पंचायत चुनाव: नामांकन खारिज होने पर हाईकोर्ट से राहत नहीं, चुनाव के बाद याचिका का विकल्प

Mukesh Sharma | Oct 21, 2026, 16:40 IST
दशहरा के दिन खुली कोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की स्पेशल बैंच ने बुधवार को नामांकन खारिज होने की याचिका को खारिज किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतों का हस्तक्षेप नहीं हो सकता। याचिकाकर्ता ने नामांकन पत्र में एक गलती बताई, जो तारीखों से संबंधित थी। अदालत ने पहले इस तरह के मामलों में भी यही कानूनी सिद्धांत दोहराया है।

Jaipur: राजस्थान हाईकोर्ट की दशहरा अवकाश में बुधवार को स्पेशल बैंच ने नामांकन खारिज होने के मामले में सुनवाई की। जस्टिस रवि चिरानिया की स्पेशल बैंच ने पंचायती राज चुनाव का एक नामांकन पत्र के खारिज होने को चुनौती देने वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने दोहराया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें इसमें दखल नहीं दे सकतीं।



15 अक्टूबर को भरा था नामांकन

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-O, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम—1994 की धारा 117-(b) और राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियमावली, 1994 के नियम 80 के तहत संविधानिक रोक के कारण याचिका मेंटेनेबल ही नहीं है। क्यों कि एक बार चुनावी प्रकिया शुरु होने पर अदालत दखल नहीं दे सकती।



उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने स्वयं फॉर्म में अदालत का नाम और आरोप तय होने की तारीख भरी थी। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसलों के अनुसार याचिकाकर्ता अब चुनाव पूरे होने के 30 दिन के भीतर चुनाव याचिका के जरिए ही चुनौती दे सकता है।



आपराधिक मामले की जानकारी में गलती का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता आराधना स्वामी ने अदालत में दलील दी कि नामांकन फॉर्म में एक FIR का विवरण भरा गया था। इसमें गलती से अदालत द्वारा संज्ञान लेने की तारीख उस कॉलम में दर्ज हो गई, जिसमें आरोप तय होने की तारीख लिखनी थी।



वकील के मुताबिक, उम्मीदवार के खिलाफ अब तक आरोप तय ही नहीं हुए थे। ऐसे में तारीख भरने में हुई गलती को तकनीकी या लिपिकीय त्रुटि माना जाना चाहिए। उनका तर्क था कि ऐसी मामूली गलती के कारण किसी योग्य उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।



याचिकाकर्ता की तरफ से अदालत से नामांकन खारिज करने का आदेश रद्द करने और चुनाव लड़ने का अवसर देने की मांग की गई थी।



सरकार ने अनुच्छेद 243-O का दिया हवाला

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर ने याचिका की सुनवाई पर ही आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-O, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 117 और राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियमावली, 1994 के प्रावधानों के तहत चुनाव प्रक्रिया के दौरान अदालत के हस्तक्षेप पर रोक है।



सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने नामांकन फॉर्म में खुद आपराधिक मामले से जुड़ी जानकारी भरी थी। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद नामांकन खारिज करने के फैसले को रिट याचिका के जरिए चुनौती देना उचित रास्ता नहीं है।



राज्य सरकार ने यह भी कहा कि यदि उम्मीदवार को नामांकन खारिज करने के फैसले पर आपत्ति है, तो वह चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनाव याचिका दायर कर सकता है।




3 अक्टूबर से शुरू हो चुकी थी चुनाव प्रक्रिया

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की अधिसूचना 3 अक्टूबर को और संशोधित अधिसूचना 6 अक्टूबर 2026 को जारी हो चुकी थी। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई थी।



संविधान के अनुच्छेद 243-O के तहत पंचायत चुनाव से जुड़े विवादों को सामान्य रिट याचिका के जरिए चुनौती देने पर रोक है। ऐसे मामलों में कानून के तहत तय चुनाव याचिका का रास्ता अपनाना होता है। राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले भी स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़े मामलों में इसी कानूनी सिद्धांत को दोहराया है।




चुनाव के बाद भी चुनौती का विकल्प

हाईकोर्ट ने अनिल की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने नामांकन फॉर्म में दर्ज तारीख की गलती सही थी या नहीं, इस पर अंतिम फैसला नहीं दिया। याचिकाकर्ता चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत नामांकन खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।



इस फैसले का मतलब यह है कि नामांकन खारिज होने से जुड़ी हर शिकायत पर चुनाव के बीच हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकती। उम्मीदवारों को चुनावी विवादों के लिए उपलब्ध वैधानिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करना होगा।



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