पंचायत चुनाव: 2.27 लाख कर्मचारियों की लगेगी चुनाव ड्यूटी, उपसरपंच चुनाव के बाद ही लौट सकेंगे कर्मचारी
राजस्थान में पंचायत चुनाव (Panchayat Election) इस बार चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। वन स्टेट-वन इलेक्शन की व्यवस्था के तहत पहली बार पोलिंग पार्टियों को गांवों में लगातार करीब पांच दिन और चार रात रुकना पड़ेगा।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक कर्मचारी मतदान केंद्र छोड़कर वापस नहीं लौट सकेंगे। पंचायत चुनाव के लिए 2.27 लाख से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इनमें पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान शामिल नहीं हैं।
इस बार खास बात यह है कि एक ही पोलिंग पार्टी (Poll Party) को अलग-अलग चरणों में कई चुनावी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। पहले जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए ईवीएम से मतदान कराया जाएगा। इसके बाद यही कर्मचारी सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव बैलेट पेपर से कराएंगे। अंत में उपसरपंच के चुनाव की प्रक्रिया भी इन्हीं कर्मचारियों की निगरानी में पूरी होगी।
क्या कहा आयोग ने?
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह (Rajeshwar Singh) का कहना है कि पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। वन स्टेट-वन इलेक्शन के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। चुनावी कार्यक्रम निर्धारित समय में पूरा किया जाएगा।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 22 अक्टूबर को प्रशिक्षण पूरा होने के बाद पोलिंग पार्टियां अपने निर्धारित गांवों और मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी। इसके बाद लगातार पांच दिन तक अलग-अलग चुनावी प्रक्रियाएं पूरी कराई जाएंगी।
पहले दिन ईवीएम से मतदान
23 अक्टूबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए ईवीएम से मतदान कराया जाएगा। मतदान के बाद भी कर्मचारियों की ड्यूटी समाप्त नहीं होगी। उन्हें अगले दिन की प्रक्रिया के लिए गांव में ही रुकना होगा।
24 अक्टूबर को सरपंच और वार्ड पंच के नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी तथा चुनाव चिन्ह आवंटन जैसी प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। यानी जिस पोलिंग पार्टी ने एक दिन पहले जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए मतदान कराया होगा, वही टीम अगले दिन पंचायत स्तर के चुनाव की तैयारियों में जुटी रहेगी।
25 अक्टूबर को बैलेट पेपर से मतदान
25 अक्टूबर को सरपंच और वार्ड पंच के लिए बैलेट पेपर से मतदान कराया जाएगा। शाम 6 बजे तक मतदान पूरा होने के बाद मतगणना शुरू होगी। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव के परिणाम देर रात तक जारी किए जाएंगे।
इसके बावजूद कर्मचारियों की ड्यूटी खत्म नहीं होगी। उन्हें अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को उपसरपंच के चुनाव की प्रक्रिया भी पूरी करानी होगी। उपसरपंच का चुनाव संपन्न होने के बाद ही पोलिंग पार्टी को वापस लौटने की अनुमति मिलेगी।
पहले कैसी थी व्यवस्था?
पिछले चुनावों में पोलिंग पार्टियों को मतदान से एक दिन पहले मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया जाता था। अगले दिन मतदान होने के बाद मतगणना और परिणाम की प्रक्रिया पूरी कर कर्मचारी वापस लौट आते थे।
इस बार वन स्टेट-वन इलेक्शन के तहत एक ही टीम को लगातार कई चुनावी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। यही वजह है कि चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को इस बार सामान्य चुनावों की तुलना में अधिक समय तक मतदान केंद्रों पर रहना पड़ेगा।
हर टीम में पांच कर्मचारी
चुनाव आयोग के अनुसार प्रत्येक पोलिंग टीम में पीठासीन अधिकारी के साथ पीओ-1, पीओ-2, पीओ-3 और पीओ-4 सहित मतदान कार्मिक होंगे। संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर भी चुनाव प्रक्रिया में मौजूद रहेंगे।
कर्मचारियों की संख्या को देखते हुए इस बार चुनाव आयोग और प्रशासन के सामने मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण, उनके आवागमन, ठहरने और भोजन जैसी व्यवस्थाओं की भी बड़ी चुनौती रहेगी। इन सबकी तैयारी पहले से करनी होगी।
निजी सामान भी ले जाना होगा
पोलिंग पार्टियों को लगातार कई दिनों तक गांवों में रुकना होगा। ऐसे में कर्मचारियों को अपने जरूरी निजी सामान भी साथ लेकर जाना होगा। चुनाव ड्यूटी में शामिल कर्मचारियों को पहले से ही इस लंबे प्रवास के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए जाएंगे।
चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने वाले 2.27 लाख से अधिक कर्मचारी केवल मतदान प्रक्रिया से जुड़े कार्मिक हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की संख्या इसमें शामिल नहीं है। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए अलग से पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी।
क्यों अहम है यह बदलाव?
यह बदलाव चुनाव प्रक्रिया को और मजबूत बनाएगा। एक ही टीम लगातार कई प्रक्रियाओं में रहेगी। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही चुनाव कार्य में तेजी आएगी।
कर्मचारियों के लिए यह चुनौतीपूर्ण होगा। लेकिन प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। अब देखना जरूरी है कि यह व्यवस्था कैसे लागू होती है। सभी की नजर चुनाव कार्यक्रम पर टिकी है।