में संगठन की गतिविधियों और चुनावी तैयारियों पर नजर रखने के लिए नेताओं को जिम्मेदारी दी है।
5 सांसद और 7 विधायकों को मिली जिम्मेदारी
कांग्रेस ने पर्यवेक्षकों की सूची में सांसद मुरारीलाल मीणा, कुलदीप इंदौरा, भजनलाल जाटव, बृजेंद्र ओला और उम्मेदाराम बेनीवाल को शामिल किया है। वहीं, विधायकों में रामकेश मीणा, रोहित बोहरा, अमीन कागजी, प्रमोद जैन भाया, डूंगराम गेदर और अनिल शर्मा सहित रफीक खान को जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने संगठन के अन्य नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों को भी अलग-अलग जिलों का पर्यवेक्षक बनाया है।
छह नेताओं को दो-दो जिलों की जिम्मेदारी
कांग्रेस ने कुछ नेताओं को एक से ज्यादा जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है। सांसद मुरारीलाल मीणा को भरतपुर और डीग का पर्यवेक्षक बनाया गया है। विधायक रोहित बोहरा को उदयपुर और सलूंबर की जिम्मेदारी मिली है।
रफीक खान को डूंगरपुर और बांसवाड़ा, जबकि सेवादल के प्रदेश मुख्य संगठक हेम सिंह शेखावत को जोधपुर और फलौदी का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया को नागौर और डीडवाना-कुचामन की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
वैभव गहलोत को अलवर की जिम्मेदारी
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को अलवर जिले का पर्यवेक्षक बनाया गया है। अलवर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गृह जिला है। इस नियुक्ति पर राजनीतिक नजरें रहेंगी, क्योंकि पंचायत चुनाव में जिले की स्थानीय राजनीति और संगठन की भूमिका अहम मानी जाती है।
हालांकि, पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने का मतलब चुनाव में टिकट तय करने का अधिकार होना जरूरी नहीं है। उनकी भूमिका और अधिकारों की पुष्टि पार्टी के आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए।
कांग्रेस के 41 जिलों में नियुक्त पर्यवेक्षकों की सूची
| जिला | पर्यवेक्षक |
|---|---|
| अजमेर | सुखराम बिश्नोई |
| अलवर | वैभव गहलोत |
| बाड़मेर और बालोतरा | करण सिंह उचियारड़ा |
| भीलवाड़ा | डॉ. रघु शर्मा |
| बीकानेर | उदयलाल आंजना |
| डूंगरपुर और बांसवाड़ा | रफीक खान |
| जयपुर | प्रमोद जैन भाया |
| झालावाड़ | डूंगर राम गेदर |
| जोधपुर और फलौदी | हेम सिंह शेखावत |
| कोटा | डॉ. जितेन्द्र सिंह |
| नागौर और डीडवाना-कुचामन | डॉ. कृष्णा पूनिया |
| पाली | अनिल शर्मा |
| राजसमंद | अशोक चांदना |
| सिरोही | मनीषा पंवार |
| उदयपुर और सलूंबर | रोहित बोहरा |
| दौसा | अमीन कागजी |
| जालोर | गोविंद राम मेघवाल |
| झुंझुनूं | ममता भूपेश |
| करौली | शकुंतला रावत |
| कोटपुतली-बहरोड़ | रामकेश मीणा |
| सीकर | परसादी लाल मीणा |
| बारां | प्रताप सिंह खाचरियावास |
| ब्यावर | हरसहाय यादव |
| भरतपुर और डीग | मुरारी लाल मीणा |
| बूंदी | कुलदीप इंदौरा |
| चित्तौड़गढ़ | भजन लाल जाटव |
| चूरू | सारिका चौधरी |
| धौलपुर | महेंद्र चौधरी |
| श्रीगंगानगर | उम्मेदाराम बेनीवाल |
| हनुमानगढ़ | एम. डी. चोपदार |
| खैरथल-तिजारा | धर्मेंद्र राठौड़ |
| प्रतापगढ़ | सुमित भगासरा |
| सवाई माधोपुर | शाले मोहम्मद |
| टोंक | बृजेंद्र सिंह ओला |
| जैसलमेर | प्रहलाद गुंजल |
पंचायत चुनाव से पहले संगठन की तैयारी
पंचायतीराज चुनाव राजस्थान की राजनीति में अहम माने जाते हैं। इन चुनावों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ और स्थानीय नेताओं की सक्रियता का आकलन होता है। कांग्रेस की ओर से पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने को चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी, उनके कामकाज और चुनावी प्रक्रिया में उनकी भूमिका को लेकर पार्टी के आधिकारिक निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। चुनाव कार्यक्रम और अन्य औपचारिक घोषणाओं के बाद तस्वीर और साफ होगी।